blogid : 3738 postid : 3355

Mahakumbh 2013: आस्था के महामेले में स्वागत है आपका

Posted On: 14 Jan, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अगर भारत को आस्था और धर्म का महानगर कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा. यहां आपको हर कदम के साथ आस्था के नए रूप देखने को मिलते हैं. देश के हर क्षेत्र में आपको आस्था का एक नया रूप देखने को मिलता है लेकिन इन सभी रूपों का अंत एक ही जगह होता है और वह है ईश्वर. भारत की इसी आस्था का महामेला “महाकुंभ” में देखने को मिलता है. 12 सालों में एक बार आने वाला कुंभ मेला यूं तो बेहद अहम होता है लेकिन इसकी अहमियत तब और भी बढ़ है जब 12 कुंभ मेलों के बाद आता है “महाकुंभ” मेला.

Read: Love Chutkule in Hindi


Mahakumbh Mela: महाकुंभ मेला

इस साल यानि 2013 में प्रयाग इलाहाबाद में गंगा के किनारे पूरे 144 वर्ष के बाद महाकुंभ मेले का आयोजन हो रहा है. कुंभ का मेला प्रत्येक 12 वर्ष में आता है. इस तरह प्रत्येक 12 कुंभ पूरा होने के उपरांत एक महाकुंभ का आयोजन होता है जो 144 वर्ष के बाद आता है और वो प्रयाग में ही संपन्न होता है.

Read: Makar Sankranti 2013


Mahakumbh Mela 2013 :इलाहाबाद ही क्यूं लगता है महाकुंभ मेला

कुंभ मेले को अमृत स्नान और अमृतपान की बेला माना जाता है. मान्यता है कुंभ मेले के दौरान ही गंगा की पावन धारा में अमृत का सतत प्रवाह होता है. इसी समय कुंभ स्नान का संयोग बनता है. कुंभ पर्व भारतीय जनमानस की पर्व चेतना की विराटता का द्योतक है. इलाहाबाद भारत का पवित्र और लोकप्रिय तीर्थस्थल है. गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का यहां संगम होता है, इसलिए हिन्दुओं के लिए इस शहर का विशेष महत्व है. मान्यता है कि कुंभ के आठ पवित्र स्थान देवलोक में हैं तथा चार स्थान पृथ्वी पर हैं.

Read: Dayananad Saraswati


हिंदुओं के सभी तीर्थ नदियों पर बसे हैं. गंगा नदी हिंदुओं के लिए देवी और माता समान है. इसीलिए हिंदुओं के लिए गंगा स्नान का बहुत महत्व है. गंगा जीवन और मृत्यु दोनों से जुडी़ हुई है इसके बिना हिंदू संस्कार अधूरे हैं. गंगाजल अमृत समान है. इलाहाबाद कुंभ में गंगा स्नान, पूजन का अलग ही महत्व है.


महाकुंभ मेले की परंपरा

आज से सौ साल पहले लोग जान की बाजी लगाकर कुंभ में शामिल होने के लिए पहुंचते थे. प्रयाग आने वाले तीर्थ यात्रियों को लुटेरों से भी मोर्चा लेना पड़ता था. सार्वजनिक यातायात की सुविधाएं न होने के कारण कुंभ में आने के लिए लोग पैदल या बैलगाड़ी से संगम पहुंचते थे. साधारण ग्रामीण यात्रियों को चोर-डाकुओं से भी खतरा होता था. इन खतरों का अंदाजा ब्रिटिश अधिकारियों के आदेशों से लगाया जा सकता है. तीर्थयात्रियों को रात में लुटने का डर न सताए इसके लिए प्रयाग आने वाले रास्तों पर विशेष सराय बनाए जाते थे. इन सरायों में सुरक्षा के बंदोबस्त किए जाते थे. इन सबकी तैयारी साल भर पहले से शुरू हो जाती थी.


अब कोई नहीं भटकेगा कुंभ के मेले में

हिन्दी फिल्मों में अकसर एक सीन होता था जिसमें बचपन में दो भाई कुंभ के मेले में खो जाते थे. यह दृश्य कोई मजाक या महज दिमागी सोच का नतीजा नहीं बल्कि एक सच होता था. कुंभ की बेहद भीड़ में अकसर लोग गुम या अपने परिजनों से बिछुड़ जाते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा क्यूंकि तकनीक के इस युग ने आध्यात्म के इस मेले की निगरानी करने का जिम्मा अपने हाथों में ले लिया है. इस बार कुंभ मेले में भटकने वाले लोगों को प्रशासन स्क्रीन पर दिखाएगा. महाकुंभ मेले में इस बार रास्ता भटकने वाले अपनों तक आसानी से पहुंच सकेंगे. मेला क्षेत्र में एलईडी स्क्रीन पर ऐसे लोगों को दिखाया जाएगा.

Also Read:

Maha Kumbh 2013: आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा

Makar Sankranti 2013

Horo of the Day



Tag: kumbh2013, kumbha mela 2013, mahakumbh, kumbh mela photos, 2013 kumbh mela, maha kumbh mela, kumbh mela 2013, allahabad kumbh,



Tags:                         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

257 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran