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बिहार की सियासत के सबसे बड़े खिलाड़ी – लालू प्रसाद यादव [जन्मदिन विशेषांक]

Posted On: 11 Jun, 2012 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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भारतीय राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाने वाले लालू प्रसाद बिहार की पहचान बन चुके हैं. यूपीए सरकार के कार्यकाल के अंतर्गत वर्ष 2004-2009 तक केन्द्रीय रेल मंत्री रहे लालू प्रसाद यादव राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष भी हैं.


laluलॉ ग्रेजुएट और बिहार के गोपालगंज में 1948 में एक गरीब परिवार में जन्मे लालू ने राजनीति की शुरुआत जयप्रकाश आन्दोलन से की, तब वे एक छात्र नेता थे. 1977 मे आपातकाल के बाद हुए लोकसभा चुनावों को जीतकर लालू यादव पहली बार लोकसभा पहुंचे, तब उनकी उम्र 29 साल थी. 1980 से 1989 तक वे दो बार विधानसभा के सदस्य रहे और विपक्ष के नेता पद पर भी रहे. 1990 में वे बिहार के मुख्यमंत्री बने. 1995 में भी वे भारी बहुमत के साथ विजयी हुए. 1997 में जब सीबीआई ने उनके खिलाफ चारा घोटाला में आरोप पत्र दाखिल किया तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से छोड़ना पड़ा. तब उन्होंने सत्ता पर काबिज रहने के लिए एक नया तरीका अपनाया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सत्ता सौंपकर ना सिर्फ वे राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष बने रहे बल्कि अपरोक्ष रूप से सत्ता की कमान भी उनके हाथ ही रही. चारा घोटाले में फंसे लालू यादव को एक लंबा समय जेल में भी बिताना पड़ा. वर्ष 2004 लोकसभा चुनावों में एनडीए की करारी हार के बाद लालू रेलमन्त्री बने. बिहार के सारन निर्वाचनक्षेत्र से जीतकर पंद्रहवी लोकसभा के लिए सांसद बने लालू प्रसाद यादव को बिहार की बदहाली का जिम्मेदार माना जाता है. लालू यादव पर अनेक घोटालों में लिप्त रहने जैसे आरोप लगते रहे हैं. जिनमें सबसे प्रमुख वर्ष 1997 का चारा घोटाला है. यह घोटाला लगभग 950 करोड़ का था. लालू यादव के शासन काल को जंगल राज कहने वाले भी बहुत लोग हैं.


वर्ष 2009 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में जनता ने बहुमत के साथ लालू यादव के विरोधी नीतीश कुमार एंड कंपनी को जिता कर अपने मंसूबे जाहिर कर दिए. इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल को केवल 4 सीटों पर विजय मिली. ऐसा करके जनता ने यह साफ कर दिया कि अब वह अपने क्षेत्र का विकास चाहती है. बिहार ने सबको दिखा दिया कि 21वीं सदी की राजनीति जातिवाद की नहीं विकास की राजनीति है. इसके साथ अगर हम दूरदृष्टि के साथ देखें तो भ्रष्टाचार और लचर शासन प्रणाली वाली केन्द्र सरकार के लिए एक इशारा हो सकता है कि जनता अधिक समय तक किसी को अपने ऊपर अत्याचार नहीं करने देती और हो सकता है कि अगले चुनावों में इस सरकार को भी मुंह की खानी पड़े.


विभिन्न कारणों से लालू हमेशा चर्चा में रहे हैं. जैसे कभी व्यंग्यात्मक शैली और हाजिर जवाबी के कारण तो कभी बिहार के सड़कों को हेमामालिनी के गाल की तरह चमका देने का वादा करने के कारण. विभिन्न घोटालों ने उन्हें चर्चित बनाया ही और सत्ता पर अधिकार बनाए रखने के लिए अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बनवाने के कारण तो उनकी प्रसिद्धि पूरे विश्व में हो गई. अपनी बात कहने का लालू का खास अन्दाज है और यही अन्दाज लालू को बाकी राजनेताओं से अलग करता है.




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