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World Blood Donor Day: एक करे रक्तदान तीन को मिले जीवनदान

Posted On: 14 Jun, 2012 Others में

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रक्तदान है महादान, रक्तदान है पूजा समान


रक्त जिंदगी का आधार है. हवा ना मिले तो इंसान मर जरूर जाता है लेकिन अगर रक्त का प्रवाह और बनने की प्रणाली काम करना बंद कर दे तो इंसान की मौत और भी दर्दनाक होती है. जिंदगी का यह अनमोल रत्न हर किसी के अंदर भगवान ने प्रवाहित किया होता है लेकिन कभी एक्सीडेंट तो कभी किसी बीमारी की चपेट में आकर अक्सर लोग खून की कमी की वजह से दम तोड़ देते हैं. कई बार जिंदगी के दिए सिर्फ इसलिए बुझ जाते हैं क्यूंकि उन्हें कुछेक लीटर खून नहीं मिल पाता. यह खून सस्ता भी है महंगा भी. शरीर के अंदर स्वत: ही बनता है लेकिन अगर किसी कारणवश इसकी कमी हो जाती है तो इसका मोल अनमोल हो जाता है.


रक्त का कोई मोल नहीं होता. एक स्वस्थ इंसान के लिए यह घर की खेती होती है तो जिसे जरूरत होती है वह इसे खरीदने के लिए मुंहमांगी रकम देने को तैयार रहता है. यूं तो रक्तदान कोई भी स्वस्थ इंसान कर सकता है लेकिन कुछ ग्रंथियों की वजह से लोग इस महादान से कतराते हैं. इन ग्रंथियों में रक्तदान से शरीर कमज़ोर हो जाता है और उस रक्त (Blood) की भरपाई  होने में काफी समय लग जाता है जैसी बात शामिल है. इतना ही नहीं यह गलतफहमी भी व्याप्त है कि नियमित खून देने से लोगों की रोगप्रतिकारक क्षमता कम हो जाने के कारण  बीमारियां जल्दी जकड़ लेती हैं. ऐसी मानसिकता के चलते रक्तदान लोगों के लिए हौव्वा बन गया है जिसका नाम सुनकर ही लोग सिहर उठते हैं. ऐसी ही भ्रांतियों को दूर करने के लिए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने इस आयोजन की नींव रखी, ताकि लोग रक्तदान (Blood Donation)  के महत्व को समझ जरूरतमंदों की सहायता करें. थैलीसीमिया (Thalassemia)   एक ऐसी बीमारी है जिसके चलते एक निश्चित अवधि के बाद खून बदलवाने की आवश्यकता पड़ती है, यह अवधि मरीज की आयु पर आधारित होती है. जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है, यह अवधि कम होने लगती है. इसी बात से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि थैलीसीमिया से ग्रसित रोगियों को हमारे और आपके द्वारा दान किए गए रक्त की कितनी जरूरत है.


स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने वर्ष 1997 से 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस (World Blood Donation Day)  के रूप में मनाने की घोषणा की. इस मुहिम के पीछे मकसद विश्वभर में रक्तदान की अहमियत को समझाना था.


लेकिन आज भी विश्व के लगभग हर जगह रक्त की कमी है. हर अस्पताल में कई लोग रक्त की कमी की वजह से दम तोड़ देते हैं. जागरूकता का ना होना इसकी सबसे बड़ी वजह है. भारत में आज भी एक भी केंद्रीयकृत रक्त बैंक (Centralised Blood Bank) की स्थापना नहीं हो पाई है, जिसके माध्यम से पूरे देश में कहीं पर भी खून की जरूरत को पूरा किया जा सके. टेक्नोलॉजी में हुए विकास के बाद निजी तौर पर वेबसाइट्स (Websites)  के माध्यम से ब्लड बैंक व स्वैच्छिक रक्तदाताओं की सूची को बनाने का कार्य आरंभ हुआ. भले ही इससे थोड़ी बहुत सफलता जरूर मिली हो लेकिन संतोषजनक हालात अभी भी नहीं बन पाए हैं.


तो आइए आज विश्व रक्तदान दिवस के मौके पर जितना हो सके समाज में यह जागरूकता फैलाएं कि रक्तदान से कमजोरी नहीं आती बल्कि किसी की जिंदगी बचाई जा सकती है और एक नहीं तीन-तीन जिंदगी.


कौन कर सकता है रक्तदान

रक्तदान के सम्बन्ध में चिकित्सा विज्ञान कहता है कि वह व्यक्ति जिसकी उम्र 16 से 60 साल के बीच और वजन 45 किलोग्राम से अधिक हो, जिसे एचआईवी(HIV), हैपिटाइटिस “बी” या “सी” (Hepatitis B,C) जैसी बीमारी न हुई हो, वह रक्तदान कर सकता है. एक बार में जो 350 मिलीग्राम रक्त दिया जाता है, उसकी पूर्ति शरीर में कुछ ही दिनों के अन्दर हो जाती है और गुणवत्ता की पूर्ति 21 दिनों के भीतर हो जाती है. दूसरे, जो व्यक्ति नियमित रक्तदान करते हैं उन्हें हृदय सम्बन्धी बीमारियां कम परेशान करती हैं.




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Vitthalrao B. Khyade के द्वारा
June 14, 2014

Science Association, Shardabai Pawar Mahila Mahavidyalaya, Shardanagar, Malegaon (Baramati) Dist. Pune – 413115. ——————————————————————————————————————–“Dr. APIS” SCIENCE LEAFLET ——————————————————————————————————————–Objective: To Establish the Repository of Scientific Information For The Society. ——————————————————————————————————————– Every year, on 14 June, countries around the world celebrate World Blood Donor Day (WBDD). The event, established in 2004, serves to raise awareness of the need for safe blood and blood products and to thank blood donors for their voluntary life-saving gifts of blood. World Blood Donor Day is one of eight official global public health campaigns marked by the World Health Organization (WHO), along with World Health Day, World Tuberculosis Day, World Immunization Week, World Malaria Day, World No Tobacco Day, World Hepatitis Day, and World AIDS Day.[1] Transfusion of blood and blood products helps save millions of lives every year. It can help patients suffering from life-threatening conditions live longer and with higher quality of life, and supports complex medical and surgical procedures. It also has an essential, life-saving role in maternal and perinatal care. Access to safe and sufficient blood and blood products can help reduce rates of death and disability due to severe bleeding during delivery and after childbirth.[2] In many countries, there is not an adequate supply of safe blood, and blood services face the challenge of making sufficient blood available, while also ensuring its quality and safety. An adequate supply can only be assured through regular donations by voluntary unpaid blood donors. WHO’s goal is for all countries to obtain all their blood supplies from voluntary unpaid donors by 2020. In 2014, 60 countries have their national blood supplies based on 99-100% voluntary unpaid blood donations, with 73 countries still largely dependent on family donors and paid donors.[3] Themes of World Blood Donor Day campaigns 2014: Safe blood for saving mothers The focus of the WBDD 2014 campaign, marked on 14 June 2014, is “Safe blood for saving mothers”. The goal of the campaign is to increase awareness about why timely access to safe blood and blood products is essential for all countries as part of a comprehensive approach to prevent maternal deaths. The global host for the WBDD 2014 event is Sri Lanka. Through its national blood transfusion service, Sri Lanka has been promoting voluntary unpaid donation to increase access to safe and sufficient blood and blood products. 2013: Give the gift of life The focus for the WBDD 2013 campaign – the 10th anniversary of World Blood Donor Day – was blood donation as a gift that saves lives. WHO encourages all countries to highlight stories from people whose lives have been saved through blood donation, as a way of motivating regular blood donors to continue giving blood and people in good health who have never given blood, particularly young people, to begin doing so. The host country for World Blood Donor Day 2013 was France. Through its national blood service, the Etablissement Français du Sang (EFS), France has been promoting voluntary non remunerated blood donation since the 1950s. References: 1. World Health Organization, WHO campaigns. 2. World Health Organization, Safe blood for saving mothers. 3. World Health Organization, Blood safety and availability. WHO Fact sheet N° 279, Updated June 2013. Accessed 8 April 2014. File: Dr.APIS.14.June@World.Blood.Donor.Day Compiled For : Science Association, Shardabai Pawar Mahila Mahavidyalaya, Shardanagar; Tal. Baramati; Dist. Pune – 413115 (India). With the Best Compliments From: Shardanagar (The Agro – academic Heritage of Grandsire Padmashri Dr. D. G. Alias Appasaheb Pawar).

Sanjeev के द्वारा
June 14, 2012

रक्तदान है महादान, रक्तदान है पूजा समान, बिलकुल सही कहा आप लोगों ने रक्तदान से एक आदमी तीन आदमियों की जान बचा सकता है


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