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चाचा नेहरू के ‘बाल’ बने श्रमिक

Posted On: 14 Nov, 2013 Others में

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महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर बाल दिवस के दिन अपना आखिरी टेस्ट मैच खेलना शुरू करेंगे. यानी कि वह अपनी समृद्ध विरासत बाल दिवस के दिन देश के युवा खिलाड़ियों के लिए छोड़ेंगे. यहां सचिन की बात इसलिए की गई है क्योंकि हममें से हर कोई चाहता है कि हमारा बच्चा अमिताभ, शाहरुख या सचिन तेंदुलकर बने.


Child Labour 1बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्म दिवस के दिन ‘बाल दिवस’ स्कूलों तथा अन्य संस्थाओं सहित पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. लेकिन भारत जैसे देश में जहां बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल शोषण के तमाम बहुतेरे मामले हों वहां क्या यह उम्मीद की जा सकती है कि बच्चों का भविष्य बेहतर होगा.


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एक रिपोर्ट के अनुसार आज भी चाचा नेहरू के इस देश में लगभग 10 करोड़ बच्चे बाल श्रमिक हैं. जो चाय की दुकानों पर नौकरों के रूप में, कारखानों में मजदूरों के रूप में या फिर सड़कों पर भटकते भिखारी के रूप में नजर आ ही जाते हैं. इनमें से कुछेक ही बच्चे ऐसे हैं, जिनका उदाहरण देकर हमारी सरकार सीना ठोंककर देश की प्रगति के दावे को सच होता बताती है. यही नहीं आज देश के लगभग 5.22 प्रतिशत बच्चे शोषण के शिकार हैं. इनमें से अधिकांश बच्चे अपने रिश्तेदारों या मित्रों के यौन शोषण के शिकार हैं. अपने अधिकारों के प्रति अनभिज्ञता व अज्ञानता के कारण ये बच्चे शोषण का शिकार होकर जाने-अनजाने कई अपराधों में लिप्त होकर अपने भविष्य को अंधकारमय कर रहे हैं.


जिन बच्चों का शोषण हो रहा है उनमें से 30 फीसदी गिट्टी खदानों, 20 फीसदी ईंट भट्टे, 20 फीसदी होटल या चाय की दुकानों, 28 फीसदी घरेलू कार्यों तथा 2 फीसदी विभिन्न कारखानों में लगे हुए हैं.


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बचपन आज भी भोला और भावुक ही होता है लेकिन हम उन पर ऐसे-ऐसे काम का बोझ डाल रहे हैं कि उनका जीवन तनाव और दबाव से घिर गया है. पहले की तरह अब हमें उनकी खनकती-खिलखिलाती किलकारियां देखने या सुनने को नहीं मिलतीं. भौतिकतावादी समाज ने उन्हें या तो मजबूर मजदूर बना दिया है या फिर उन्हें तनाव से ग्रसित कर दिया है.


चाचा नेहरू को दो बातें बहुत पसंद थीं – पहली वह अपनी शेरवानी की जेब में गुलाब का फूल रखते थे और दूसरी वह बच्चों के प्रति बहुत ही मानवीय और प्रेमपूर्ण थे. यह दोनों ही बातें इस बात की सूचना देती हैं कि बच्चे भी गुलाब के समान कोमल होते हैं. अगर हमें बेहतर भविष्य की अपेक्षा करनी है तो उन्हें सहेज कर रखना चाहिए.

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