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Narasimha rao Profile in Hindi: बाबरी मस्जिद के दाग इन पर भी पड़े

Posted On: 28 Jun, 2013 Others में

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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि पार्टी का नेतृत्व किसके हाथों सौंपा जाए. तब इस समस्या को हल करने के लिए नरसिंह राव को आगे लाया गया जिन्होंने प्रधानमंत्री बनते ही भारत की अर्थव्यवस्था को विश्व के लिए खोल दिया. उन्होंने अपने शासनकाल में भारत में पिछड़ी तथा अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए बने मंडल आयोग की सिफारिशें भी लागू की.

नरसिंह राव ने जितना भारतीय समाज और उसकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए काम किया उससे कहीं ज्यादा उनके शासनकाल में कुछ ऐसे दाग लगे जिसे आज तक मिटाया नहीं जा सका. यह नरसिंह राव का ही दौर था जब 1991 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दी गई जिसके बाद देश भर में दंगे हुए.


जीवन परिचय

स्वतंत्र भारत के नौवें प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव का जन्म 28 जून, 1921 में आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव करीम नगर में हुआ था. बहुत ही कम लोग उनके पूरे नाम पामुलापति वेंकट नरसिंह राव से परिचित हैं. इनके पिता का नाम पी. रंगा था. नरसिंह राव ने उस्मानिया विश्विद्यालय तथा नागपुर और मुंबई के विश्विद्यालयों से विधि संकाय में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधियां प्राप्त की. पी.वी. नरसिंह राव राजनीति के अतिरिक्त कला, साहित्य, संगीत आदि विभिन्न विषयों में भी रुचि रखते थे. नरसिंह राव की विभिन्न भारतीय भाषाओं पर भी अच्छी पकड़ थी. अलग-अलग भाषाओं को सीखना और उन्हें बोलचाल में प्रयोग करना उनका अनूठा शौक था. पी.वी. नरसिंह राव को भारत के पहले दक्षिण भारतीय प्रधानमंत्री बनने का भी गौरव प्राप्त है.


पी.वी. नरसिंह राव का व्यक्तित्व

पी.वी. नरसिंह राव विभिन्न प्रतिभाओं के धनी थे. राजनीति के ज्ञाता होने के साथ ही उन्हें सिनेमा और थियेटर में भी समान रुचि थी. वह भारतीय दर्शन और संस्कृति में भी विशेष दिलचस्पी रखते थे. वह शांत व्यक्तित्व वाले प्रधानमंत्री थे. वह बोलने से ज्यादा करने में विश्वास रखते थे. उन्हें भाषाओं को सीखने का जुनून था. ना सिर्फ भारतीय भाषाएं बल्कि वह स्पेनिश और फ्रांसीसी भाषाएं भी बोल और लिख सकते थे.


पी.वी. नरसिंह राव का राजनैतिक सफर

नरसिंह राव ने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई और आजादी के बाद वह पूर्ण रूप से राजनीति में आ गए. लेकिन वह काफी समय तक आंध्र-प्रदेश की राजनीति में ही संलिप्त रहे. उन्हें अपने काम के लिए बहुत ख्याति मिली. 1962 से 1971 के बीच वह आंध्र-प्रदेश के एक विख्यात और मजबूत राजनेता बन गए. वह 1971 से 1973 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे. नरसिंह राव कांग्रेस के प्रति पूर्ण समर्पित नेता थे. उन्होंने आपातकाल के समय भी इन्दिरा गांधी को सहयोग दिया. कांग्रेस के विघटन के बाद भी वह इन्दिरा गांधी के ही साथ रहे क्योंकि वह इन्दिरा की लोकप्रियता और उनकी राजनैतिक मजबूती को बहुत अच्छी तरह समझते थे. राजीव गांधी की हत्या के पश्चात योग्य प्रधानमंत्री की जरूरत महसूस हुई. उस समय नरसिंह राव का नाम सामने आया. यद्यपि उस समय स्वास्थ्य की दृष्टि से परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं, लेकिन कई दिग्गज नेताओं के दबाव में उन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभालना स्वीकार कर लिया. प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद उनके लगातार गिरते हुए स्वास्थ्य में भी सुधार होने लगा. कर्तव्य और उत्तरदायित्वों की भावना ने उन्हें और मजबूती प्रदान कर दी थी. प्रधानमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने नई आर्थिक नीति की शुरुआत की जिसमें देश की अर्थव्यवस्था को वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया. इसमें वह काफी हद तक सफल भी रहे.


नरसिंह राव से जुड़ी विवादास्पद घटनाएं

पी.वी. नरसिंह राव के लिए प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचना भले ही आसान रहा हो लेकिन अपने कार्यकाल में उन्हें अनेक आरोपों और विवादों का सामना करना पड़ा. इन्हें भ्रष्टाचार और हवाला जैसे आरोपों का सामना करना पड़ा. हर्षद मेहता ने उन पर यह आरोप लगाया कि अपने ऊपर लगे आरोपों से मुक्त होने के लिए उसने नरसिंह राव को 1 करोड़ रुपयों की रिश्वत दी थी. इसके अतिरिक्त उन पर बहुमत साबित करने के लिए सांसदों की खरीद-फरोख्त के भी आरोप लगे. अयोध्या की बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद पर उन पर असफल और मूक प्रधानमंत्री जैसे कई आरोप लगाए गए. इन्दिरा गांधी की हत्या के पश्चात दिल्ली में जो दंगे भड़के, उसके लिए भी नरसिंह राव की इस मुद्दे के प्रति उदासीनता को ही दोषी माना गया. उस समय वह देश के गृहमंत्री थे.


नरसिंह राव का निधन

2004 के आसपास नरसिंह राव की तबियत खराब रहने लगी थी. सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें 9 दिसंबर, 2004 को एम्स में दाखिल कराया गया. कुछ दिन अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में रहने के बाद 23 दिसंबर को उन्होंने अपना देह त्याग दिया.


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