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सामान्य व्यक्ति से महापुरुष तक का सफर – महात्मा बुद्ध जयंती

पोस्टेड ओन: 6 May, 2012 जनरल डब्बा में

buddha poornimaभारत की पवित्र भूमि पर ऐसे कई महापुरुषों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने कृत्यों और सिद्धांतों के बल पर मानव जीवन के भीतर छिपे गूढ़ रहस्यों को उजागर किया. इन्हीं में से एक हैं महात्मा बुद्ध, जिन्होंने सामान्य मनुष्य के रूप में जन्म लेकर अध्यात्म की उस ऊंचाई को छुआ जहां तक पहुंचना किसी आम व्यक्ति के लिए मुमकिन नहीं है. ऐसे महान पुरुष के दिखलाए गए मार्ग को लोगों ने एक धर्म के रूप में ग्रहण किया जिसके परिणामस्वरूप भारत समेत सभी बड़े देशों में बौद्ध धर्म एक प्रमुख धर्म के रूप में स्वीकृत कर लिया गया.


महात्मा बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ था किंतु गौतमी द्वारा पाले जाने के कारण उन्हें गौतम भी कहा गया. बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद उनके नाम के आगे बुद्ध उपसर्ग जोड़ दिया गया और धीरे-धीरे वे महात्मा बुद्ध के तौर पर प्रख्यात हो गए. गौतम बुद्ध के आदर्शों और बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले लोगों के लिए आज का दिन बेहद खास है. मान्यताओं के अनुसार बैसाख मास की पूर्णिमा के दिन महात्मा बुद्ध पृथ्वी पर अवतरित हुए थे और इसी दिन उन्हें बुद्धत्व के साथ-साथ महापरिनिर्वाण की भी प्राप्ति हुई थी.


महात्मा बुद्ध का जीवन

सिद्धार्थ का जन्म शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन के घर हुआ था. जन्म के सात दिन के भीतर ही सिद्धार्थ की मां का निधन हो गया था. उनका पालन पोषण शुद्धोधन की दूसरी रानी महाप्रजावती ने किया. सिद्धार्थ के जन्म के समय ही एक महान साधु नेब यह घोषणा कर दी थी कि यह बच्चा या तो एक महान राजा बनेगा या फिर एक बेहद पवित्र मनुष्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा.


इस भविष्यवाणी को सुनकर राजा शुद्धोधन ने अपनी सामर्थ्य की हद तक सिद्धार्थ को दुःख से दूर रखने की कोशिश की. लेकिन छोटी सी आयु में ही सिद्धार्थ जीवन और मृत्यु की सच्चाई को समझ गए. उन्होंने यह जान लिया कि जिस प्रकार मनुष्य का जन्म लेना एक सच्चाई है उसी प्रकार बुढ़ापा और निधन भी जीवन की कभी ना टलने वाली हकीकत है. संसार की सबसे बड़ी सच्चाई जानने के बाद महात्मा बुद्ध सांसारिक खुशियों और विलासिता भरे जीवन से पूरी तरह विमुख हो गए. राज पाठ के साथ, पत्नी और पुत्र को छोड़कर उन्होंने एक साधु का जीवन अपना लिया.


buddhaबुद्धत्व की प्राप्ति

दो अन्य ब्राह्मणों के साथ सिद्धार्थ ने अपने भीतर उपज रहे प्रश्नों के हल ढूंढ़ने शुरू किए. लेकिन समुचित ध्यान लगाने और कड़े परिश्रम के बाद भी उन्हें अपने प्रश्नों के हल नहीं मिले. हर बार असफलता हाथ लगने के बाद उन्होंने अपने कुछ साथियों के साथ कठोर तप करने का निर्णय लिया. छ: वर्षों के कठोर तप के बाद भी वह अपने उद्देश्यों को पूरा नहीं कर पाए. इसके बाद उन्होंने कठोर तपस्या छोड़कर आर्य अष्टांग मार्ग, जिसे मध्यम मार्ग भी कहां जाता है, ढूंढ़ निकाला. वह एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गए और निश्चय किया कि अपने प्रश्नों के उत्तर जाने बिना वह यहां से उठेंगे नहीं. लगभग 49 दिनों तक ध्यान में रहने के बाद उन्हें सर्वोच्च ज्ञान की प्राप्ति हुई और मात्र 35 वर्ष की उम्र में ही वह सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध बन गए.

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ज्ञान की प्राप्ति होने के बाद महात्मा बुद्ध दो व्यापारियों, तपुसा और भलिका, से मिले जो उनके पहले अनुयायी भी बने. वाराणसी के समीप स्थित सारनाथ में उन्होंने अपना पहला धर्मोपदेश दिया.


बुद्ध का महापरिनिर्वाण

बौद्ध धर्म से जुड़े साहित्य के अनुसार 80 वर्ष की आयु में महात्मा बुद्ध ने यह घोषित कर दिया था कि बहुत ही जल्द वह महापरिनिर्वाण की अवस्था में पहुंच जाएंगे. इस कथन के बाद महात्मा बुद्ध ने एक लुहार के हाथ से आखिरी निवाला खाया. इसके बाद वह बहुत ज्यादा बीमार हो गए. लुहार को लगा कि उसके हाथ से खाने के कारण महात्मा बुद्ध की यह हालत हुई है इसीलिए महात्मा बुद्ध ने अपने एक अनुयायी को कुंडा नामक लुहार को समझाने भेजा. वैद्य ने भी यह प्रमाणित कर दिया था कि उनका निधन वृद्धावस्था के कारण हुआ है ना कि विशाक्त खाद्य के कारण.


बौद्ध धर्म की शिक्षा

  • सम्यक दृष्टि – सम्यक दृष्टि का अर्थ है कि जीवन में हमेशा सुख-दुख आता रहता है हमें अपने नजरिये को सही रखना चाहिए. अगर दुख है तो उसे दूर भी किया जा सकता है.
  • सम्यक संकल्प – इसका अर्थ है कि जीवन में जो काम करने योग्य है, जिससे दूसरों का भला होता है हमें उसे करने का संकल्प लेना चाहिए और ऐसे काम कभी नहीं करने चाहिए जो अन्य लोगों के लिए हानिकारक साबित हो.
  • सम्यक वचन – इसका अर्थ यह है कि मनुष्य को अपनी वाणी का सदैव सदुपयोग ही करना चाहिए. असत्य, निंदा और अनावश्यक बातों से बचना चाहिए.
  • सम्यक कर्मांत – मनुष्य को किसी भी प्राणी के प्रति मन, वचन, कर्म से हिंसक व्यवहार नहीं करना चाहिए. उसे दुराचार और भोग विलास से दूर रहना चाहिए.
  • सम्यक आजीविका – गलत, अनैतिक या अधार्मिक तरीकों से आजीविका प्राप्त नहीं करना.
  • सम्यक व्यायाम –  बुरी और अनैतिक आदतों को छोडऩे का सच्चे मन से प्रयास करना चाहिए. मनुष्य को सदगुणों को ग्रहण करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए.
  • सम्यक स्मृति – इसका अर्थ यह है कि हमें कभी भी यह नहीं भूलना चाहिए कि सांसारिक जीवन क्षणिक और नाशवान है.
  • सम्यक समाधि – ध्यान की वह अवस्था जिसमें मन की अस्थिरता, चंचलता, शांत होती है तथा विचारों का अनावश्यक भटकाव रुकता है.

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

SUBHASH GAUTAM के द्वारा
July 19, 2014

VILL-TALDA

SUBHASH GAUTAM के द्वारा
July 19, 2014

SUBHASH GAUTAM VILL-TALDA-POST DISST GAUTAM STETE UTTAR PRADESH PIN 203202

Gautama के द्वारा
April 6, 2014

Nepal doesnt exist at the time of MBuddha birth. So ONLY INIDIA ………..Saaley Nepali naukri karney ka number aaye toh India mey saab ji kartey hain and waisey bakchodi kar rahey hau ki Nepal mey hua tha Buddha. Abey Mahan aatma ka janam Dharti par hita hai wo in choti chhezo ko nahi dekhti ki Nepal ya pakistan. Wo purey bhramand ka udhaar karney aatey hain. नेपाल मेय सिर्फ गोरखा पैदा होते हैं :)

    राजदीपसिह चूडासमा के द्वारा
    May 14, 2014

    हा हा हा

    राजदीपसिह चूडासमा के द्वारा
    May 14, 2014

    नेपाल मेय सिर्फ गोरखा पैदा होते हे 4 foot

paras के द्वारा
February 18, 2014

कमसेकम गौतम बुद्धा जो के सचाई का उद्धहरण हे , जो एक सच्चाई का पाठ सिक्के गए / ऐसे महा पुरुष के बारेमें झूठी ज्ञान देरहे हो . ये लेख बहुत अछा हे पर ये लेखक को इतना पता नहीं के गौतम / महात्मा बुद्धा नेपाल के पबित्र भूमि के लुम्बिनी में जनम हुवा था |

naresh के द्वारा
October 5, 2013

Tags: biography birthday BLOGS IN HINDI bollywood Bollywood Actors entertainment Filmography happy birthday Happy bithday hindi blog indian constutuion Indian Democracy POLITICIAN top 10 political affairs Video Songs

jony के द्वारा
October 2, 2013

nice thanks for this info…

nepali के द्वारा
September 11, 2013

who said dat buddha was botn in india vai pehele wikipedia or kisi foreign historian sr ja kar pucho ki buddha was born where

sam के द्वारा
September 9, 2013

Tera baap ka raaz chal raha hai kya. Gautam budhha was born in Nepal not in India ……

    Gautama के द्वारा
    April 6, 2014

    Nepal doesnt exist at the time of MBuddha birth. So ONLY INIDIA ………..Saaley Nepali naukri karney ka number aaye toh India mey saab ji kartey hain and waisey bakchodi kar rahey hau ki Nepal mey hua tha Buddha. Abey Mahan aatma ka janam Dharti par hita hai wo in choti chhezo ko nahi dekhti ki Nepal ya pakistan. Wo purey bhramand ka udhaar karney aatey hain. नेपाल मेय सिर्फ गोरखा पैदा होते हैं :)

pema के द्वारा
May 25, 2013

hey reporter what the hell this.how can you say buddha is born in india???? i think you havnt any knowedge of buddha. i want to teach you ,buddha is born in Nepal not a india. do you understand

S. Ranjit , United Kingdom के द्वारा
March 26, 2013

A true story but I do not believe that the Buddha was born in India.

ADITYA JAIN के द्वारा
November 17, 2012

बडिया

lalit के द्वारा
May 6, 2012

विपसना उनका मूल अविष्कार था . एक आम आदमी को पूरा धर्म जानने के लिए विपसना करनी पड़ती है.




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