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विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day)

Posted On: 5 Jun, 2012 Others में

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World Environment Day

वृक्ष धरा का हैं श्रृंगार, इनसे करो सदा तुम प्यार


नई बिल्डिंग बनानी हो या फिर मेट्रो का पुल आज हर जगह विकास के कार्यों के लिए जिस चीज को सबसे ज्यादा बलि देनी पड़ रही है वह हैं पेड़. पेड़ जो हमारे जीवन तंत्र या यों कहें पर्यावरण के सबसे अहम कारक हैं वह लगातार खत्म होते जा रहे हैं. आलम यह है कि आज हमें घनी आबादी के बीच कुछेक पेड़ ही देखने को मिलते हैं और इसकी वजह से पृथ्वी का परिवर्तन चक्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. इसके साथ हमने अत्यधिक गाड़ियों का इस्तेमाल कर वायु को प्रदूषित किया है जिसने पर्यावरण को अत्यधिक हानि पहुंचाई है.


World Environment Day

हमारे इस पर्यावरण में हो रहा क्षरण आज दुनिया की सबसे बडी समस्याओं में से एक है. लेकिन यह कहना कि पर्यावरण को हानि बहुत पहले से पहुंच रही है गलत होगा. दरअसल पर्यावरण की यह हानि कुछेक सौ सालों पहले ही बड़े पैमाने पर शुरू  हुई. गाड़ियों का धुंआ, कारखानों की गंदगी, नालियों का गंदा पानी इन सब ने हमारी आधारभूत जीवन की जरूरत पर प्रभाव डाला. वायु, जल और धरातल के दूषित होने से संसार में कई बीमारियों ने जन्म लिया.

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ग्रीन हाउस इफेक्ट और कार्बन डाइऑक्साइड की परेशानी

औद्योगिक क्रांति के बाद से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में 40 फीसदी वृद्धि हुई है. इसका प्रमुख कारण है आधुनिक जीवन शैली. आज हम भारी मात्रा में जीवाश्म ईंधनों और लकड़ी इत्यादि को जलाकर कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं. जबकि कटते जंगल से कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कम हो गया है.


अन्य परेशानियां

पर्यावरण के नुकसान में केवल वायु का ही नुकसान नहीं हुआ है बल्कि प्रदूषण ने हमारे पीने योग्य पानी को भी दूषित किया है और मिट्टी को भी दूषित कर दिया है. नतीजन हमारे खाने की थाली और पीने के गिलास में दूषित वस्तुओं का आना लगातार कई सालों से जारी है और आगे तो हालत इससे भी गंभीर होने वाली है.


पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए ही संयुक्त राष्ट्रसंघ ने साल 1972 से हर साल 05 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया. इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाते हुए राजनीतिक चेतना जागृत करना और आम जनता को प्रेरित करना था. भारत में पर्यावरण संऱक्षण अधिनियम सर्वप्रथम 19 नवम्बर, 1986 को लागू हुआ था, जिसमें पर्यावरण की गुणवत्ता के मानक निर्धारित किए गये थे.


लेकिन किसी कानून को बना देने से लोगों में पर्वावरण के लिए कोई खास जागरुकता नहीं फैली है. आज भी लोग बड़ी मात्रा में लगातार प्राकृतिक संसाधनों का हनन करते हैं. पर्यावरण संरक्षण के लिए लोग डींगें तो हांकते हैं लेकिन कोई भी जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं करता. विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर कई लोग घर में गमला लगाकर या पौधे लगाकर अपना कर्तव्य पूरा मानकर खुशफहमी में जीने लगते हैं और बाकि दिन रेड लाइट पर घंटों गाड़ी खड़ी करके पेट्रोल बर्बाद कर देते हैं. यह पर्यावरण संरक्षण नहीं है.


लेकिन ऐसा भी नहीं है कि हम व्यक्तिगत स्तर पर कुछ नहीं कर सकते. अगर हर इंसान अपने जन्मदिन या किसी खास मौके पर पेड़ लगाए, दोस्तों को पेड़-पौधे गिफ्ट करे, पानी बर्बाद ना करने का प्रण करे, बिजली की बर्बादी को रोके तो हो सकता है कुछ बदले. आखिर किसी को तो शुरुआत करनी होगी. अगर एक परिवार का बड़ा सदस्य पर्यावरण संरक्षण की तरफ ध्यान दे तो उसके बच्चे भी पर्यावरण की तरफ बड़े उदार होंगे.




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Krunal D. Baraiya के द्वारा
August 5, 2014

સૌરાષ્ટ્ર વૃક્ષછેદન ધારા ૧૯૫૧ની જોગવાઇ મુજબ ખાનગી માલીકીની જમીન પરના વૃક્ષો, પંચાયતની ગૌચર જમીન અને બીજી સામુહિક માલીકીની જમીનો તથા પંચાયતને આપેલ જમીનો પર વૃક્ષો કાપવા માટે કરેલ જોગવાઈ મુજબ નીચે પ્રમાણેના ૨૬ જાતના વૃક્ષો કાપવા માટે સક્ષમ અધિકારી ( ૧ અનામત વૃક્ષો: નાયબ વન સંરક્ષક, ૨ ઈતર કે બીનાનામત વૃક્ષો: જે તે જીલ્લાના કલેકટર)ની પરવાનગીની જરૂરત રહે છે. ૧ સાગ ૨ ચંદન ૩ સીસમ 9 ૪ મહુડો ૫ ખેર ૬ ટીમરૂં ૭ શીમળો ૮ સાદડ ૯ કરંજ ૧૦ કણજી ૧૧ સવન ૧૨ બીયો ૧૩ રોહન ૧૪ એબોની ૧૫ કડાયો ૧૬ કલમ ૧૭ હળદરવો ૧૮ હરડે ૧૯ ધાવડો ૨૦ આંબો ૨૧ તાડ ૨૨ ખજુરી ૨૩ જાંબુ ૨૪ દેશી બાવળ ૨૫ લીમડો ૨૬ ખીજડો (નોંધ: સાગ, સીસમ, ચંદન, મહુડો અને ખેર આ પાંચ જાતના વૃક્ષો જમીન મહેસુલધારા અન્વયે અનામત વૃક્ષ તરીકે જાહેર કરવામાં આવેલા છે.) રીપોર્ટ: કૃણાલ બારૈયા પ્રમુખ, વન પ્રકૃતિ ચેરીટેબલ ટ્રસ્ટ, સાવરકુંડલા.

Monojit Bhattacharya के द्वारा
June 5, 2013

पर्यावरण प्रदूषण एवं हमारा दायित्व 5 जून 2013, लोकताक पावर स्टेशन, मणिपुर एक मशहूर हॉलीवुड फिल्म में कही गई हैं “बड़ी शक्ति के साथ आति हैं बड़ी जिम्मेदारी”। हम इंसान इस धरती पर सबसे बुध्यिमान प्राणी हैं। हम अपनी बुद्धि और ताकत से बाकी जीब जन्तु, पेर पौधे और सारी विश्व को प्रभाबित करते हें। इसी ताकत के अभिमान में कभी कभी हम भूल जाते हें पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी। अपनी लोभ के लिए हम खुदकी फैलाई हुई प्रदूषण से घटी क्षति को अनदेखा कर देते हें। प्रगति के नाम पर घटी इस अपराध के कारण आज हमारा वर्तमान फंसा हें बिनाश के दलदल में। फैली हें कितनी ही जानलेवा बीमारी, हुयी है प्राकृतिक सम्पदा में अभाव, प्राणीओं के अवलुप्ति, आबोहवा में अननुमेय बद्लाव। इस समय मौन रहना और चुपचाप सब कुछ सहना कायरता हैं। अब समय आगया है की हम समझे हमारा उत्तरदायित्व। इतिहास गवाह हें, जब जब मानव सभ्यता प्रदूषण के चपेट में आई हें, बिज्ञान ने हमें राह दिखाई हें। जब घोरों और बैलों पर बरने लगी अत्याचार, मोटर-गाड़ी से मिली राहत। जब हर घर में कोयलें की धुएँ से दम घुटने लगे, गैस और बिजली ने हमें राहत की साँस दी। बिज्ञान नें हमें सिखाया कम से कम प्रदूषण फैलाए पानी से कैसे बिजली मिल सकता हैं। भारत में जल विद्युत विकास के लिए एनएचपीसी लिमिटेड सबसे बड़ा संगठन हें। एनएचपीसी परिवार के सदस्व होने के नाते पर्यावरण को सवरने के लिए हम अमूल्य योगदान दे सकते हैं। समझदारी और जिम्मेदारी से यह काम करना हमारा दायित्व हे जो हम बखूबी निभा रहे हें। बाँध बनाते समय और सुरंग खोदते समय हम ध्यान देते हें की पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। एनएचपीसी लिमिटेड देश में पवन ऊर्जा एवं टाइडल परियोजनाएं बनाने की भी योजना बना रही है। जैसे जैसे हम नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाते जेएंगे, दुर्लभ ईंधन भण्डारों की बचत होगी और प्रदूषण रहित होने के कारण पर्यावरण सुरक्षित रहेगी। एनएचपीसी बृक्षारोपण करके कई इलाक़ा को हरिभरी की हें। वर्षाजल संग्रहण , ऊर्जा बचत जैसे पर्यावरण हितैषी कामों में अग्रणी रहा हें। इंटरनेट द्वारा बिलों का भुगतान करके और आन-लाईन काम करके हम कागज की बचत करते हें। इससे पेड कटने से बच रहे हैं। निजी जिंदेगी में हमें पानी और बिजली की बचत के प्रति सचेत रहना होगा। तभी हम अपने और अपने बच्चों के लिए वर्तमान के साथ साथ आनेवाले काल भी खुशहाल बना सकते हें।

Manoj के द्वारा
June 5, 2012

पेड़ लगाओ धरती को बचाओ,

    MOHAMMAD ANEES के द्वारा
    May 27, 2014

    पेड लगाओ ओकसीजन पाओ ।


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