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ओम पुरी : अभिनय की खान

Posted On: 18 Oct, 2011 मस्ती मालगाड़ी में

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बॉलिवुड में आज उन अभिनेताओं की बेहद कमी है जो अपने अभिनय से किरदार को जीवित कर दें. नसीरुद्दीन शाह, अनुपम खेर और ओम पुरी जैसे अभिनेता हमेशा अपने दमदार अभिनय के लिए ही जाने जाते हैं. आज फिल्म अभिनेता ओम पुरी का जन्मदिन है. ओमपुरी हिन्दी सिनेमा के वह सितारे हैं जिन्हें लोग हर भूमिका में देखना पसंद करते हैं. आर्ट सिनेमा हो या कमर्शियल सिनेमा ओम पुरी सभी जगह फिट हो जाते हैं.


ओमपुरी भारतीय सिनेमा के कालजयी  अभिनेताओं  की सूची में शुमार हैं. उनके अभिनय का हर अंदाज दर्शकों को प्रभावित करता है. रूपहले  पर्दे पर जब उनका हंसता-मुस्कुराता चेहरा दिखता है तो दर्शकों को भी अपनी खुशियों का अहसास होता है और उनके दर्द में दर्शक भी दु:खी होते हैं.


Om Puriओमपुरी का जीवन

18 अक्टूबर, 1950 को पंजाब के अंबाला शहर में जन्मे ओम पुरी का बचपन अंबाला में ही बीता. फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (Film and Television Institute of India) से स्नातक के बाद ओम पुरी ने दिल्ली स्थित नेशनल स्कूल आफ ड्रामा (एनएसडी) से अभिनय का कोर्स किया. यहीं उनकी मुलाकात नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों से भी हुई.


नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय का औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ओमपुरी ने हिंदी फिल्मों का रूख किया. 1976 की फिल्म “घासीराम कोतवाल” में वे पहली बार हिंदी फिल्मी दर्शकों से रू-ब-रू हुए. घासीराम की संवेदनशील भूमिका में अपनी अभिनय-क्षमता का प्रभावी परिचय ओमपुरी ने दिया और धीरे-धीरे वे मुख्य धारा की फिल्मों से अलग समानांतर फिल्मों के सर्वाधिक लोकप्रिय अभिनेता के रूप में उभरने लगे.


Om-Puri-380ओमपुरी का कॅरियर

1981 में उन्हें फिल्म आक्रोश मिली. आक्रोश में ओमपुरी के अभिनय की जमकर तारीफ हुई और इसके बाद फिल्मी दुनिया में उनकी गाड़ी चल निकली. भवनी भवई, स्पर्श, मंडी, आक्रोश, शोध जैसी फिल्मों में ओमपुरी के सधे हुए अभिनय का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोला, पर उनके फिल्मी सफर में मील का पत्थर साबित हुई, अर्धसत्य. अर्धसत्य में युवा, जुझारू और आंदोलनकारी पुलिस ऑफिसर की भूमिका में वे बेहद जंचे.


धीरे-धीरे ओमपुरी  समानांतर सिनेमा की जरूरत बन गए. समानांतर सिनेमा जगत में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराने के साथ-साथ ओमपुरी ने मुख्य धारा की फिल्मों का भी रूख  किया. कभी नायक कभी खलनायक तो कभी चरित्र अभिनेता और हास्य अभिनेता के रूप में वे हर दर्शक वर्ग से रू-ब-रू  हुए.


नसीरुद्दीन शाह और स्मिता पाटिल के साथ उन्होंने भवनी भवई (Bhavani Bhavai), अर्ध सत्य, मिर्च मसाला और धारावी जैसी फिल्मों में काम किया.


ओमपुरी हिंदी फिल्मों की उन गिने-चुने अभिनेताओं की सूची में शामिल हैं जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनायी है. ईस्ट इज ईस्ट, सिटी ऑफ ज्वॉय, वुल्फ, द घोस्ट एंड डार्कनेस जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी उन्होंने अपने उम्दा अभिनय की छाप छोड़ी है. सैम एंड मी, सिटी आफ ज्वॉय और चार्ली विल्सन वार जैसी अंग्रेजी फिल्मों समेत उन्होंने लगभग 200 फिल्मों में काम किया. चार्ली विल्सन में उन्होंने पाकिस्तान के राष्ट्रपति जिया उल हक की भूमिका निभाई. हाल के वर्षों में मकबूल और देव जैसी गंभीर फिल्मों में अभिनय करने वाले ओमपुरी अपने सशक्त अभिनय के साथ ही अपनी सशक्त आवाज के लिए भी जाने जाते हैं.


जीवन के उनसठ वसंत देख चुके ओमपुरी आज भी हिंदी फिल्मों में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. फर्क, बस इतना है कि इन दिनों वे नायक या खलनायक नहीं बल्कि, चरित्र या हास्य अभिनेता के रूप में हिंदी फिल्मों दर्शकों से रू-ब-रू हो रहे हैं. चाची 420, हेरा फेरी, मेरे बाप पहले आप, मालामाल वीकली  में ओमपुरी हंसती-गुदगुदाती भूमिकाओं में दिखे तो शूट ऑन साइट, महारथी, देव और हालिया रिलीज दबंग में चरित्र अभिनेता के रूप में वे दर्शकों से रू-ब-रू  हुए.


ओमपुरी का निजी जीवन

ओमपुरी का निजी जीवन कई बार विवादों के सायों में आया. उन्होंने दो शादी की है. पहली पत्नी का नाम सीमा है जिनसे तलाक लेकर उन्होंने नंदिता पुरी से शादी की थी. नंदिता से ओम पुरी को एक लड़का ईशान भी है.


हाल ही में ओम पुरी अन्ना हजारे के अनशन के दौरान दिल्ली के रामलीला मैदान आए थे जहां उन्होंने देश के नेताओ पर टिप्पणी की थी जिसपर उनकी कई नेताओं ने आलोचना भी की. पर हमेशा बेबाक  राय रखने वाले ओम पुरी ने जो कहा वह उनकी नजर में एक सच था जो लोगों को कड़वा लग गया.


ओमपुरी को मिले पुरस्कार

1981 में फिल्म “आक्रोश” के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके बाद साल 1982 में फिल्म “आरोहण” (Arohan) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया और 1948 में भी उन्हें फिल्म “अर्ध सत्य” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया. 1990 में उन्हें “पद्मश्री” दिया गया और साल 2009 में उन्हें फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया.


आने वाले सालों में ओम पुरी की कुछ और बेहतरीन फिल्में नजर आने की उम्मीद है.



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