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Kasturba Gandhi in Hindi - बापू के सेक्स संबंधी प्रयोगों का बा ने क्यूं किया समर्थन?

Posted On: 22 Feb, 2013 Others में

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महात्मा गांधी भारत के राष्ट्रपिता के रूप में सदा हमारे दिलों में बसेंगे. एक आदर्श शख्सियत की तरह गांधी जी ने अपनी जिंदगी को दूसरों के लिए न्यौछावर करने का पुण्य कार्य किया. दूसरों के लिए सिद्धांत और पथ बनाने के लिए उन्होंने इन सिद्धांतों को खुद पर ही प्रयोग किए. इनमें से कई प्रयोगों में वह सफल भी हुए. गांधी जी के सत्य और अनुशासन के सिद्धांत को तो दुनिया भी सलाम करती है लेकिन गांधी जी का एक ऐसा सिद्धांत है जिस पर दुनिया कभी एकमत नहीं हो पाई है और वह है ब्रह्मचर्य का सिद्धांत. कई लोग मानते हैं कि गांधी जी का अपने जीवन में ब्रह्मचर्य को अपनाने का फैसला बा यानि कस्तूरबा गांधी के लिए बेहद कठिन और पीड़ादायक रहा.

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कस्तूरबा गांधी का जीवन

कहते हैं एक सफल आदमी के पीछे एक स्त्री का हाथ होता है और इस वाक्य के हर एक शब्द को कस्तूरबा गांधी ने चरितार्थ किया था.

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11 अप्रैल, 1869 को पोरबंदर में जन्मी कस्तूरबा गांधी महात्मा गांधी की भांति शिक्षित नहीं थीं. लेकिन कई लोग मानते हैं कि अगर आप गांधी जी और कस्तूरबा गांधी का तुलनात्मक अध्ययन करें तो आपको कस्तूरबा गांधी का व्यक्तित्व गांधी की अपेक्षा अधिक बड़ा नजर आ सकता है लेकिन भारतीय समाज जो भावनाओं की नदी के समान होता है वह महात्मा गांधी को सबसे ऊपर मानता है. कई लोग इसे भारत के पुरुषवादी समाज की सोच भी मानते हैं. गांधी जी और कस्तूरबा गांधी में तुलना करना व्यवहारिक तो नहीं है लेकिन निष्पक्ष भाव से देखने में कहीं ना कहीं कस्तूरबा गांधी के त्याग गांधी जी से श्रेष्ठ सिद्ध होते हैं.

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गांधी भी मानते थे बा हैं अधिक गुणी

स्वयं गांधीजी इस बात को स्वीकार करते हुए कहते थे: ‘‘जो लोग मेरे और बा के निकट संपर्क में आए हैं, उनमें अधिक संख्या तो ऐसे लोगों की है, जो मेरी अपेक्षा बा पर अनेक गुना अधिक श्रद्धा रखते हैं.’’


गांधी जी और कस्तूरबा गांधी का विवाह

कस्तूरबा गांधी के पिता गोकुलदास माकनजी महात्मा गांधी के पिता करमचंद गांधी के बेहद करीबी मित्र थे. दोनों मित्रों ने अपनी मित्रता को रिश्तेदारी में बदलने का निर्णय लिया और मात्र सात बर्ष की उम्र में ही कस्तूरबा गांधी और महात्मा गांधी की सगाई और तेरह वर्ष की अल्प आयु में शादी हो गई. यह एक संयोग ही था कि गांधी जी खुद तो जिंदगी भर बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाते रहे लेकिन उनका खुद बाल विवाह हुआ था. शायद यह संयोग कम गांधी जी के लिए प्रयोग अधिक सिद्ध हुआ जिसके बाद गांधी जी ने सदैव बाल विवाह का विरोध किया.


बा का गृहस्थ जीवन कांटों के ताज जैसा था. गांधीजी उनकी निरक्षरता से कुढ़ते रहते थे और उन्हें ताने देते रहते थे. उनका सजना, संवरना और घर से बाहर निकलना भी उन्हें नापसंद था. वे शक्की और ईर्ष्यालु पति थे. इस बात को उन्होंने भी स्वीकार किया था.


स्वयं की पहचान बनाई बा ने

कस्तूरबा गांधी को वात्सल्य भाव से गांधी जी बा कहकर पुकारते थे. यह सर्वविदित है कि वह धर्मपरायण महिला थीं और जीवनसाथी की परिभाषा को पूर्णता प्रदान करते हुए जिंदगी के हर मोड़ पर उन्होंने बापू का साथ निभाया था. दक्षिण अफ्रीका प्रवास के दौरान रंगभेद की नीति के विरुद्ध बा कई बार जेल गईं. भारत में भी, आजादी की लड़ाई में उन्होंने बापू के कदम-से-कदम मिलाया. एक आदर्श पत्नी की तरह कस्तूरबा हमेशा अपने पति के साथ खड़ी नजर आईं, भले ही मोहनदास के कुछ विचारों से वह सहमति नहीं रखती थीं. कौन भूल सकता है कि जब गांधी जी ने 1906 में ब्रह्मचर्य का व्रत रखा था तो कस्तूरबा ने इसका कतई विरोध नहीं किया था. कस्तूरबा गांधी ने ही गांधी के आश्रम के अधिकतर कार्यों को संभाला हुआ था. 22 फरवरी, 1944 को उन्हें भयंकर दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा.

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गांधी जी का ब्रह्मचर्य का व्रत और बा की मनःस्थिति

गांधी जी दूसरों का आदर्श बनने से पहले किसी भी सिद्धांत को खुद पर लागू करते थे. उनके हर सिद्धांत के साथ कई प्रयोग और कई अनुभव जुड़े हैं. चाहे वह अहिंसा का सिद्धांत हो या उनके ब्रह्मचर्य का प्रयोग, सभी में आप गांधी जी की प्रयोगात्मक सोच को पाएंगे. लेकिन दुनिया में जिस एक चीज के लिए गांधी जी की सबसे अधिक आलोचना हुई वह था सेक्स और ब्रह्मचर्य पर आधारित उनके प्रयोग. कई लोग मानते हैं कि वह अपनी इंद्रियों पर काबू रखने के लिए कई स्त्रियों को लिए रात को एक ही बिस्तर पर सोते थे. कई लोगों का तो यह भी मानना था कि इस अवस्था में वह खुद और उस उक्त स्त्री को निर्वस्त्र रख खुद पर काबू पाने की कोशिश करते थे. यह प्रयोग तो गांधी जी के थे लेकिन क्या इनसे कभी कस्तूरबा गांधी को बुरा नहीं लगा होगा?


अधिकतर इतिहासकारों के अनुसार कस्तूरबा गांधी एक भारतीय स्त्री थीं जो अपने पति के किसी भी फैसले का अनादर नहीं करना चाहती थीं. वह गांधी जी के सही और गलत सभी फैसलों का सिर्फ आदर करना चाहती थीं. एक पत्नी के लिए अपने पति को किसी पराई स्त्री के लिए सोता देखना शायद सबसे दुखदायी होता है लेकिन शायद अपनी इसी भावन पर काबू रखने के कारण ही कस्तूरबा गांधी को भारतीय इतिहास की एक महान स्त्री माना जाता है.


Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya- कस्तूरबा गांधी विद्यालय और अस्पताल

कस्तूरबा गांधी खुद निरक्षर थीं. शुरुआती दापंत्य सफर में कई बार उन्हें इस कारण गांधी जी के क्रोध का सामना करना पड़ता था लेकिन धीरे-धीरे गांधी जी ने कस्तूरबा गांधी को खुद पढ़ा कर उन्हें शिक्षित करने में सहायता की. इसके बाद कस्तूरबा गांधी अपने आश्रम में आई महिलाओं को शिक्षित करने का भी कार्य करने लगीं. कस्तूरबा गांधी के शिक्षा की तरफ इस झुकाव के कारण ही उनकी मृत्यु के पश्चात उनके नाम के कई विद्यालय और अस्तपाल खोले गए.


गांधी जी के ब्रह्मचर्य के प्रयोग और उन पर कस्तूरबा गांधी की प्रतिक्रिया हर युग में प्रासंगिक रहेगी लेकिन इस बात से कोई भी इंकार नहीं कर सकता कि कस्तूरबा गांधी भारतीय इतिहास की एक महान स्त्री रहेंगी.

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अंतरात्मा के द्वारा
June 12, 2013

हाहा क्या दलील है …. आज के कोई संत महात्मा अगर किसी लड़की से बात भी कर ले तो ये मीडिया उनके पीछे पढ जायेगा … गाँधी बाबा ने तो हद्द कर दी … गोली मारने से आदमी मरता है की नहीं पहले ये चेक करो क्या दलील है गाँधी बाबा की वाह वाह …. अपनी इन्द्रिय संयम की परीक्षा लेने के लिए ओरतो को नंगी करो गजब है … गाँधी बाबा का खेल … स्त्री से दूर रह के क्या ब्र्म्हयचर्य का पालन नहीं किया जा सकता ? अजीब शोक था गाँधी बाबा को क्या ये माना नहीं जाए की बाबा को लडकियों को नंगा देखने का शोक था उनके साथ सोने का शोक था इसलिए ये सब नाटक करते थे गाँधी बाबा ….

Dev के द्वारा
March 2, 2013

वाह रे गाँधी जी और उनके चेले. जब यही एक्सपेरिमेंट अपने नारायण दत्त तिवारी ने किया तो उन्हें ठरकी बोल दिया. हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा. क्या एक्सपेरिमेंट है और क्या तरीका है. वो कहते है की कृष्णा करे तो रासलीला और में करू तो करैक्टर ढीला ? बेचारे तिवारी, गाँधी जी के पग चिन्हों पर चलते चलते पकडे गए. ऐसे कई है आज की राजनीती में निरा गांधीवादी चोर… जरा गौर कीजिये. गांधीजी बहुत अच्छे इंसान थे लेकिन वो इस देश का और भला कर सकते थे अगर वो टाइम पर हिमालय चले जाते और गंद नहीं मचाते तो….

Santosh Kumar के द्वारा
February 24, 2013

एक सवाल बनता है ,…यह प्रयोग गाँधी जी अपनी पत्नी के साथ भी तो कर सकते थे ,..फिर अन्य नारियों का इस्तेमाल क्यों ?…..कामवासना मन में उठती है ,……जागृति के क्षण अपने साथी के साथ अधिकतम होते हैं ,….फिर यह ढोंग क्यों ? …क्या उन्हें बा सो विरक्ति थी और चरित्रहीनता के शिकार थे ,..


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