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व्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

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वीर छत्रपति शिवाजी

पोस्टेड ओन: 19 Feb, 2012 मस्ती मालगाड़ी में

भारतभूमि हमेशा ही वीरों की जननी रही है. यहां समय-समय पर ऐसे वीर हुए जिनकी वीर गाथा सुन हर भारतवासी का सीना गर्व से तन जाता है. भारतभूमि के महान वीरों में एक नाम वीर छत्रपति शिवाजी का भी आता है जिन्होंने अपने पराक्रम से औरंगजेब जैसे महान मुगल शासक की सेना को भी परास्त कर दिया था. एक महान, साहसी और चतुर हिंदू शासक के रूप में छत्रपति शिवाजी को यह जग हमेशा याद करेगा.


कम साधन होने के बाद भी छत्रपति शिवाजी ने अपनी सेना को एक संयोजित ढंग से रण में माहिर बनाया. अपनी बहादुरी, साहस एवं चतुरता से उन्‍होंने औरंगजेब जैसे शक्तिशाली मुगल सम्राट की विशाल सेना से कई बार जोरदार टक्कर ली और अपनी शक्ति को बढ़ाया. छत्रपति शिवाजी कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ एक समाज सुधारक भी थे. वे कई लोगों का धर्म परिवर्तन कराकर उन्‍हें पुन हिन्‍दू धर्म में लाए. छत्रपति शिवाजी बहुत ही चरित्रवान व्‍यक्ति थे. वे महिलाओं का बहुत आदर करते थे. महिलाओं के साथ दुर्व्‍यवहार करने वालों और निर्दोष व्‍यक्तियों की हत्‍या करने वालों को कड़ा दंड देते थे.


छत्रपति शिवाजी की अभूतपूर्व सफलता का रहस्य मात्र उनकी वीरता एवं शौर्य में निहित नहीं है, अपितु उनकी आध्यात्मिकता का भी उनकी उपलब्धियों में बहुत बडा योगदान है. उल्लेखनीय है कि मराठा सरदार से छत्रपति बनने के मार्ग में बहुत सारी बाधाएं आईं किंतु उन सबका उन्मूलन करते हुए वह अपने लक्ष्य पर पहुंच कर ही रहे.


Shivajiऔरंगजेब भी था शिवाजी के आगे फेल

मुगल बादशाह औरंगजेब अपनी विराट शाही सेना के बावजूद उनका बाल बांका भी नहीं कर सका और उसके एक बडे भूभाग पर उन्होंने अधिकार प्राप्त कर लिया. छल से उन्हें और उनके किशोर लडके को आगरे में कैद करने में औरंगजेब ने सफलता प्राप्त की, तो शिवाजी अपनी बुद्धिमता और अपनी इष्ट देवी तुलजा भवानी की कृपा के बल पर बंधन मुक्त होने में सफल हो गए. असहाय जनता के लिए शिवाजी पहले-पहल एक समर्थ रक्षक बनकर उभरे. छत्रपति निस्संदेह भारत-माता के प्रथम सुपुत्र सिद्ध हुए, जिन्होंने देशवासियों के अंदर नवीन उत्साह का संचार किया.


शिवाजी यथार्थ में एक आदर्शवादी थे. उन्होंने मुगलों, बीजापुर के सुल्तान, गोवा के पुर्तग़ालियों और जंजीरा स्थित अबीसीनिया के समुद्री डाकुओं के प्रबल प्रतिरोध के बावजूद दक्षिण में एक स्वतंत्र हिन्दू राज्य की स्थापना की. उन्हीं के प्रयासों से भविष्य में विशाल मराठा साम्राज्य की स्थापना हुई. उनके गुरू दक्षिण भारत में एक महान संत गुरु रामदास थे. शिवाजी का गुरू प्रेम भी जगप्रसिद्ध था.


शिवाजी की 1680 में कुछ समय बीमार रहने के बाद अपनी राजधानी पहाड़ी दुर्ग राजगढ़ में 3 अप्रैल को मृत्यु हो गई. आज भी देश में छत्रपति शिवाजी का नाम एक महान सेनानी और लड़ाके के रूप में लिया जाता है जिनकी रणनीति का अध्ययन आज भी लोग करते हैं.



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

SACHIN tIKORE के द्वारा
March 15, 2013

और 1 बात उनके गुरू एक महान संत तुकाराम और उनकी माताजी जीजाबाई थे.

    satishkumar kamol के द्वारा
    January 10, 2014

    shivaji ka janm sivneri kille me huaa tha.mother jijabai ,father shahji bhosle pune ke jagirdar the.or vijapur ke sultan ke sardar the.

SACHIN tIKORE के द्वारा
March 15, 2013

शिवाजी महाराज की मृत्यु रायगड किले पर हुई थी….. जो उस शासन काल में शिवाजी की राजधानी थी. राजगढ़ 1674 के पहले कि राजधानी थी.

mukesh के द्वारा
February 19, 2012

शिवाजी का जीवन हमारे लिए प्रेरणास्त्रोत है. जिस समय देश के अधिकांश राजा विदेशी हमलावरों के आगे या तो समर्पण कर चुके थे या निराश होक्र्र बैठ गए थे, शिवाजी ने सीमित साधनों से अत्याचारी मुग़ल साशको को सबक सिखाया था और हिंदुत्व के गौरव को पुनह स्थापित किया था. आज फिर ऐसी ही स्थिति बन रही है. रास्ट्र-विरोधी शक्तियां एकजुट होकर देश को तबाह करना चहाती है, शिवाजी से प्रेरणा लेकर हमे अपना देश बचाना है.




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