blogid : 3738 postid : 3348

NATIONAL YOUTH DAY 2013 :मत ललकारिए इस ताकत को

Posted On: 12 Jan, 2013 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

यह समय युवाओं का है. आज की तकनीक भरे समय में अगर कोई देश प्रगति की राह पर तेजी से चल सकता है तो वही जिस देश के युवाओं के कंधे इतने बलवान हों कि वह किसी भी कठिनाई पर ना झुकें ना थकें. युवाओं के कंधों पर ना सिर्फ राष्ट्र की छवि होती है बल्कि विश्व समाज को आगे ले जाने का भी दबाव होता है.


National Youth Day of India 2013

युवा वर्ग को हर देश के लिए बेहद अहम इसलिए माना जाता है क्यूंकि युवाओं का जोश किसी भी देश की उप्तादक क्षमता को बढ़ाने के लिए अहम होता है और जितना अधिक उप्तादन होगा उतना अधिक देश प्रगति करेगा. यहां उत्पादन से तात्पर्य कार्यक्षमता से है फिर वह चाहे वह कार्यक्षमता किसी कारखाने में लगे या खेल के मैदान में.


NATIONAL YOUTH DAY 2013: राष्ट्रीय युवा दिवस

देश में युवाओं की इसी क्षमता को पहचानते हुए वर्ष 1985 से हर वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. साल 1985 में संयुक्त राष्ट्र ने भी अन्तरराष्ट्रीय युवा वर्ष मनाया था और इसी को संज्ञान में लेते हुए भारतीय सरकार ने भी हर साल राष्ट्रीय युवा दिवस मनाने का निर्णय लिया.


सिर्फ स्वामी विवेकानन्द ही क्यूं

भारत में कई ऐसे महापुरुष हुए जिन्होंने युवाओं के लिए कई कार्य किए और जो युवाओं के लिए एक अहम आदर्श हो सकते थे लेकिन भारतीय सरकार ने सिर्फ स्वामी विवेकानन्द जी को चुना इसके पीछे एक अहम कारण था. दरअसल एक बड़ा वर्ग मानता है कि स्वामी विवेकानन्द आधुनिक मानव के आदर्श प्रतिनिधि हैं. विशेषकर भारतीय युवकों के लिए स्वामी विवेकानन्द से बढ़कर दूसरा कोई नेता नहीं हो सकता. विवेकानंद जी ने हमेशा युवाओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया और युवाओं को आगे आने के लिए आह्वान किया.

स्वामी विवेकानंद के कथन

स्वामी विवेकानंद जी का कहना था कि युवा किसी भी समाज और राष्ट्र के कर्णधार होते हैं और वहीं उसके भावी निर्माता हैं. उनका कहना था कि युवा शक्ति वह स्वरूप है जो नवसृजन के लिए हर जगह उभरनी चाहिए. भारत की युवा पीढ़ी को स्वामी विवेकानन्द से निःसृत होने वाले ज्ञान, प्रेरणा एवं तेज के स्रोत से लाभ उठाना चाहिए.


भारत और युवा

एक अनुमान के अनुसार भारत की कुल आबादी में युवाओं की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत की है जो इसके लिए एक वरदान है. लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती इस युवा शक्ति के संपूर्ण और सुनियोजित दोहन की है. युवा का उलटा होता है वायु. युवा भी वायु की तरह ही जहां राह मिली वहीं के हो जाते हैं ऐसे में इस युवा शक्ति का सकारात्मक इस्तेमाल जरूरी है वरना इसका नकारात्मक इस्तेमाल विध्वंसात्मक बन जाता है.


आज भारत की युवा पीढ़ी बहुत अधिक परिश्रम कर रही है. पढ़ाई, कॅरियर और जीवन में आगे आने के लिए उसे अन्य देशों के युवाओं से अधिक स्ट्रगल करना पड़ता है. इसके पीछे कई वजहें हैं जिनमें अहम है शिक्षा व्यवस्था.


भारतीय शिक्षा व्यवस्था

भारतीय शिक्षा व्यवस्था को सभी जानते हैं कि यहां मात्र शिक्षा के बल पर रोजगार मिलना कितना मुश्किल है. सरकार बच्चों को किताबी ज्ञान देने पर तो जोर देती है लेकिन व्यवाहारिक ज्ञान देने में हमेशा पीछे ही रहती है. सरकार को चाहिए कि युवाओं को ऐसी शिक्षा प्रदान की जाए जिससे वह आगे जाकर सुलभ रोजगार प्राप्त कर सकें.


युवाओं को भटकाने वाले कारक

इसके अलावा देश में युवाओं को गलत दिशा में ला जाने वाले कई कारक हैं जैसे नशाखोरी, अर्थहीन फिल्में आदि. इन सब के अलावा इस देश के युवाओं की प्रगति के सबसे बड़े अवरोधक राजनीतिज्ञ ही लगते हैं.


मत ललकारिए इस ताकत को

याद कीजिए वह समय जब भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मताधिकार की सीमा 18 वर्ष करते हुए “इक्कीसवीं सदी युवाओं की” का आह्वान किया था. तब युवाओं में कितना जोश था लेकिन आज के राजनीतिज्ञ इस मंत्र को भूलकर सिर्फ युवाओं को वोट-बैंक मानने लगे हैं. वह भूल गए हैं कि अगर युवाओं ने अपनी असली ताकत को समझ लिया तो हालातों को 1974 के जेपी आंदोलन की तरह होते देर नही लगेगी. और इस बात को यूपीए सरकार भलीभांति समझती होगी जिसने साल 2011 और 2012 में युवाओं को ताकत को रामलीला मैदान और इंडिया गेट पर देखा है.


हाल ही हुए दिल्ली गैंगरेप के बाद जिस तरह से भारतीय युवाओं ने एकता का परिचय दिया वह काबिलेतारीफ था. हां, इस आंदोलन को नेतृत्व की कमी और आक्रोश का एक गलत रूप कहा जा सकता है लेकिन इसने एक बार फिर साबित कर दिया कि युवा चाहें तो कुछ भी कर सकते हैं.


आज का युवा संक्रमण काल से गुजर रहा है. वह अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता है और अपने बलबूते आगे तो बढ़ना चाहता है, पर परिस्थितियां और समाज उसको सहयोग नहीं कर पाते. आप चाहे राजनीति के क्षेत्र में देख लें या फिल्मों में हर जगह आपको स्ट्रगल करते युवा दिखेंगे जो कुछ समय बाद या तो हार मान लेते हैं या फिर गलत रास्तों को अपनाने पर मजबूर हो जाते हैं.


अब समय आ गया है जब युवाओं की तरफ सरकार को पूरी तरह से ध्यान देना होगा और देश के भावी निर्माताओं को आगे आने का संपूर्ण मौका देना होगा.




Tags:             

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

289 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

arun kumar singh के द्वारा
January 25, 2014

जीवनमें में प्लस और माइनस दोनों का बेहतरीन संगम होना चाहिए . तभी एक युवा अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है …और हमेशा अपने से पूछे कि हु ऍम आई ? जिस दिन अपने से प्रेम करने लगोगे तुम्हारे लिए कुछ भी कठिन नहीं होगा .

    Adhia के द्वारा
    February 14, 2016

    That takes us up to the next level. Great postgni.

abhijeet के द्वारा
January 17, 2013

भारतीय युवाओं को गलत ठहराने वाले तत्वों को इंडिया गेट की उस भीड़ को जरिऊर देखना चाहिए जो दिल्ली गैंगरेप के बाद सड़कों पर थी और अपने हक की आवाज के लिए बेखौफ सरकार के सामने थी

रविरंजन शाह के द्वारा
January 17, 2013

युवाओं की ताकत के विषय में एक बेहतरीन ब्लॉग है यह


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran