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विवेकानन्द के विचार को फिर से समझने की है जरूरत

Posted On: 11 Jan, 2014 Others,Special Days में

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“उठो मेरे शेरों, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो, सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो”. युवाओं के के लिए यह संदेश और कोई नहीं महान विचारक और हिन्दू धर्म के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली आध्यात्मिक नेता स्वामी विवेकानन्द ने दिया था. आज विवेकानंद की जयंती है जिसे पूरे देशभर में राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है.


vivekanandaवास्तव में यह दिवस भारत के युवा स्वप्नों का साकार दिवस है. यह दिवस संपूर्ण राष्ट्र को संचालित करने वाले तंत्र में युवाओं की भूमिका के साथ ही राष्ट्र के भविष्य की दिशा को प्रतिबिंबित करने का दिवस भी है. विवेकानंद ने देश के युवाओं के लिए कहा था कि हमें कुछ ऐसे युवा चाहिए जो देश की खातिर अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार हों. आज भारत में 13 से 35 आयु वर्ग की कुल जनसंख्या 50 करोड़ से भी ज्यादा है. देश के यही युवा अपनी परंपरागत छवि के आवरण को उतारकर न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं.


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युवाओं के प्रेरणास्त्रो‍त, समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा था कि निराशा, कमजोरी, भय तथा ईर्ष्या युवाओं के सबसे बड़े शत्रु हैं. युवाओं का उससे भी बड़ा शत्रु स्वयं को कमजोर समझना है. विवेकानंद ने युवाओं को जीवन में लक्ष्य निर्धारण करने के लिए स्पष्ट संकेत दिया कि तुम सदैव सत्य का पालन करो, विजय तुम्हारी होगी.

स्वामी विवेकानंद के विचारों को केंद्र में रखकर युवाओं की वर्तमान दशा-दिशा बदल सकती है इसलिए आइए उनके विचारों पर थोड़ा प्रकाश डालते हैं.


1. उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाए.


2. अगर धन दूसरों की भलाई करने में मदद करे, तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा, ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाए उतना बेहतर है.


3. उस व्यक्ति ने अमरत्व प्राप्त कर लिया है, जो किसी सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता.

4. जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते.

5. हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है, इसलिए इस बात का ध्यान रखिए कि आप क्या सोचते हैं. शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं.

6. विश्व एक व्यायामशाला है जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं.

7. खुद  को  कमजोर  समझना  सबसे  बड़ा  पाप  है.

8. कुछ सच्चे, ईमानदार और ऊर्जावान पुरुष और महिलाएं; जितना कोई भीड़  एक सदी में कर सकती है उससे अधिक एक वर्ष में कर सकते हैं.

9. एक समय में एक काम करो और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ.

10. शारीरिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से जो कुछ भी कमजोर बनता  है, उसे जहर की तरह त्याग दो.

11. बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं.

12. सच्ची सफलता और आनंद का सबसे बड़ा रहस्य यह है: वह पुरुष या स्त्री जो बदले में कुछ नहीं मांगता, पूर्ण रूप से निःस्वार्थ व्यक्ति, सबसे सफल है.

13. सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना. स्वयं पर विश्वास  करो.


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युद्धवीर सिंह लांबा “भारतीय” के द्वारा
December 25, 2014

स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद जी आधुनिक भारत के एक महान चिंतक, दार्शनिक, युवा संन्यासी, युवाओं के प्रेरणास्त्रोत और एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे । स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी सन् 1863को कलकत्ता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। स्वामी विवेकानंद संत रामकृष्ण के शिष्य थे और स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में कलकत्ता में रामकृष्ण मिशन और 9 दिसंबर 1898 को कलकत्ता के निकट गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की। विश्वभर में जब भारत को निम्न दृष्टि से देखा जाता था, ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर, 1883 को शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म पर प्रभावी भाषण देकर दुनियाभर में भारतीय आध्यात्म का डंका बजाया। उन्हें (स्वामी विवेकानंद )प्रमुख रूप से उनके प्रेरणात्मक भाषण की शुरुआत “मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों” के साथ करने के लिये जाना जाता है। उनके (स्वामी विवेकानंद )संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था। विश्व धर्म सम्मेलन में उपस्थित 7000 प्रतिनिधियों ने तालियों के साथ उनका (स्वामी विवेकानंद )स्वागत किया। भारत में स्वामी विवेकानन्द के जन्म दिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व के अधिकांश देशों में कोई न कोई दिन युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1985 ई. को अन्तरराष्ट्रीय युवा वर्ष घोषित किया गया। भारतीय केंद्र सरकार ने वर्ष 1984 में मनाने का फैसला किया था ।राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस (12 जनवरी) पर वर्ष 1985 से मनाया जाता है । भारत में स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती, अर्थात 12 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद जी ने हमेशा युवाओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया और युवाओं को आगे आने के लिए आह्वान किया । स्वामी विवेकानंद ने अपनी ओजस्वी वाणी से हमेशा भारतीय युवाओं को उत्साहित किया है । स्वामी विवेकानंद के विचार सही मार्ग पर चलते रहने कीप्रेरणा देते हैं। युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद ने युवाओं का आह्वान करते हुए कठोपनिषद का एक मंत्र कहा था:- “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ।”-उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक अपने लक्ष्य तक ना पहुँच जाओ। भारतीय युवा और देशवासी स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके विचारों से प्रेरणा लें। युद्धवीर सिंह लांबा “भारतीय” (Yudhvir Singh Lamba Bhartiya) प्रशासनिक अधिकारी, हरियाणा इंस्टिटयूट ऑफ टेक्नॉलॉजी, दिल्ली रोहतक रोड (एनएच -10) बहादुरगढ़, जिला. झज्जर, हरियाणा राज्य, भारत

anant kumar srivastava के द्वारा
January 12, 2014

बहुत ही दुखद बात है कि आपके दैनिक मे स्वामी जी के बारे में एक भी शब्द नही लिखा गया था।जबकी हमारे सबसे महान राष्ट्र नायक की151वा जन्म दिवस हैऔर उनके अमर संदेशो की राष्ट्रीय आवश्यकता है।यह है हमारी पत्रकारिता को लज्जित करने वाला दायित्व। 


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