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संजय दत्त की दीवानी कैसे बनी ‘अंबानी’?

Posted On: 11 Feb, 2015 Entertainment में

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प्यार में भौतिक सुख-सुविधाओं की चाह से अधिक संबंधों का जीवनपर्यंत बने रहना महत्तवपूर्ण माना जाता है. लेकिन प्रेम के साथ अगर किसी को सुखी परिवार और भौतिक वस्तुओं की प्रचुरता मिले तो उसे सौभाग्यशाली माना जाता है. ऐसे सौभाग्यशालियों में एक टीना-अनिल अंबानी की जोड़ी भी है. आज टीना अंबानी के जन्मदिन पर पढ़िए उनकी जीवनी के कुछ अंश….



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व्यक्तिगत पृष्ठभूमि

टीना मुनीम(पुराना नाम) अपने माता-पिता की नौ संतानों में सबसे छोटी थी. जैन परिवार में पैदा हुई टीना अपनी बड़ी बहन भावना की तरह बचपन से ही मॉडल बनना चाहती थी. इस चाहत ने  उन्हें ‘मिस टीनेज प्रतियोगिता’ में हिस्सा लेने की प्रेरणा दी और वो इसमें जीती भी. टीना की इस जीत ने उसकी ख्वाहिशों को जैसे पर दे दिये.



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सिनेमाई सफर

टीना के सिनेमाई सफर की शुरूआत देवानंद के प्रोडक्शन हाउस के पताका तले हुई. देवानंद ने उन्हें अपनी फिल्म ‘देस-परदेस’ में अभिनेत्री की भूमिका दी. टीना मुनीम का फिल्मी सफर धमाकेदार नहीं औसत साबित हुआ. इसके अलावा प्रेम जीवन में टीना को अपने करियर का सोह नहीं रहा. कुछ वर्षों बाद कहीं काम न मिलने की वजह से उन्हें ‘कामाग्नि’ जैसी दोयम दर्ज़े की सिनेमा में काम करना पड़ा.



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प्रेम जीवन

फिल्मी सफर के धमाकेदार न होने की बाद भी वो नामचीन फिल्मी सितारों के साथ अपने प्रेम प्रसंगों के कारण मीडिया में चर्चा का विषय बनी रही. उनके प्रेम जीवन में कई अभिनेताओं का स्थान रहा जिनमें संजय दत्त और राजेश खन्ना के साथ उनका प्यार उस समय की मीडिया और चटपटी सुर्खियों को चाव से पढ़ने वालों के लिए मसाले का काम करती थी. संजय दत्त से बचपन की दोस्ती और फिर प्यार के कारण उसने देवानंद की सुपरहिट फिल्में छोड़ सुनील दत्त की फिल्म ‘रॉकी’ में काम करना पसंद किया. हालांकि संजय दत्त की नशे की लत में दोनों का संबंध-विच्छेद हो गया.



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संजय दत्त से संबंध-विच्छेद के कारण उपजी तन्हाई को दूर करने का काम राजेश खन्ना से उनकी नजदीकी ने की. दोनों फिल्मी परदे और असल ज़िंदगी में एक सफल जोड़ी की तरह दिखने लगे. उन्होंने बिन ब्याहे उनके साथ रहने का निर्णय लिया. लेकिन उनके मन में ज़िंदगी के स्थायित्व की इच्छा घर करने लगी. इस बारे में उन्होंने काका से बात की. लेकिन काका के राजी न होने पर टीना ने उनसे संबंध-विच्छेद करने में ही भलाई समझी.



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‘मुनीम’ के प्रेमांगन में अनिल का प्रवेश

ऐसे समय में जब उन्हें दोयम दर्ज़े की फिल्मों में काम करना पड़ा, उनकी मुलाकात एक शादी समारोह में अनिल अंबानी से हुई. दो-चार मुलाकातों के बाद उनमें एक-दूजे के प्रति लगाव पैदा हुआ. लेकिन जल्द ही यह बात अनिल के परिवारवालों को पता चली जिनके हृदय में सिनेमा में काम करना वाली लड़कियों के प्रति एक प्रकार का पूर्वाग्रह था जो इस जोड़ी की इच्छाओं के प्रतिकूल साबित हुई. पारिवारिक दबाव में आकर दोनों का एक-दूजे से मिलन दुर्लभ हो गया. अनिल ने इसके बारे में हर चीज़ टीना को बताने-समझाने की कोशिश की. लेकिन यह इतना आसाँ भी तो न था! आख़िर दोनों एक-दूजे से बात किये बिना करीब 3-4 वर्षों तक रहे.



टीना ‘मुनीम’ से बन गई ‘अंबानी’

इस समय में अनिल के पास कई रईसों की बेटी के प्रेम-प्रस्ताव भी मिले, जिसे परिवारवालों ने तो पसंद किया लेकिन अनिल ने सिरे से अस्वीकार कर दिया. दूसरी ओर अनिल अपने परिवारवालों को टीना को घर की बहू के रूप में स्वीकृति देने के लिए भी मनाते रहे. अंत में परिवारवालों को बेटे की ज़िद के आगे अपनी पूर्व-धारणाओं को त्यागनी पड़ी. फिर वह वर्ष भी आ गया जिसका इंतज़ार टीना और अनिल दोनों को था. वर्ष 1991 में यह जोड़ा वैवाहिक बँधन में बँध गया. आज टीना और अनिल शोहरत और सफलता के साथ अपनी ज़िंदगी जी रहे हैं. Next….



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