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जावेद अख्तर: जब छाए तेरा जादू कोई बच ना पाए

Posted On: 16 Jan, 2014 Others,Special Days,Religious में

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फिल्मों में सैकड़ों लोग काम करते हैं लेकिन उनकी पहचान अभिनेता-अभिनेत्री और ज्यादा से ज्यादा फिल्म निर्देशक तथा संगीतकार तक ही सीमित रहती है. आज के दौर में तो खासकर अधिकतर फिल्में अभिनेताओं को देखकर ही बनाई जाती हैं, लेकिन इन्हीं फिल्मों से कोई लेखक अपनी पहचान बना ले ऐसा कम ही देखने को मिलता है. ऐसे ही एक गीतकार और पटकथा लेखक हैं जावेद अख्तर.


javed akhtar 1जावेद अख्तर का बचपन

इनका जन्म 17 जनवरी, 1945 को ग्वालियर में हुआ था. पिता जान निसार अख्तर प्रसिद्ध प्रगतिशील कवि और माता सफिया अख्तर मशहूर उर्दू लेखिका तथा शिक्षिका थीं. इनके बचपन का नाम जादू जावेद अख्तर था. बचपन से ही शायरी से जावेद अख्तर का गहरा रिश्ता था. उनके घर शेरो-शायरी की महफिलें सजा करती थीं जिन्हें वह बड़े चाव से सुना करते थे. जावेद अख्तर ने जिंदगी के उतार-चढ़ाव को बहुत करीब से देखा था, इसलिए उनकी शायरी में जिंदगी के फसाने को बड़ी शिद्दत से महसूस किया जा सकता है.


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जावेद अख्तर का कॅरियर

वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म ‘अंदाज’ की कामयाबी के बाद जावेद अख्तर कुछ हद तक बतौर डॉयलाग राइटर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए. फिल्म ‘अंदाज’ की सफलता के बाद जावेद अख्तर और सलीम खान को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए. इन फिल्मों में “हाथी मेरे साथी”, ‘सीता और गीता’, ‘जंजीर’ और ‘यादों की बारात’ जैसी फिल्में शामिल हैं. फिल्म ‘जंजीर’ जावेद अख्तर और सलीम खान के लिए मील का पत्थर साबित हुई. इस फिल्म ने न केवल इन दोनों को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचाया बल्कि यही वह फिल्म थी जिसने भारतीय सिनेमा को अमिताभ जैसे अभिनेता दिए.

फिल्म ‘सीता और गीता’ के निर्माण के दौरान उनकी मुलाकात हनी ईरानी से हुई और जल्द ही जावेद अख्तर ने हनी ईरानी से निकाह कर लिया. हनी इरानी से उनके दो बच्चे हुए फरहान अख्तर और जोया अख्तर. लेकिन हनी इरानी से उन्होंने तलाक लेकर साल 1984 में शबाना आजमी से शादी कर ली.


सलीम-जावेद की हिट जोड़ी

शुरुआत के दिनों में जावेद अख्तर और सलीम खान फिल्मों में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया इन दोनों की जोड़ी ने भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक फिल्म स्क्रिप्ट दिए. इसमें शामिल हैं जंजीर, यादों की बारात, शोले, डॉन और दीवार, सीता और गीता, मिस्टर इंडिया आदि. इन फिल्मों में ‘शोले’ को हिन्दुस्तान की सार्वकालिक बेहतरीन फिल्मों में शामिल किया गया है.

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यही वह फिल्म है जिसकी वजह से सलीम-जावेद की जोड़ी ने 26 साल पुरानी अपनी दुश्मनी को भुलाकर साथ आने का फैसला किया है. इस फिल्म के थ्री डी वर्जन ने ही दोनों को साथ ला खड़ा किया. एक से बढ़कर एक हिट फिल्में देने वाली इस जोड़ी की आखिरी फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ थी. जिसके बाद दोनों ने 12 साल की दोस्ती खत्म कर दी थी. उस दौरान दोनों ने साथ रहकर 24 फिल्मों में काम किया जिसमें से 20 सुपर हिट रहीं.


कैसे हुए सलीम-जावेद अलग

कहा जाता है कि मिस्टर इंडिया की स्क्रिप्ट लिखते वक्त सलीम-जावेद अमिताभ को उस रोल के लिए लेना चाहते थे, जो बाद में अनिल कपूर ने किया. अमिताभ ने यह रोल करने से इनकार कर दिया था. अमिताभ के इनकार से सलीम खफा हो गए और उन्होंने बिग बी के साथ कभी काम ना करने का फैसला किया. कहते हैं कि ये बात जावेद ने अमिताभ से गलती से कह दी और इसी वाकये ने सलीम-जावेद के बीच ऐसी गलतफहमी पैदा कर दी, जिसे भुलाने में इन दो दिग्गज लेखकों को 26 साल लग गए.


आज भी अनवरत जारी है लेखनी

लगभग तीन दशक से अपने गीतों से संगीत जगत को सराबोर करने वाले महान शायर और गीतकार जावेद अख्तर की रूमानी नज्में आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं जिन्हें सुनकर श्रोताओं के दिल से बस एक ही आवाज निकलती है ‘जब छाए तेरा जादू कोई बच ना पाए’.


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