blogid : 3738 postid : 702485

सरोजिनी नायडू की कविताएं रद्दी में डालने लायक !

Posted On: 13 Feb, 2014 Special Days में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

श्रम करते हैं हम

कि समुद्र हो तुम्हारी जागृति का क्षण

हो चुका जागरण

अब देखो, निकला दिन कितना उज्ज्वल


Sarojini Naiduये पंक्तियां सरोजिनी नायडू की एक कविता से हैं, जो उन्होंने अपनी मातृभूमि को संबोधित करते हुए लिखी थीं. सरोजिनी नायडू को कविता लिखने का काफी शौक था. महज 13 वर्ष की आयु में ही 1300 पदों की ‘झील की रानी‘ नामक लंबी कविता और लगभग 2000 पंक्तियों का एक विस्तृत नाटक लिखकर सरोजिनी नायडू ने अंग्रेजी भाषा पर अपनी पकड़ का उदाहरण दिया था. तब उनकी कविताएं स्वतंत्रता सेनानियों को काफी प्रेरित करती थीं.


शुरुआत में सरोजनी नायडू की कविताओं में कोई नयापन नहीं था. वह उसी तरह से लिखती थीं जैसे लोग अंग्रेजी साहित्य की कविताएं लिखा करते थे. एक बार उन्होंने अपनी कविताएं अंग्रेजी साहित्यकार एडमंड विलियम गोसे को दिखाईं. उन्होंने इसे गंभीरतापूर्वक पढ़ी भी, पर जब सरोजनी नायडू ने उनसे उनकी राय जाननी चाही तो गोसे ने कहा – “मेरे विचार से इन सारी कविताओं को रद्दी की टोकरी में डाल देना चाहिए”.


Read:  बदनाम आईपीएल की मंडी में बिकता है खेल प्रेमियों का भरोसा


यह बात सरोजनी नायडू को बिलकुल ही पसंद नहीं आई और वह गंभीर हो गईं, तब गोसे बोले, क्योंकि तुम्हारी कविताएं अंग्रेजी साहित्य की कविताओं जैसी हैं. इनमें कोई नयापन नहीं है, जिससे कहा जा सके कि इसे भारतीय कवि या लेखक ने लिखा है. तुम्हारी रचनाएं तभी महान होंगी, जब तुम इन्हें भारतीय परिप्रेक्ष्य से लिखोगी. भारत के गांवों के दृश्य, भारतीय लोकजीवन की झलकियां और वहां की जिंदगी से उठाए गए उदाहरण तुम्हारी कविताओं को एक अलग ही विशिष्टता प्रदान करेंगे.


इस बात ने नायडू को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया था. पुराने ढर्रे से हटकर उन्होंने अपनी कविताओं में नया मोड़ दिया जिसे पढ़कर आज भी लोग शक्ति, साहस और ऊर्जा पाते हैं.  सरोजिनी नायडू का प्रथम कविता-संग्रह ‘द गोल्डन थ्रेशहोल्ड’ [The Golden Threshold](1905) में प्रकाशित हुआ जो आज भी पाठकों के बीच बेहद लोकप्रिय है. उन्होंने ‘लंदन-टाइम्स’ और ‘द मेन्चैस्टर गार्जियन’ जैसे अखबारों में अपनी कविता-संग्रह की प्रशंसा युक्त समीक्षाएं भी लिखीं जिसे काफी सराहा गया.


Read more:

इस इंसानी भूत का रहस्य क्या है?

Sarojini Naidu Profile in Hindi

Web Title : sarojini naidu poems



Tags:           

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 2.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran