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क्या आज फिर भगत सिंह की जरूरत है?

Posted On: 27 Sep, 2012 Others में

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भारत ने हमेशा अहिंसा और शांति के रास्ते को ही अपनाया है. भारत में बुद्ध से लेकर महात्मा गांधी ने जीवन में अहिंसा और शांति के रास्ते को सही साबित किया है लेकिन यहां समय-समय पर जनता ने सरकार और प्रशासन की खिलाफत के लिए हिंसा का भी दामन थामा है. आज जिसे हम हिंसा का नाम देते हैं वह आजादी से पहले क्रांति कहलाती थी और इस क्रांति के एक महान क्रांतिकारी थे भगत सिंह.

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Bhagat Singभगत सिंह ने देशभक्ति की जो परिभाषा लिखी उस पर चलना बेहद मुश्किल है. उनके जीवन की एक अलग ही थ्योरी थी जिस पर वह खुद ही चलते थे. उनका मानना था कि प्रशासन के बंद हो चुके कानों में आवाज पहुंचाने के लिए धमाके की जरूरत होती है. यह धमाका उन्होंने 8 अप्रैल, 1929 के दिन दिल्ली की असेंबली में “पब्लिक सेफ्टी बिल” और “ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल” के खिलाफ किया था. इस बिल को कानून बनाने के पीछे अंग्रेजी शासकों का उद्देश्य था कि जनता में क्रांति का जो बीज पनप रहा है उसे अंकुरित होने से पहले ही समाप्त कर दिया जाए.

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यह वह समय था जब देश में क्रांति अपने उफान पर था और हर तरफ मानों देशभक्ति की लहर फैली हो. अंग्रेज शासकों ने देश में ऐसा माहौल पैदा कर दिया था जिसकी सभी आलोचना कर रहे थे. कुछ ऐसा ही माहौल आज भी बनता दिख रहा है. जानकार मानते हैं कि जो हालात उस समय अंग्रेजों ने पैदा किए थे वही आज कांग्रेस की सरकार में दिखने को मिल रहे हैं.


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राजनीति के सलाहकार और आजादी से पहले के हालातों पर गहरी नजर रखने वाले मानते हैं कि जिस तरह से अंग्रेजों द्वारा जनता के लिए दमनकारी कदम उठाने की वजह से विद्रोह की स्थिति पैदा हुई थी आज ठीक वैसा ही कांग्रेस सरकार महंगाई और घोटालों से कर रही है. इस स्थिति में लोगों का मानना है कि देश को फिर एक भगतसिंह की जरूरत है.


हालांकि यहां कुछ लोग यह भी मानते हैं कि भगतसिंह ने जो कदम अंग्रेजों के खिलाफ उठाए थे आज उनकी कोई जरूरत नहीं है. जरूरत है तो बस अपने मताधिकार को अपनाने और लोकतंत्र में गांधीजी द्वारा बताए गए अहिंसा के रास्ते पर चलने का.


उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आज एक सवाल खड़ा हुआ है कि:

क्या इस देश को फिर एक भगतसिंह की जरूरत है?


इस प्रश्न पर आप अपनी राय कमेंट द्वारा या अपना स्वतंत्र ब्लॉग लिखकर भी दे सकते हैं. आपकी राय इस देश की जनता की आवाज की तरह है इसलिए इसका उपयोग करें और बताएं कि आज की परिस्थिति में भगतसिंह की कितनी प्रासंगिकता है?

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Tag: Bhagat Singh, Bhagat Singh in Modern Era, Bhagat Singh Profile, Bhagat Singh in Hindi, आज, भगतसिंह और आजादी की बाद, आज भगतसिंह की जरूरत



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Peggy के द्वारा
June 11, 2016

Yo&2;8u17#ve really entered the exotic jungle when the plants are making faces back at you! Maine has lots of mysterious flora though, along with sundews and pitcher plants there are the ghostly Indian Pipes are another favorite of mine! They are also known as Ghost Plant or Corpse Plant – There were just too many ghoulish plants to cover before Halloween, which is a busy time of year on our street – maybe I’ll make it an annual thing.

balwant के द्वारा
September 27, 2012

Yes, today Bhagat Singh is the need of our hour and without such person, India has no future as the political system has reached to gutter level and nobody is interested in the real politics of the people,for the people, by the people. Mr. Anna can not do a single improvement as corruption is on it;s peak and people like Anna are thinking the time of Gandhi or 50 years back when there was some ownership on the political people. Today, no political party is willing to improve India and only want to grab the seat and eat money by any mean. If some Bhagat Singhs are born today, the present political system including the political people will definitely kicked out. Arvind Kejriwal can do better but there is no more support on him. Our politics need a fresh and young generation and completely keeping the present people out of political reach.


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