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व्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

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लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल

पोस्टेड ओन: 31 Oct, 2011 जनरल डब्बा में

आज हम जिस विशाल भारत को देखते हैं उसकी कल्पना बिना वल्लभ भाई पटेल के शायद पूरी नहीं हो पाती. सरदार वल्लभ भाई पटेल एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने देश के छोटे-छोटे रजवाड़ों और राजघरानों को एक कर भारत में सम्मिलित किया. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की जब भी बात होती है तो सरदार पटेल का नाम सबसे पहले ध्यान में आता है. उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति, नेतृत्व कौशल का ही कमाल था कि 600 देशी रियासतों का भारतीय संघ में विलय कर सके.


भारत के प्रथम गृह मंत्री और प्रथम उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष का दर्जा प्राप्त था. उनके द्वारा किए गए साहसिक कार्यों की वजह से ही उन्हें लौह पुरुष और सरदार जैसे विशेषणों से नवाजा गया. बिस्मार्क ने जिस तरह जर्मनी के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई उसी तरह वल्लभ भाई पटेल ने भी आजाद भारत को एक विशाल राष्ट्र बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया. बिस्मार्क को जहां जर्मनी का ‘आयरन चांसलर’ कहा जाता है वहीं पटेल भारत के लौह पुरुष कहलाते हैं.


Sardar-Vallabhai-Patelवल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात के नाडियाड में उनके ननिहाल में हुआ. वह खेड़ा जिले के कारमसद में रहने वाले झावेर भाई पटेल की चौथी संतान थे. उनकी माता का नाम लाडबा पटेल था.


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बचपन से ही उनके परिवार ने उनकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया. हालांकि 16 साल में उनका विवाह कर दिया गया था पर उन्होंने अपने विवाह को अपनी पढ़ाई के रास्ते में नहीं आने दिया. 22 साल की उम्र में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की और ज़िला अधिवक्ता की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए, जिससे उन्हें वकालत करने की अनुमति मिली.


अपनी वकालत के दौरान उन्होंने कई बार ऐसे केस लड़े जिसे दूसरे निरस और हारा हुए मानते थे. उनकी प्रभावशाली वकालत का ही कमाल था कि उनकी प्रसिद्धी दिनों-दिन बढ़ती चली गई. गम्भीर और शालीन पटेल अपने उच्चस्तरीय तौर-तरीक़ों और चुस्त अंग्रेज़ी पहनावे के लिए भी जाने जाते थे. लेकिन गांधीजी के प्रभाव में आने के बाद जैसे उनकी राह ही बदल गई.


1917 में मोहनदास करमचन्द गांधी के संपर्क में आने के बाद उन्होंने ब्रिटिश राज की नीतियों के विरोध में अहिंसक और नागरिक अवज्ञा आंदोलन के जरिए खेड़ा, बरसाड़ और बारदोली के किसानों को एकत्र किया. अपने इस काम की वजह से देखते ही देखते वह गुजरात के प्रभावशाली नेताओं की श्रेणी में शामिल हो गए. जन कल्याण और आजादी के लिए चलाए जाने वाले आंदोलनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के चलते उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में महत्वपूर्ण स्थान मिल गया. गुजरात के बारदोली ताल्लुका के लोगों ने उन्हें ‘सरदार’ नाम दिया और इस तरह वह सरदार वल्लभ भाई पटेल कहलाने लगे.


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सरदार पटेल और जवाहरलाल नेहरू : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में वह कई बार जेल के अंदर बाहर हुए. हालांकि जिस चीज के लिए इतिहासकार हमेशा सरदार वल्लभ भाई पटेल के बारे में जानने के लिए इच्छुक रहते हैं वह थी उनकी और जवाहरलाल नेहरू की प्रतिस्पर्द्धा. सब जानते हैं 1929 के लाहौर अधिवेशन में सरदार पटेल ही गांधी जी के बाद दूसरे सबसे प्रबल दावेदार थे पर मुसलमानों के प्रति पटेल की हठधर्मिता की वजह से गांधीजी ने उनसे उनका नाम वापस दिलवा दिया. 1945-1946 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए भी पटेल एक प्रमुख उम्मीदवार थे. लेकिन गांधीजी के नेहरू प्रेम ने उन्हें अध्यक्ष नहीं बनने दिया. कई इतिहासकार यहां तक मानते हैं कि यदि सरदार पटेल को प्रधानमंत्री बनने दिया गया होता तो चीन और पाकिस्तान के युद्ध में भारत को पूर्ण विजय मिलती परंतु गांधी के जगजाहिर नेहरू प्रेम ने उन्हें प्रधानमंत्री बनने से रोक दिया.


आजादी के बाद भी लौह पुरुष की भूमिका: भारत आजाद तो हो गया था पर उसे यह आजादी पाकिस्तान की कीमत पर मिली थी और उसके सामने चुनौती थी अपनी छोटी-छोटी रियासतों को एक करने की वरना एक बड़े भारतवर्ष का सपना शायद चकनाचूर हो सकता था. ऐसे में सरदार वल्लभ भाई पटेल ने रियासतों के प्रति नीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘रियासतों को तीन विषयों – सुरक्षा, विदेश तथा संचार व्यवस्था के आधार पर भारतीय संघ में शामिल किया जाएगा.’


सरदार पटेल ने आज़ादी के ठीक पूर्व (संक्रमण काल में) ही पी.वी. मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत में मिलाने के लिये कार्य आरम्भ कर दिया था. पटेल और मेनन ने देसी राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हें स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा. इसके परिणामस्वरूप तीन को छोडकर शेष सभी रजवाडों ने स्वेच्छा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. 15 अगस्त, 1947 तक हैदराबाद, कश्मीर और जूनागढ़ को छोड़कर शेष भारतीय रियासतें ‘भारत संघ’ में सम्मिलित हो गईं. जूनागढ़ के नवाब के विरुद्ध जब बहुत विरोध हुआ तो वह भागकर पाकिस्तान चला गया और जूनागढ भी भारत में मिल गया. जब हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो सरदार पटेल ने वहां सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया. गृहमंत्री बनने के बाद भारतीय रियासतों के विलय की ज़िम्मेदारी उन्हें ही सौंपी गई. उन्होंने अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए छह सौ छोटी बड़ी रियासतों का भारत में विलय कराया.


माना जाता है पटेल कश्मीर को भी बिना शर्त भारत से जोड़ना चाहते थे पर नेहरू जी ने हस्तक्षेप कर कश्मीर को विशेष दर्जा दे दिया. नेहरू जी ने कश्मीर के मुद्दे को यह कहकर अपने पास रख लिया कि यह समस्या एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है. अगर कश्मीर का निर्णय नेहरू की बजाय पटेल के हाथ में होता तो कश्मीर आज भारत के लिए समस्या नहीं बल्कि गौरव का विषय होता.


सरदार पटेल का निधन 15 दिसंबर, 1950 को मुंबई में हुआ था. आज हमारा समाज ऐसे ही लौह पुरुष की तलाश में है जो समाज में किसी भी कीमत पर एकता लाने में सफल हो.


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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anil के द्वारा
September 13, 2014

aisa insan agaya he uska nam he narendra damodardas modi

avdheshkumarsingh के द्वारा
June 28, 2014

सरदार पटॆल जीवनी

upendra kumar के द्वारा
February 10, 2014

Har aadme ke andar sardar patel chhupe hai Har aadme ke andar Rajeev gandhi chhupe hai Har aadme ke andar gandhi jee chhupe hai Hum sardar patel,Rajeev gandhi,gandhi jee,ban sakte hai lekin hame jagna hoga aur apne kam ko shmjhana ho tab hum asli neta banskte hai… sardar patel ke ;GAGANCHUMBHI;putla bnane se koi asle neta nahi ban jata hai.

upendra kumar के द्वारा
February 10, 2014

Jis Prkar sher ke khal phan kar lomane sheree nahi ban jate use prakar saradar patel jaisa aadi ko e चाय bhechane wala nahi ban skata वो तो सिर्फ कोई कांग्रेशी ही बन सकता है

jay v murabiya के द्वारा
January 18, 2014

Sardar patel hamare desh ki shan the.Bhaviaya me sardar patel ki jagah ek hi le sakta hai NARENDRA MODI.

virendra singh के द्वारा
January 9, 2014

sardar patel was a precious person. I like him.

patel divy के द्वारा
December 13, 2013

My hero.

deepak के द्वारा
December 12, 2013

जेशा की अंत में लिखा की आज हमारा समाज ऐसे ही लौह पुरुष की तलाश में है जो समाज में किसी भी कीमत पर एकता लाने में सफल हो. तो उस पुरस का नाम हे       नरेद्र मोदी और एक संगठन हे जो की आर एस एस

JAYESH A PANWALA के द्वारा
December 10, 2013

आज सरदारकि जगह मोदी हे । बाकिका आपके हाठमे हे ।

Deepak Dubey के द्वारा
November 4, 2013

सरदार पटेल जैसा व्यक्ति आज मिलना कठिन है – दीपक दुबे भोपाल

yogendra patel के द्वारा
November 3, 2013

He is great man

vivek singh के द्वारा
November 3, 2013

i want to come sardar patel .beacuase i am inspired with his story

Rakesh kumar Verma के द्वारा
October 31, 2013

Inko Mera Sat-Sat Naman….

गजेनद् सोलंकी उ समापुर 08430031600 के द्वारा
October 26, 2013

मे सरदार बललब भाई पटेल का बबहित आभारी हू ईनहोन देश को एक िकया और जागरण िटम का भी बहूत आभारी हू जो इन सारी बातो को हम तक और देश तक पहुचाय

samandeep kaur के द्वारा
August 10, 2013

its true and i agree with it and proud of sbbp

vipin gour के द्वारा
June 24, 2013

sardar ballabh bhai patel ji ko mera kotish pranam or jagran team ko bhi धन्यवाद की आपने जानकारी को हम तक पहुचाया हम apke  आभारी है

jayant के द्वारा
June 16, 2013

इतना बड़ा न लिखकर थोडा छोटा लिखना चाहिए इन्हें नही तो ………………………………………….

sushil verma के द्वारा
July 24, 2012

we are proud of our greatest leader s.b.b. patel

Santosh Kumar के द्वारा
November 1, 2011

लौह पुरुष को कोटिशः नमन

ajay के द्वारा
October 31, 2011

लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल का नाम ऐसे नेता के रूप में लिया जाता है जिसने आजादी के बाद बिखरे हुए देश को एक राष्ट्र का रूप दिया. अपने इसी सार्थक निर्णय की वजह से उन्हें लौह की संज्ञा दी जाती है.

    Manoj Jain के द्वारा
    April 10, 2014

    Sardar Patel is good person and life style and work style is good as a HERO.




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