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Indira Gandhi's Death Story: राज 31 अक्टूबर 1984 का

Posted On: 31 Oct, 2012 Others में

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भारतीय राजनीति एक ऐसी कहानी है जिसका हर पहलू आपके अंदर के रोमांच को चरम तक पहुंचा सकता है. भारत को आजादी दिलाने के स्वर्णिम युग से लेकर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी जैसे महान नेताओं की मौत तक की काली रातें इस राजनीति की कहानी में समाहित हैं. भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की मौत की कहानी भी अकसर राजनैतिक गलियारों में एक चर्चा की कहानी रही है.



indira gandhi 1Death of Indira Gandhi: इंदिरा गांधी की मौत और भारत


31 अक्टूबर, 1984 की शाम इस देश के लिए बेहद निराशा और अशांति का साया साथ लेकर आई. दोपहर को देश की सबसे मजबूत इच्छा शक्ति और दृढ़संकल्प दिखाने वाली लौह महिला इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की की निर्मम तरीके से उनके ही अंगरक्षकों ने हत्या कर दी तो वहीं शाम होते-होते देश की राजधानी के कई सिख परिवारों के दीपक बुझ गए. इंदिरा गांधी की मौत ने जहां देश में नेताओं की कमजोर सुरक्षा को दुनिया के सामने जाहिर किया वहीं इसके बाद हुए सिख दंगों ने साबित कर दिया कि भारत में धर्म, जात-पात से ऊपर है भावना. भावना के आवेश में आकर भारतीय लोग चाहे तो कोई भी दीवार तोड़ सकते हैं. इस जज्बे को सलाम करें या इसकी निंदा करें यह एक अलग सवाल है.



Mystery of Indira Gandhi- इंदिरा गांधी की मौत: राज 31 अक्टूबर 1984 का

माना जाता है कि इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) की मौत की एकमात्र वजह था खालिस्तान और ऑपरेशन ब्लू स्टार. ना ऑपरेशन ब्लू स्टार होता ना इंदिरा जी की हत्या की जाती. लेकिन अपने फैसलों से कभी पीछे ना हटने वाली इंदिरा गांधी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए पंजाब में पहले ऑपरेशन ब्लू स्टार की मंजूरी दी और फिर कई बार कहने पर भी अपने रक्षकों से सिखों को नहीं हटाया. जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया और इसका परिणाम चंद महीनों में ही इंदिरा गांधी को अक्टूबर 1984 में अपनी जान गंवा कर चुकानी पड़ी.


Read: आरुषि हत्याकांड की पूरी कहानी


Assassination of Indira Gandhi: इंदिरा गांधी की मौत की कहानी

इतिहास इस घटना को भारतीय राजनीति के सबसे काले अध्याय के रूप में याद करता है. इंदिरा गांधी के करीबी और कई लोगों का मानना है कि इंदिरा गांधी मौत से एक दिन पहले उड़ीसा में जबरदस्त चुनाव प्रचार के बाद 30 अक्टूबर की शाम दिल्ली पहुंची थीं. यूं तो अमूमन किसी अन्य शहर से लौटने के अगले दिन इंदिरा जी अपने घर सफदरजंग रोड पर जनता दरबार में जनता के बीच नहीं जाती थीं लेकिन उस दिन कुछ विशेष लोग आने वाले थे इसलिए इंदिरा जी ने 31 अक्टूबर को जनता दरबार में जाने का फैसला किया.


सुबह नौ बजे इंदिरा जी तैयार होकर अपने घर से ऑफिस की तरफ निकल रही थीं तब उनकी सुरक्षा में तैनात एक सैनिक बेअंत सिंह ने अचानक अपनी दाईं तरह से सरकारी रिवॉल्वर निकालकर इंदिरा गांधी जी पर पहला वार किया. इसके बाद उसने दो और गोलियां दागी जो इंदिरा गांधी के पेट में लगी. इसके पहले कि किसी को कुछ समझ आता संतरी बूथ पर तैनात एक और शख्स की बंदूक इंदिरा जी की तरफ मुड़ गई. यह शख्स था सतवंत सिंह जिसने अपनी स्टेनगन से इंदिरा गांधी पर अंधाधुंध गोलिया दागनी शुरू कर दी. देखते ही देखते 30 गोलियां इंदिरा गांधी के शरीर में जा चुकी थीं. हालांकि इसके बाद जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाकर्मियों ने बेअंत सिंह को वहीं ढेर कर दिया. पर सतवंत सिंह जिंदा बच गया था.


तू संगीत का सागर है, तेरी एक गीत के प्यासे हम


इसके बाद शुरू हुई इंदिरा गांधी की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद. दिल्ली के एम्स में इंदिरा गांधी को जख्मी हालत में करीब साढ़े नौ बजे ले जाया गया. इंदिरा गांधी जी का ब्लड ग्रुप 0-नेगेटिव था और भारत में सौ लोगों में से सिर्फ एक का 0-नेगेटिव ब्लड ग्रुप होता है. ऐसे में इंदिरा जी को बचाने के संघर्ष में डॉक्टरों ने उन्हें कई बोतल खून चढ़ाया लेकिन सब व्यर्थ साबित हुआ. आखिरकार दोपहर 2 बजकर 23 मिनट पर आधिकारिक तौर ये ऐलान कर दिया गया कि इंदिरा गांधी की मौत हो चुकी है.


जो इंदिरा गांधी अपनी लौह इच्छाशक्ति से कभी नहीं हिलीं, जिन्होंने देश को परमाणु हथियारों से सशक्त करने का सपना दिखाया उनकी एक छोटी-सी भूल ने उनकी जिंदगी ले ली. होनी को शायद यही मंजूर था.


इंदिरा गांधी की मौत से शुरू हुआ खेल राजीव जी की मौत तक चला

जिस समय इंदिरा गांधी की मौत हुई उसी समय राजीव गांधी को यह आभास हो गया था कि शायद आने वाले समय में उनकी भी हत्या कर दी जाए और हुआ भी वही. राजीव गांधी को भी चरमपंथियों ने बम से उड़ा कर मार डाला.


जिस समय इंदिरा गांधी जी की मौत हुई उस समय सभी की राय थी कि राजीव गांधी को ही देश की सत्ता सौंपी जाए लेकिन सोनिया गांधी अड़ी हुई थीं कि राजीव ये बात कतई मंजूर ना करें. आखिरकार राजीव ने सोनिया को कहा कि मैं प्रधानमंत्री बनूं या ना बनूं दोनों ही सूरत में मार दिया जाऊंगा.


Death of Rajiv Ratan Gandhi


इंदिरा गांधी एक रोल मॉडल

इंदिरा गांधी अपने सख्त फैसले के लिए भी चर्चित रहीं. वह चाहे वर्ष 1975 में देश में इमरजेंसी लगाने का फैसला हो या पाकिस्तान से जंग का. अंतत: जीत इंदिरा गांधी की ही हुई. यह कहना गलत न होगा कि देश की लाखों लड़कियों के लिए वह रोल मॉडल थीं. भारत के सुरक्षा हितों की रक्षा करने के संदर्भ में इंदिरा गांधी देश के प्रधानमंत्रियों में पहले पायदान पर हैं.



कल की इंदिरा गांधी और आज की सोनिया गांधी

इंदिरा गांधी का सपना था “गरीबी मिटाओ” लेकिन अब कांग्रेस का नारा है “गरीब हटाओ”. दोनों की कार्यशैली और विचार धारा में जमीन आसमान का अंतर है. एक तरफ इंदिरा गांधी की सोच थी जो अमेरिका जैसे ताकतवर देश के आगे भी नहीं झुकती थीं. दूसरी तरफ आज की सरकार सबके सामने झुकती है देश की जनता को छोड़कर. इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व पर लोगों की अलग-अलग राय जरूर होगी पर एक विषय में सबकी राय एक ही है कि उनका हौसला चट्टान की तरह मजबूत था.


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एक फैसले ने ली जिंदगी


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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ramgiopaltripathi के द्वारा
January 30, 2014

indra gandhi jaise p.m. agar aaj hoti to apna desh ek bulndiyo ko chu raha hota

firozalam के द्वारा
January 3, 2014

इंद्रा गांधी जैशा न tha न होगा उनके जैशा नेता हो जाये तो देश sudhar jaye

firozalam के द्वारा
January 3, 2014

इंद्रा गांधी जैशा न tha न होगा उनके जैशा नेता हो जाये तो देश सुआधार जाये

dev के द्वारा
November 23, 2013

इंदिरा गांधी जैसा लौह पुरुष न हुआ न hoga 

Gurpreet Singh के द्वारा
May 29, 2013

Respected sir ma aap se 1 Question puchna cheta Hu ki aap ne Indra gandhi ka barre me itna kuch likha ki unhone Operation blue sta kiya ye kiya wo kiya, but kya aap muhje ye batayge ki kya kisi ka Gurudware/ Mandir par attack kar ke usse todna Sahi ha Kya kisi ka bare me Rumor (Aff Vahe) uddana Sahi ha. Kya kisi ka Gurudware /mandir ya koi b dharmik place me Fouj(Army) with shoes andar jana Sahi ha. Sir marre ko lagta ha aap marre se jayda is blue star operation ka barre me jantte ha Ki kis tarah ye Operation Blue star Brara ka through handle kiya gaya jo ki us na Apni Book me b Kabolla ha Us ka baad b ye sab. Aap sabhi log jantte the Ki Sant Jairnail Singh Khalsa Bhindrawala Golden temple me nahi balki Akal takat me tha ur un dono ka Beech di durri b bhaut the Aur ye dono ik dusrre se Opposite Side me ha us ka baad b Glden temple Par attack Jarrori tha kya. jabki atack ka Time koi b Sikh Siphi nahi tha Golden temple Me.

    dinesh के द्वारा
    September 3, 2013

    gurpreet ji kya aap mujhe isski puri sotry mail kar sakte h ?


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