blogid : 3738 postid : 3172

क्यों मनाते हैं छठ महापर्व

Posted On: 27 Oct, 2014 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

भारत की विविध संस्कृति का एक अहम अंग यहां के पर्व हैं. भारत में ऐसे कई छठ पर्व हैं जो बेहद कठिन माने जाते हैं और इन्हीं पर्वों में से एक है छठ पर्व. छठ को सिर्फ पर्व नहीं महापर्व कहा जाता है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती को लगभग तीन दिन का व्रत रखना होता है जिसमें से दो दिन तो निर्जली व्रत रखा जाता है. आइए आज के इस अंक में जानें छठ के बारे में कुछ विशेष बातें और छठ व्रत कथा.


chhath puja



क्या है छठ


छठ पर्व और षष्ठी का अपभ्रंश है. कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के तुरंत बाद मनाए जाने वाले इस चार दिवसीय व्रत की सबसे कठिन है और महत्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल षष्ठी की होती है. इसी कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया.


Read: हो दीनानाथ..(शारदा सिन्हा)


छठ पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक में. चैत्र शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले छठ पर्व को चैती छठ व कार्तिक शुक्लपक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है.


The_origin


छठ व्रत कथा


मार्कण्डेय पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि सृष्टि की अधिष्ठात्री प्रकृति देवी ने अपने आप को छह भागों में विभाजित किया है और इनके छठे अंश को सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में जाना जाता है, जो ब्रह्मा की मानस पुत्री और बच्चों की रक्षा करने वाली देवी हैं. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को इन्हीं देवी की पूजा की जाती है. शिशु के जन्म के छह दिनों के बाद भी इन्हीं देवी की पूजा करके बच्चे के स्वस्थ, सफल और दीर्घ आयु की प्रार्थना की जाती है. पुराणों में इन्हीं देवी का नाम कात्यायनी मिलता है, जिनकी नवरात्र की षष्ठी तिथि को पूजा की जाती है.


Read: माता सीता ने भी रखा था छठ व्रत


छठ व्रत की परंपरा सदियों से चली आ रही है. यह परंपरा कैसे शुरू हुई, इस संदर्भ में एक कथा का उल्लेख पुराणों में मिलता है. इसके अनुसार प्रियव्रत नामक एक राजा की कोई संतान नहीं थी. संतान प्राप्ति के लिए महर्षि कश्यप ने उन्हे पुत्रयेष्टि यज्ञ करने का परामर्श दिया. यज्ञ के फलस्वरूप महारानी ने एक पुत्र को जन्म दिया, किंतु वह शिशु मृत था. इस समाचार से पूरे नगर में शोक व्याप्त हो गया. तभी एक आश्चर्यजनक घटना घटी. आकाश से एक ज्योतिर्मय विमान धरती पर उतरा और उसमें बैठी देवी ने कहा, ‘मैं षष्ठी देवी और विश्व के समस्त बालकों की रक्षिका हूं.’ इतना कहकर देवी ने शिशु के मृत शरीर का स्पर्श किया, जिससे वह बालक जीवित हो उठा. इसके बाद से ही राजा ने अपने राज्य में यह त्योहार मनाने की घोषणा कर दी.


chhath-puja


Read: छ्ठ पूजा वीडियो: मारबो रे सुगवा धनुष से….


दूसरी छठ व्रत कथा


पौराणिक मान्यता के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी के सूर्यास्त और सप्तमी के सूर्योदय के मध्य वेदमाता गायत्री का जन्म हुआ था. प्रकृति के षष्ठ अंश से उत्पन्न षष्ठी माता बालकों की रक्षा करने वाले विष्णु भगवान द्वारा रची माया हैं. बालक के जन्म के छठे दिन छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं और जिंदगी मे किसी प्रकार का कष्ट नहीं आए. अत: इस तिथि को षष्ठी देवी का व्रत होने लगा.


Read: पीपरा के पात पर उगे ले सूरज देव


तीसरी छठ व्रत कथा


एक कथा के अनुसार जब पांडव अपना सारा राजपाट जुआ में हार गए, तब द्रौपदी ने छठ व्रत किया. इससे उसकी मनोकामनाएं पूरी हुई तथा पांडवों को राजपाट वापस मिल गया.


इसके अलावा छठ महापर्व का उल्लेख रामायण काल में भी मिलता. आज छठ ना सिर्फ बिहार और यूपी बल्कि संपूर्ण भारत में समान हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है.


Read:

छठ : सूर्य की उपासना का महापर्व

छ्ठ पर्व के लिए क्या हैं कड़े नियम

छठ पूजा स्पेशल: फिल्म प्रमोशन का जरिया बनते त्यौहार



Tags:                                     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1013 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran