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गजल गायकी को दिया एक नया आयाम – पंकज उधास

Posted On: 17 May, 2012 मस्ती मालगाड़ी में

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एक दौर था जब मद्धम और रुहानी संगीत वाले गाने या गजलें लोगों को मानसिक और भावनात्मक थकान से मुक्ति दिलवाते थे. लेकिन फिर समय बदला और आजकल की फास्ट युवा पीढ़ी को रॉक और लाउड म्यूजिक बेहद पसंद आने लगे. लेकिन इन परिवर्तनों के बीच कुछ गायक ऐसे भी आए जिन्हें आज भी हर उम्र और वर्ग के लोग सुनना पसंद करते हैं. उनकी आवाज इतनी मधुर और सहज होती है कि उनकी आवाज के जादू से बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक कोई भी नहीं बच पाता. ऐसे ही एक गायक हैं पंकज उधास, जिन्होंने अपनी गजल गायकी से कई वर्षों तक श्रोताओं के दिलों पर राज किया और गायकी के क्षेत्र में उनका सफर आज भी निरंतर जारी है.


pankajपंकज उधास का शुरुआती जीवन

पंकज उधास का जन्म 17 मई, 1951 को राजकोट (गुजरात) के निकट जेतपुर में हुआ था. केशुभाई उधास के तीसरे पुत्र पंकज उधास के दोनों बड़े भाई गायक हैं. पंकज उधास के सबसे भाई मनहर उधास को गायक के तौर पर बॉलिवुड में थोड़ी सफलता मिली थी. वहीं उनके दूसरे भाई निर्मल उधास भी एक प्रसिद्ध गजल गायक हैं. उधास परिवार में वही सबसे पहले गायकी के क्षेत्र में आए थे. भावनगर में पढ़ाई के दौरान पंकज उधास का परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया. यहां आकर उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज से शिक्षा पूरी की.

हुस्न और अदाकारी का संगम


पंकज उधास का कॅरियर

पंकज उधास के बड़े भाई मनहर उधास, जो एक स्टेज परफॉर्मर थे, ने उन्हें गायकी में स्थापित करने में एक बड़ी भूमिका निभाई. वर्ष 1962 में हुई सिनो-इंडियन वार के समय पंकज उधास ने पहली बार स्टेज पर परफॉर्म किया. उन्होंने ऐ मेरे वतन के लोगोंम गीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. ऑडियंस में से एक व्यक्ति ने उन्हें इनाम के तौर पर 51 रुपए भेंट किए. चार वर्ष बाद उन्होंने राजकोट स्थित संगीत नाट्य अकादमी में दाखिला लिया. अपने प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने तबला वादन की सभी बारीकियां सीख लीं. मुंबई के विलसन और सेंट जेवियर कॉलेज से विज्ञान में स्नातक की उपाधि ग्रहण करने के बाद पंकज उधास ने मास्टर नवरंग की देख-रेख में शास्त्रीय गायकी भी सीखी. पंकज उधास ने कामना फिल्म में पहली बार गायन किया. यह फिल्म भले ही फ्लॉप रही लेकिन पंकज उधास के प्रशंसकों की संख्या बढ़ने लगी थी. गजल गायकी में रुझान विकसित होने के बाद पंकज उधास ने इसे ही अपने कॅरियर के रूप में चुना. इसके लिए उन्होंने उर्दू भाषा भी सीखी. कनाडा और अमेरिका में लगभग दस वर्ष व्यतीत करने के बाद पंकज उधास जब वापस भारत आए तब तक वह एक परिपक्व गायक के रूप में स्थापित हो चुके थे. वर्ष 1980 में उनकी पहली गजल एलबम आहट रिलीज हुई. तब से लेकर वर्ष 2011 तक उनकी लगभग 50 गजल एलबम रिलीज हो चुकी हैं. इसके अलावा वह कई फिल्मों में भी गायकी कर चुके हैं.


वर्ष 1980 में प्रदर्शित हुई फिल्म नाम में पंकज उधास द्वारा गाए गीत चिट्ठी आई है ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचा दिया. घायल फिल्म के गीत माहिया तेरी कसम में उन्हें लता मंगेशकर के साथ भी गाने का अवसर मिला. वर्ष 1994 में आई फिल्म मोहरा में उन्होंने ना कजरे की धार गीत गाया जो उनके कॅरियर में एक मील का पत्थर साबित हुआ. प्लेबैक सिंगर के रूप में काम करते हुए उन्हें कई बार ऑन स्क्रीन गाने का अवसर भी मिला.

वर्ष 1987 में आई हुई शगुफ्ता, सीडी (कॉम्पैक्ट डिस्क) में रिलीज हुई उनकी पहली एलबम थी.


गजल गायकी के अलावा पंकज उधास ने कुछ वर्ष पहले सोनी चैनल पर आदाब अर्ज है नामक टैलेंट हंट कार्यक्रम भी शुरू किया था. विभिन्न पुरस्कारों से नवाजे जा चुके पंकज उधास ने फरीदा नामक महिला से विवाह किया था. इनकी दो बेटियां, नायाब और रेवा हैं.


महान रचयिता रबिन्द्रनाथ टैगोर

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shawndrea के द्वारा
February 14, 2016

Play inartmfoive for me, Mr. internet writer.

RAMENDRA SINGH के द्वारा
May 17, 2012

वाकई पंकज जी अपने युग के महान गायकों में से एक है

    Servena के द्वारा
    June 11, 2016

    It’s good to see you back at it, Gregory. Your presence has been missed! Quite recently I have been pondering the nature of faith. Some say it is the most mystical non-experience we can 02e8perience„. In faith, God is present to us as the Absolute and therefore, incomprehensible.Steve


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