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लोकतंत्र का महापर्व है गणतंत्र दिवस

Posted On: 26 Jan, 2013 Others में

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!! जागरण जंक्शन के सभी पाठकों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!


जिस तरह स्वतंत्रता दिवस हर साल हमारे पूर्वजों द्वारा आजादी प्राप्त करने की विजय गाथा को याद करने का दिन है उसी तरह गणतंत्र दिवस (Republic Day) भी हमें हमारे गणतांत्रिक अधिकारों और मूल्यों का सम्मान करने की याद दिलाता है. एक गणतांत्रिक देश के लिए उसका संविधान बहुत मायने रखता है. उसका संविधान ही उसे यह सभी अधिकार और कानून मुहैया करवाता है जिसकी बदौलत देश अपनी गणतांत्रिक व्यवस्था को चलाते हैं.


भारत का संविधान

भारत का संविधान एक बेहद विस्तृत और जिंदा संविधान है. इसके जिंदा होने का तात्पर्य है कि यह मात्र एक किताब नहीं है जिसमें एक बार नियम बना दिए गए तो वह बदले नहीं जा सकते बल्कि संविधान में संशोधनों का भी प्रावधान है जो इसे कभी मरने नहीं देता.


republic day parade 1डा. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में बनाया गया भारतीय संविधान 395 अनुच्‍छेदों और 8 अनुसूचियों के साथ दुनिया में सबसे बड़ा लिखित संविधान था जो और भी विस्तृत हो चुका है. 26 जनवरी, 1950 को संविधान के लागू होने के साथ सबसे पहले डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने गवर्नमेंट हाउस के दरबार हाल में भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ ली और इसके बाद राष्‍ट्रपति का काफिला 5 मील की दूरी पर स्थित इर्विन स्‍टेडियम पहुंचा जहां उन्‍होंने राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया. तब से यह दिन भारत के लिए विशेष महत्व रखता है. तब से ही इस दिन को राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया जाता है. किसी भी देश के नागरिक के लिए उसका संविधान उसे जीने और समाज में रहने की आजादी देता है. इस तरह गणतंत्र दिवस और संविधान की उपलब्धियां काफी अधिक हैं.


Read: संप्रभु राष्ट्र का उद्घोषक – गणतंत्र दिवस


इतिहास की नजर में 26 जनवरी

26 जनवरी आजादी से पहले भी देश के लिए एक अहम दिन था. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1930 के लाहौर अधिवेशन में पहली बार तिरंगे झंडे को फहराया गया था परंतु साथ-साथ एक और महत्वपूर्ण फैसला इस अधिवेशन के दौरान लिया गया. इस दिन सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया था कि प्रतिवर्ष 26 जनवरी का दिन “पूर्ण स्वराज दिवस” के रूप में मनाया जाएगा. इस दिन सभी स्वतंत्रता सेनानी पूर्ण स्वराज का प्रचार करेंगे. इस तरह 26 जनवरी अघोषित रूप से भारत का स्वतंत्रता दिवस बन गया था.


गणतंत्र दिवस की झांकी

आज गणतंत्र दिवस ना सिर्फ हमारे गणतांत्रिक होने की पहचान है अपितु गणतंत्र दिवस भारत के लिए शक्ति प्रदर्शन का भी अखाड़ा है. अधिकांश आम जनता के लिए गणतंत्र दिवस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी परेड होती है. इस दिन इंडिया गेट पर रंगा-रंगा कार्यक्रमों के बीच सेना की अधिकतर टुकड़ियां राष्ट्रपति को सलामी देते हुए निकलती हैं. विजय चौक से लेकर लाल किले तक मानो संपूर्ण भारत अपने वैभव, सामर्थ्य और क्षमता का प्रदर्शन करता है. यह प्रदर्शन उस भारत का प्रतीक है जिसने अंग्रेजों से आजादी प्राप्त की, उस देश की क्षमता का एक नमूना है जिसने पाकिस्तान को कई हमलों में परास्त किया. यह झांकी उस प्रगतिशील देश की है जिससे दुनिया का सबसे विकसित देश अमेरिका भी संबंध बनाने के लिए तत्पर रहता है. यह झांकी असल मायनों में भारत का प्रतिनिधित्व करती है. हर भारतीय को इस झांकी पर गर्व होता है.


उम्मीद करते हैं आने सालों में भी हम इसी तरह अपने लोकतंत्र का यह महापर्व इसी धूमधाम से मनाते रहेंगे.


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1 प्रतिक्रिया

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Gracelynn के द्वारा
June 11, 2016

Thanks for inucrdtoing a little rationality into this debate.


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