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पढ़ें गुरु नानक जी के 10 उपदेश

Posted On: 15 Apr, 2013 Others में

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guru nanak devसिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु गुरुनानक देव संसार में ऐसी आध्यात्मिक शख्सियत के रूप में प्रगट हुए जिन्होंने मानवता की सर्व कठिनाइयों, अरुचियों, प्रवृत्तियों को प्रामाणिक शिक्षा एवं उपदेश देकर उनके निजी, सामाजिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक जीवन को परिपक्व बनाया. मान्यता के अनुसार गुरुनानक देव का जन्म 15 अप्रैल, सन 1469 को लाहौर के पास तलवंडी में हुआ. पूरे देश में गुरु नानक का जन्म दिन प्रकाश दिवस के रूप में कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. नानक के पिता का नाम कालू एवं माता का नाम तृप्ता था.


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गुरू नानक देव जी ने एक ऐसे विकट समय में जन्म लिया जब भारत में कोई केंद्रीय संगठित शक्ति नहीं थी. विदेशी आक्रमणकारी देशवासियों का मान मर्दन कर देश को लूटने में लगे थे. धर्म के नाम पर अंधविश्वास और कर्मकांड का बोलबाला था. बचपन से इनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे थे. पढ़ने लिखने में इनका मन नहीं लगा. 7-8 साल की उम्र में स्कूल छूट गया और सारा समय वे आध्यात्मिक चिंतन और सत्संग में व्यतीत करने लगे. 16 वर्ष की आयु में इनका विवाह हुआ. इनके पुत्रों के नाम श्रीचंद और लक्ष्मीचंद थे.


गुरू नानक देव जी एक महान क्रान्तिकारी, समाज सुधारक और राष्ट्रवादी गुरू थे. गुरू नानक अपने व्यक्तित्व में दार्शनिक, योगी, गृहस्थ, धर्मसुधारक, समाजसुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु – सभी के गुण समेटे हुए थे. नानक सर्वेश्वरवादी थे. मूर्तिपूजा को उन्होंने निरर्थक माना. रूढ़ियों और कुसंस्कारों के विरोध में वे सदैव तीखे रहे.


गुरु नानक देव ने भाईचारा, एकता, जातिवाद को मिटाने के लिए कुछ जरूरी उपदेश दिए:

1. ईश्वर एक है. वह सर्वत्र विद्यमान है. हम सबका “पिता” वही है इसलिए सबके साथ प्रेम पूर्वक रहना चाहिए.

2. किसी भी तरह के लोभ को त्याग कर अपने हाथों से मेहनत कर एवं न्यायोचित तरीकों से धन का अर्जन करना चाहिए.

3. कभी भी किसी का हक नहीं छीनना चाहिए बल्कि मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से ज़रूरतमंद को भी कुछ देना चाहिए.

4. धन को जेब तक ही सीमित रखना चाहिए. उसे अपने हृदय में स्थान नहीं बनाने देना चाहिए.

5. स्त्री-जाति का आदर करना चाहिए. वह सभी स्त्री और पुरुष को बराबर मानते थे.

6. तनाव मुक्त रहकर अपने कर्म को निरंतर करते रहना चाहिए तथा सदैव प्रसन्न भी रहना चाहिए.

7. संसार को जीतने से पहले स्वयं अपने विकारों पर विजय पाना अति आवश्यक है.

8. अहंकार मनुष्य को मनुष्य नहीं रहने देता अतः अहंकार कभी नहीं करना चाहिए बल्कि विनम्र हो सेवाभाव से जीवन गुजारना चाहिए.

9. गुरु नानक देव पूरे संसार को एक घर मानते थे जबकि संसार में रहने वाले लोगों को परिवार का हिस्सा.

10. लोगों को प्रेम, एकता, समानता, भाईचारा और आध्यत्मिक ज्योति का संदेश देना चाहिए.


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