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कुमार शानू - गायकी के एक अध्याय

Posted On: 20 Oct, 2011 मस्ती मालगाड़ी में

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संगीत वही होता है जो आपकी रूह को शांति का अहसास दिलाए. जब भी आप थोड़ा परेशान होते हैं और संगीत सुनने के मूड में होते हैं तो चाहते हैं कि कोई ऐसी आवाज मिले जिसे सुन सब शांत हो जाएं ना कि रॉक म्यूजिक. लता मांगेशकर, मो. रफी, मुकेश, किशोर जैसे गायकों ने हमेशा ऐसे ही गानों पर जोर दिया जो कानों को भाए और दिल को लुभाए. लेकिन हाल के सालों में गायक पश्चिमी संगीत के दीवाने हो गए हैं. फिर भी कुछ गीतकार ऐसे हैं जिन्होंने अपनी आवाज से दिल को शांति का अमृत पिलाया है. ऐसे ही एक गीतकार हैं कुमार शानू. किशोर कुमार को अपना आदर्श मानकर कुमार शानू ने हिन्दी सिनेमा में ऐसा स्थान बनाया है जहां उन्हें दूसरा किशोर कुमार कहा जाता है.


Kumar Sanuकुमार शानू का जीवन

कुमार शानू की गायिकी की एक खासियत है कि वह सभी तरह के गाने गाने में माहिर है. साथ ही उनकी आवाज की मधुरता दिल को सुकून भी देती है. आशिकी और साजन जैसी फिल्मों के गीतों से शुरूआत कर कुमार शानू ने बॉलिवुड में जगह बनाया. हालांकि आज के दौर में उनके गाने बहुत कम ही सुने जाते हैं फिर भी संगीत प्रेमियों के दिलों में कुमार शानू का एक अलग ही स्थान है.


कोलकाता में 20 अक्टूबर, 1957 को जन्मे कुमार शानू का वास्तविक नाम केदारनाथ भट्टाचार्य है. उनके पिता पाशुपति भट्टाचार्य एक संगीतकार थे. गायकी के शुरूआती गुर उन्होंने अपने पिता से ही सीखे. कुमार शानू को उनके पिता ने गायकी और तबला बजाना सिखाया. हालांकि कुमार शानू को गायकी पसंद थी जिसकी वजह थी उनके आदर्श किशोर कुमार.


kumar-sanuकुमार शानू का कॅरियर

1979 में कलकत्ता यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री लेने के बाद कुमार शानू ने स्टेज शो करने शुरू कर दिए. 1987 में मशहूर गायक जगजीत सिंह ने उनका गाना सुन उन्हें फिल्मों में ब्रेक दिया. फिल्म “आंधियां” के साथ कुमार शानू ने अपने कॅरियर की शुरूआत की. इसी समय उनसे गीतकार कल्याणजी और आनंदजी मिले जिन्होंने कुमार शानू को नाम बदलने की सलाह दी. और यही से शुरूआत हुई गायक कुमार शानू के कॅरियर की.


करीब 350 से अधिक फिल्मों के लिए गा चुके कुमार शानू को सफलता वर्ष 1990 में बनी आशिकी फिल्म से मिली जिसके गीत सुपरहिट हुए और कुमार शानू लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गए. फिल्म के गानों में कुमार शानू ने ऐसा जादू बिखेरा की सब उनके दीवाने हो गए. इस फिल्म के गाने “अब तेरे बिन जी लेंगे हम” के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक का अवार्ड मिला. इसके बाद लगातार पांच साल तक उन्हें यह खिताब मिला. “साजन”, “दीवाना”, ”बाजीगर” और “1942 लव स्टोरी” में उनके गानों को फिल्मफेयर सम्मान मिला.


अक्सर लोग कहते हैं कि कुमार शानू की आवाज़ काफी हद तक किशोर कुमार से मिलती जुलती है. हालांकि कुमार शानू ने भी माना है कि उन्होंने मुकेश और मोहम्मद रफी की शैली अपनाने की कोशिश की लेकिन बाद में अपनी अलग शैली विकसित की.


17,000 से अधिक गाने गाने वाले कुमार शानू ने एक दिन में 28 गाने रिकॉर्ड कर अपना नाम गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज करवाया है. अपने कॅरियर में कुमार शानू ने लगभग सभी बड़े निर्माताओं की फिल्मों में गाने गाए हैं.


kumar-sanu-pratibha-patil-2009-3-31-6-32-17अगर हाल के समय पर नजर डाला जाए तो उन्होंने “कहो ना प्यार है”, “दिल का रिश्ता”, “कयामत”, “अंदाज”, “बेवफा” और “नो एंट्री” जैसी फिल्मों में गाने गाए हैं. हाल के सालों में उन्होंने फिल्मों में गायकी से ब्रेक लिया है जिसकी वजह वह गानों में मधुरता की कमी और अधिक भडकाऊ गानों को ना गा पाने की वजह मानते हैं.


कुमार शानू को साल 2009 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से नवाजा गया था. कुमार शानू के गाने आज भी लोग उसी तरह सुनते हैं जैसा कभी 90 के दशक में सुनते थे. सबको उम्मीद है कि आज के कनफोड़ू संगीत की दुनिया में दुबारा से मिठास घोलने के लिए कुमार शानू जल्द ही कुछ गाने लाएंगे.


कुमार शानू के कुछ बेहतरीन गाने

अब तेरे बिन जी लेंगे हम – फिल्म “आशिकी”

मेरा दिल भी कितना पागल है – फिल्म “साजन”

तुम्हें अपना बनाने की कसम खाई है – फिल्म “सड़क”

सोचेंगे तुम्हें प्यार करें की नहीं – फिल्म “दीवाना”

ये काली काली आंखें – फिल्म “बाजीगर”

घुंघट की आड़ में – फिल्म “हम हैं राही प्यार के”

एक लड़की को देखा तो – फिल्म “1942 लव स्टोरी”



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yashwant के द्वारा
May 10, 2012

kumar shanu’s voice is very sweet.

Manoj के द्वारा
October 20, 2011

कुमार शानु की आवाज में जो जादू था वह बरसों तक किसी गायक की आवाज में नहीं आ सकता है.. उनके द्वारा गाया गया गान्मा एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा .. आज भी लोगों के दिलों को धड़का देता है.


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