चिंगारी जो बनी शोला: अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद

Posted On 27 Feb, 2012 Others में

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Chandra Shekhar Azad Profile in hindi

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में देश के कई क्रांतिकारी वीर-सपूतों की याद आज भी हमारी रुह में जोश और देशप्रेम की एक लहर पैदा कर देती है. एक वह समय था जब लोग अपना सब कुछ छोड़कर देश को आजाद कराने के लिए बलिदान देने को तैयार रहते थे और एक आज का समय है जब अपने ही देश के नेता अपनी ही जनता को मार कर खाने पर तुले हैं. देशभक्ति की जो मिशाल हमारे देश के क्रांतिकारियों ने पैदा की थी अगर उसे आग की तरह फैलाया जाता तो संभव था आजादी हमें जल्दी मिल जाती.


वीरता और पराक्रम की कहानी हमारे देश के वीर क्रांतिकारियों ने रखी थी वह आजादी की लड़ाई की विशेष कड़ी थी जिसके बिना आजादी मिलना नामुमकिन था.


देशप्रेम, वीरता और साहस की एक ऐसी ही मिशाल थे शहीद क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद. 25 साल की उम्र में भारत माता के लिए शहीद होने वाले इस महापुरुष के बारें में जितना कहा जाए उतना कम है. आज ही के दिन साल 1931 में चन्द्रशेखर आजाद शहीद हुए थे. उन्हीं की याद में प्रस्तुत है उनके जीवन के एक छोटा-सा वृतांत.


chandra1चन्द्रशेखर आजाद का जीवन


पृथ्वी पर चन्द्रशेखर आजाद जैसे योद्धा का अवतरण एक चमत्कारिक सत्य है, जिससे बदरिकाश्रम के समान पवित्र उन्नाव जिले का बदरका गांव संसार में जाना जाता है. कानपुर जिसे हम क्रांति-राजधानी कह सकते है, के निकटवर्ती इसी जनपद में पं. सीताराम तिवारी के पुत्र के रूप में जन्मलब्ध चन्द्रशेखर का बाल्यकाल मालवा प्रदेश में व्यतीत हुआ.


असहयोग आंदोलन से जागे देश में दमन-चक्र जारी था, सत्याग्रहियों के बीच निकल पड़े, प्रस्तरखंड उठाया, बेंत बरसाने वालों में से एक सिपाही के सिर में दे मारा. पेशी होने पर अपना नाम आजाद, काम आजादी के कारखाने में मजदूरी और निवास जेलखाने में बताया. गुस्साए अंग्रेज मजिस्ट्रेट ने पंद्रह बेंतों की सख्त सजा सुनाई. हर सांस में वंदेमातरम का निनाद करते हुए उन्होंने यह परीक्षा भी उत्तीर्ण की.


क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद

अचूक निशानेबाज आजाद ने अपना पावन शरीर मातृभूमि के शत्रुओं को फिर कभी छूने नहीं दिया. क्रांति की जितनी योजनाएं बनीं सभी के सूत्रधार आजाद थे. कानपुर में भगत सिंह से भेंट हुई. साथियों के अनुरोध पर आजाद एक रात घर गए और सुषुप्त मां एवं जागते पिता को प्रणाम कर कर्तव्यपथ पर वापस आ गए. सांडर्स का वध-विधान पूरा कर राजगुरु, भगतसिंह और आजाद फरार हो गए. 8 अप्रैल 1929 को श्रमिक विरोधी ट्रेड डिस्प्यूट बिल का परिणाम सभापति द्वारा खोलते ही, इसके लिए नियुक्त दर्शक-दीर्घा में खड़े दत्त और भगत सिंह को असेंबली में बम के धमाके के साथ इंकलाब जिंदाबाद का नारा बुलंद करते गिरफ्तार कर लिया गया. भगत सिंह को छुड़ाने की योजना चन्द्रशेखर ने बनाई, पर बम जांचते वोहरा सहसा शहीद हो गए.  घर में रखा बम दूसरे दिन फट जाने से योजना विफल हो गई. हमारी आजादी की नींव में उन सूरमाओं का इतिहास अमर है जिन्होंने हमें स्वाभिमानपूर्वक अपने इतिहास और संस्कृति की संरक्षा की अविचल प्रेरणा प्रदान की है.


ChandrashekharAzad2फिर आया वह दिन


27 फ़रवरी, 1931 के दिन चन्द्रशेखर आज़ाद अपने साथी सुखदेव राज के साथ बैठकर विचार–विमर्श कर रहे थे कि तभी वहां अंग्रेजों ने उन्हें घेर लिया. चन्द्रशेखर आजाद ने सुखदेव को तो भगा दिया पर खुद अंग्रेजों का अकेले ही सामना करते रहे. अंत में जब अंग्रेजों की एक गोली उनकी जांघ में लगी तो अपनी बंदूक में बची एक गोली को उन्होंने खुद ही मार ली और अंग्रेजों के हाथों मरने की बजाय खुद ही आत्महत्या कर ली. कहते हैं मौत के बाद अंग्रेजी अफसर और पुलिसवाले चन्द्रशेखर आजाद की लाश के पास जाने से भी डर रहे थे.


चंद्रशेखर आज़ाद को वेष बदलने में बहुत माहिर माना जाता था. वह रुसी क्रांतिकारियों की कहानी से बहुत प्रेरित थे. चन्द्रशेखर आजाद की वीरता की कहानियां कई हैं जो आज भी युवाओं में देशप्रेम की लहर पैदा कर देती हैं. देश को अपने इस सच्चे वीर स्वतंत्रता सेनानी पर हमेशा गर्व रहेगा.


Full Story of Chandrashekhar Azad


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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

gyan singh के द्वारा
June 12, 2016

nice

rajkumar के द्वारा
June 30, 2014

Agar desh ko desh banana hai toh hame aur apko aage badana hoga modi kya kahate hai ki ajadi lawnga par apko lagta hai nahi modi nahi ham or aap hi kewal ajadi la sakte hai jaiiiiiiiiiiiii hiiiiindddd ma thuje salam

dheeraj vats के द्वारा
December 25, 2013

a true inspiring story of a real tiger

dheeraj के द्वारा
February 27, 2012

चन्द्रशेखर आजाद एक सच्चा देश भक्त, वेशभूषा से सच्चा हिंदुस्तानी, अपने दमदार व्यक्तितव से अंग्रेजों के पसीने छुड़ाने वाले,




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