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बच्चों के चाचा नेहरू : बाल दिवस पर विशेष

Posted On: 14 Nov, 2011 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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बच्चे हर देश का भविष्य और उसकी तस्वीर होते हैं. बच्चे ही किसी देश के आने वाले भविष्य को तैयार करते हैं. लेकिन भारत जैसे देश में बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल शोषण के तमाम ऐसे अनैतिक और क्रूर कृत्य मिलेंगे जिन्हें देख आपको यकीन नहीं होगा कि यह वही देश है जहां भगवान विष्णु को बाल रूप में पूजा जाता है और जहां के प्रथम प्रधानमंत्री को बच्चे इतने प्यारे थे कि उन्होंने अपना जन्मदिवस ही उनके नाम कर दिया.


देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) को बच्चों से विशेष प्रेम था. यह प्रेम ही था जो उन्होंने अपने जन्मदिवस को बाल दिवस (Children Day) के रूप में मनाने का निर्णय लिया. जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru)को बच्चों से लगाव था तो वहीं बच्चे भी उन्हें चाचा नेहरू के नाम से जानते थे. जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) ने नेताओं की छवि से अलग हटकर एक ऐसी तस्वीर पैदा की जिस पर चलना आज के नेताओं के बस की बात नहीं. आज चाचा नेहरू का जन्मदिन है. तो चलिए जानते हैं जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) के उस पक्ष के बारे में जो उन्हें बच्चों के बीच चाचा बनाती थी.


Jawaharlal Nehruजवाहर लाल नेहरू जी की जीवनी

14 नवंबर, 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मे पं. नेहरू (P. Nehru) का बचपन काफी शानोशौकत से बीता. उनके पिता देश के उच्च वकीलों में से एक थे. पं. मोतीलाल नेहरु (Motilal Nehru) एक धनाढ्य वकील थे. उनकी मां का नाम स्वरूप रानी नेहरू था. वह मोतीलाल नेहरू के इकलौते पुत्र थे. इनके अलावा मोती लाल नेहरू (Motilal Nehru) की तीन पुत्रियां थीं. उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं.


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वह महात्मा गांधी के कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़े. चाहे असहयोग आंदोलन की बात हो या फिर नमक सत्याग्रह या फिर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की बात हो उन्होंने गांधी जी के हर आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भाग लिया. नेहरू की विश्व के बारे में जानकारी से गांधी जी काफी प्रभावित थे और इसीलिए आजादी के बाद वह उन्हें प्रधानमंत्री पद पर देखना चाहते थे. सन् 1920 में उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में पहले किसान मार्च का आयोजन किया. 1923 में वह अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव चुने गए.


1929 में नेहरू भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र के अध्यक्ष चुने गए. नेहरू आजादी के आंदोलन के दौरान बहुत बार जेल गए. 1920 से 1922 तक चले असहयोग आंदोलन के दौरान उन्हें दो बार गिरफ्तार किया गया.


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जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) जहां गांधीवादी मार्ग से आजादी के आंदोलन के लिए लड़े वहीं उन्होंने कई बार सशस्त्र संघर्ष चलाने वाले क्रांतिकारियों का भी साथ दिया. आजाद हिन्द फौज के सेनानियों पर अंग्रेजों द्वारा चलाए गए मुकदमे में नेहरू ने क्रांतिकारियों की वकालत की. उनके प्रयासों के चलते अंग्रेजों को बहुत से क्रांतिकारियों का रिहा करना पड़ा. 27 मई, 1964 को उनका निधन हो गया.


Children's Day बच्चों के चाचा नेहरू- Chacha Nehru

एक दिन तीन मूर्ति भवन के बगीचे में लगे पेड़-पौधों के बीच से गुजरते हुए घुमावदार रास्ते पर नेहरू जी टहल रहे थे. उनका ध्यान पौधों पर था. तभी पौधों के बीच से उन्हें एक बच्चे के रोने की आवाज आई. नेहरूजी ने आसपास देखा तो उन्हें पेड़ों के बीच एक-दो माह का बच्चा दिखाई दिया जो रो रहा था.


जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) ने उसकी मां को इधर-उधर ढूंढ़ा पर वह नहीं मिली. चाचा ने सोचा शायद वह बगीचे में ही कहीं माली के साथ काम कर रही होगी. नेहरूजी यह सोच ही रहे थे कि बच्चे ने रोना तेज कर दिया. इस पर उन्होंने उस बच्चे की मां की भूमिका निभाने का मन बना लिया.


वह बच्चे को गोद में उठाकर खिलाने लगे और वह तब तक उसके साथ रहे जब तक उसकी मां वहां नहीं आ गई. उस बच्चे को देश के प्रधानमंत्री के हाथ में देखकर उसकी मां को यकीन ही नहीं हुआ.


दूसरा वाकया जुड़ा है तमिलनाडु से. एक बार जब पंडित नेहरू तमिलनाडु के दौरे पर गए तब जिस सड़क से वे गुजर रहे थे वहां लोग साइकलों पर खड़े होकर तो कहीं दीवारों पर चढ़कर नेताजी को निहार रहे थे. प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए हर आदमी इतना उत्सुक था कि जिसे जहां समझ आया वहां खड़े होकर नेहरू जी को निहारने लगा.


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इस भीड़ भरे इलाके में नेहरूजी ने देखा कि दूर खड़ा एक गुब्बारे वाला पंजों के बल खड़ा डगमगा रहा था. ऐसा लग रहा था कि उसके हाथों के तरह-तरह के रंग-बिरंगी गुब्बारे मानो पंडितजी को देखने के लिए डोल रहे हों. जैसे वे कह रहे हों हम तुम्हारा तमिलनाडु में स्वागत करते हैं. नेहरूजी की गाड़ी जब गुब्बारे वाले तक पहुंची तो गाड़ी से उतरकर वे गुब्बारे खरीदने के लिए आगे बढ़े तो गुब्बारे वाला हक्का-बक्का-सा रह गया.


जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) ने अपने तमिल जानने वाले सचिव से कहकर सारे गुब्बारे खरीदवाए और वहां उपस्थित सारे बच्चों को वे गुब्बारे बंटवा दिए. ऐसे प्यारे चाचा नेहरू को बच्चों के प्रति बहुत लगाव था. नेहरू जी के मन में बच्चों के प्रति विशेष प्रेम और सहानुभूति देखकर लोग उन्हें चाचा नेहरू के नाम से संबोधित करने लगे और जैसे-जैसे गुब्बारे बच्चों के हाथों तक पहुंचे बच्चों ने चाचा नेहरू-चाचा नेहरू की तेज आवाज से वहां का वातावरण उल्लासित कर दिया. तभी से वे चाचा नेहरू के नाम से प्रसिद्ध हो गए.


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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

har har mahadev के द्वारा
July 18, 2013

aisa hi ki usko bacchon se kam unki maon se jyada pyar tha aur un maon ke paas jaane ka usko bachon ke dwara bahana chahiye tha . yahi hakikat hai us nehru ke bare mein jisne puri duniya ko pakistan ke roop mein tohfa diya hai .

ajaykumar2623 के द्वारा
November 14, 2011

क्या आज के दौर में बाल दिवस प्रासंगिक है……… http://ajaykumar2623.jagranjunction.com/2011/11/14/%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%97%E0%A4%AF%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%BE/

surendra के द्वारा
November 14, 2011

आज बाल दिवस है ..एक घंटू हराम खोर के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है ! इस भारत भूमि पर यही चंडाल नेहरु एक वीर बालक या बच्चो से प्रेम करने वाला जन्म लिया था ? वीर भरत ,एकलव्य ,दुर्गादास ,छत्रसाल ,सिद्धार्थ ,ध्रुव ,जालिम सिंह ,शिवा जी ,गोरा और बदल गुरुमुख सिंह ,वासुदेव चाफेकर ,तिलका मांझी ,जितेन मुखर्जी ,भगत सिंह ,चंद्रशेखर आज़ाद , ऐसे महा वीर बालको के जन्म दिन पर बाल दिवस क्यों नहीं ? जब नेहरु के जन्म दिन पर बाल दिवस मनाएंगे तो बालक भी नेहरु जैसा ऐयाश ,शराबी ,ध्रुम पान प्रेमी ही बनेगा और काम ऐसा करेगा जिसे लोग शदियों तक दबे जुबान में ही सही केवल और केवल गाली हिन् देगा !

    ajaykumar2623 के द्वारा
    November 14, 2011

    वाह सुरेन्द्र जी

dpt के द्वारा
November 14, 2011

चाचा जोकरलाल नेहरु का बाल प्रेम इस बात से ज्यादा जाहिर होता है की उन्होंने भारतवर्ष को पता नहीं कितने बच्चे दिए, जिनमे से ज्यादातर को उसका नाम नहीं मिला. बेचारे की मृत्यु भी सिफिलिस नाम की बीमारी से हुई. स्वामी प्रभुपाद (हरे रामा हरे कृष्णा वाले) ने उसकी मृत्यु के बाद कहा था की जोकरलाल ने कुत्ते की योनि में जन्म ले लिया है (शायद इसलिए की उसके कर्म कुत्तों वाले ही थे).

sangeeta के द्वारा
November 14, 2011

जवाहरलाल नेहरू का बाल प्रेम विश्व में एक अनोखी मिसाल पैदा करता है इस एक इंसान ने अपने जन्मदिन को ही बच्चों के नाम कर दिया है. बच्चें वह फूल होते हैं जो जिस भी गुलदस्ते में लगे उसे खुबसूरत बना देते हैं.


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