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एक वेश्या की वजह से स्वामी विवेकानंद को मिली नई दिशा

Posted On: 12 Jan, 2016 Others में

Pratima Jaiswal

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यूं तो गांव में सभी मिल-जुलकर रहते थे. लेकिन कुछ दिनों से गांव में एक नाम को लेकर हलचल मची हुई थी. जिसमें एक लड़की के शहर से वापस गांव लौट आने पर खूब सियासत हो रही थी. कोई घर की महिलाओं को उसके साथ बात करने को मना करता तो कोई बच्चों को उसके पास तक न जाने की सख्त हिदायत देता. 12 क्लास में पढ़ने वाली रोशनी उस लड़की को सिर्फ खिड़की से देखा करती थी. उस लड़की की गतिविधियां उसे बेहद संदिग्ध लगती थी. रोशनी उस लड़की के बारे में बहुत से अनुमान लगाया करती थी कि शायद उसने कोई ऐसा बुरा काम किया होगा जिसकी वजह से समाज ने उसे खुद से अलग कर दिया होगा.


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एक दिन उस लड़की ने रोशनी से आकर खुद बात की. उसने बताया कि उसके परिवारवाले उसकी शादी उससे उम्र में 15 साल बड़े एक धनी आदमी से करवा रहे थे. इसलिए वो घर से शहर भाग गई वहां जाकर उसने एक गैर सरकारी संस्था की मदद से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी करके नौकरी कर ली. अब वो आत्मनिर्भर बनकर गांव में लोगों को जागरूक करने आई है. उस लड़की की बात सुनकर रोशनी को एहसास हुआ कि वो समाज के द्वारा बनाए गए पूर्वाग्रह या सोच के कारण किसी व्यक्ति को बिना जाने ही अपनी राय बना चुकी थी. जो कि अंत में गलत साबित हुई. ऐसा कभी न कभी आपके साथ भी हुआ होगा. जब आपने दूसरों के विचारों या बातों से प्रभावित होकर किसी व्यक्ति या वस्तु के प्रति धारणा बना ली होगी लेकिन क्या आप जानते है युवाओं के मार्गदर्शक कहे जाने वाले स्वामी विवेकानंद के साथ भी ऐसी ही एक घटना हुई थी जिससे उनका जीवन बदल गया था. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक वेश्या से उन्हें जीवन में तटस्थता के सिद्धांत का ज्ञान प्राप्त हुआ.


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बात उस समय की है जब जयपुर के राजा ने विवेकानंद के स्वागत के लिए राजा ने एक भव्य आयोजन किया. इसमें वेश्याओं को भी बुलाया गया. शायद राजा यह भूल गया कि वेश्याओं के जरिए एक संन्यासी का स्वागत करना ठीक नहीं है. विवेकानंद उस वक्त अपरिपक्‍व थे. वे अभी पूरे संन्‍यासी नहीं बने थे. वह अपनी कामवासना और हर चीज दबा रहे थे. जब उन्‍होंने वेश्‍याओं को देखा तो अपना कमरा बंद कर लिया. जब महाराजा को गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने विवेकानंद से माफी मांगी. महाराजा ने कहा कि उन्होंने वेश्या को इसके पैसे दे दिए हैं, लेकिन ये देश की सबसे बड़ी वेश्या है, अगर इसे ऐसे चले जाने को कहेंगे तो उसका अपमान होगा. आप कृपा करके बाहर आएं. विवेकानंद कमरे से बाहर आने में डर रहे थे. इतने में वेश्या ने गाना गाना शुरू किया,  फिर उसने एक संन्यासी भाव का गीत गाया. गीत बहुत अच्छा था. गीत का अर्थ था- ‘मुझे मालूम है कि मैं तुम्‍हारे योग्‍य नहीं, तो भी तुम तो जरा ज्‍यादा करूणामय हो सकते थे. मैं राह की धूल सही, यह मालूम मुझे. लेकिन तुम्‍हें तो मेरे प्रति इतना विरोधात्‍मक नहीं होना चाहिए.


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मैं कुछ नहीं हूं. मैं कुछ नहीं हूं. मैं अज्ञानी हूं. एक पापी हूं. पर तुम तो पवित्र आत्‍मा हो. तो क्‍यों मुझसे भयभीत हो तुम?’ विवेकानंद ने अपने कमरे में इस गीत को सुना, वेश्‍या रोते हुए गा रही थी. उन्होंने उसकी स्थिति का अनुभव किया और सोचा कि वो क्या कर रहे हैं. विवेकानंद से रहा नहीं गया और उन्होंने कमरे का गेट खोल दिया. विवेकानंद एक वेश्या से पराजित हो गए. वो बाहर आकर बैठ गए. फिर उन्होंने डायरी में लिखा, ‘ईश्‍वर से एक नया प्रकाश मिला है मुझे. डरा हुआ था मैं. जरूर कोई लालसा रही होगी मेरे भीतर. इसीलिए डर गया मैं. किंतु उस औरत ने मुझे पूरी तरह हरा दिया. मैंने कभी नहीं देखी ऐसी विशुद्ध आत्‍मा.’  अपने जीवन में घटी इस घटना से विवेकानंद को तटस्थ रहने का ज्ञान प्राप्त हुआ. उन्होंने बिना किसी वस्तु या व्यक्ति का अनुभव स्वंय न लेने से पहले किसी भी तरह की धारणा न बनाने का सबक भी सीखा…Next


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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Prafull chandra singh के द्वारा
October 1, 2016

विवेकानंद के जीवन में घटी इस घटना के बारे में जानकर मैं रोमांचित हो गया | आपने बहुत अच्छा लिखा है| इतनी अच्छी जानकारी देने के लिए आपको धन्यवाद्.


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