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मादकता और सुन्दरता की मेल : रेखा

Posted On: 10 Oct, 2011 Others में

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हिन्दी फिल्मों में आज अधिकतर अभिनेत्रियां अंग प्रदर्शन को आगे बढ़ने का पैमाना बनाती जा रही हैं. आजकल के समय में यह सब कई बार सही भी लगता है. आज अभिनेत्रियों में इतना साहस है कि वह बोल्ड फिल्में कर सकती हैं लेकिन बॉलिवुड में 80 और 90 के सालों में कहानी थोड़ी अलग थी. तब पर्दे पर चुबंन दृश्य देने पर भी अच्छा खासा बवाल हो जाता था. लेकिन उसी समय बॉलिवुड में एक ऐसी अभिनेत्री भी आई जिसने अपने हुस्न और अदाकारी से ना सिर्फ लोगों का दिल जीता बल्कि समय आने पर अपने मादक अंदाज से लोगों को अपना कायल भी बनाया. हम बात कर रहे हैं बीते जमाने की मशहूर और बोल्ड अभिनेत्री रेखा की जिनका आज जन्मदिन है. रेखा वह अभिनेत्री हैं जिनमें अभिनय के सभी गुण मौजूद थे फिर चाहे वह नृत्य हो या अभिनय सबमें हिट और फिट रहने वाली रेखा की जिन्दगी खुद एक कहानी है.


Rekha रेखा का निजी जीवन

बेबी भानुरेखा के नाम से चार साल की उम्र में कैमरे से रिश्ता जोड़ने वाली रेखा की जिंदगी संघर्ष और सफलता की किसी रोचक दास्तान से कम नहीं है. रेखा ने बॉलिवुड में जो स्थान पाया है वह संघर्ष के पथरीले रास्तों से होकर गुजरा. पैसों की तंगी की वजह से उन्होंने बी और सी ग्रेड की फिल्में भी की और जब एक बार उनका सितारा चमका तो जिन्दगी भर अकेले रहने का गम भी सहना पड़ा. खूबसूरत और साफ दिल होने के बावजूद वह अकेले ही अपनी जिंदगी जीती हैं.


तमिल फिल्मों के सुपर स्टार जैमिनी गणेशन और तेलगू अभिनेत्री पुष्पवल्ली की बेटी रेखा का जन्म 10 अक्टूबर, 1954 को चेन्नई में हुआ था. माता पिता के फिल्मों में होने की वजह से रेखा का भी झुकाव फिल्मों की तरफ ही रहा. उनका बचपन का नाम भानुरेखा गणेशन था जिसे बदलकर उन्होंने फिल्मों में आने के बाद रेखा कर लिया. अभिनय का सफर रेखा के लिए आसान नहीं था. कमजोर पारिवारिक स्थिति ने फिल्मों में अभिनय के लिए उन पर दबाव डाला.


रेखा का कॅरियर

पैसे की तंगी के चलते रेखा यानी भानुरेखा गणेशन को 12 साल की उम्र में मजबूरन तेलगू फिल्म रंगुला रत्नम (Rangula Ratnam) में काम करना पड़ा था लेकिन उन्होंने बतौर अभिनेत्री पहली बार बॉलिवुड में फिल्म “सावन भादो” की. लेकिन उनकी शुरुआती फिल्मों से उनको पहचान नहीं मिली. उनका अधिक वजन और हिंदी भाषा की जानकारी का अभाव लोगों को हजम नहीं हुआ और दर्शकों ने उन्हें नकार दिया. इसके बाद उन्होंने कहानी किस्मत की, नमक हराम, रामपुर का लक्ष्मण और प्राण जाए पर वचन ना जाए जैसी फिल्में कीं.


साल 1976 में प्रदर्शित फिल्म ‘दो अनजाने’ उनके कॅरियर की पहली सफल फिल्म साबित हुई. इस फिल्म में पहली बार उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ काम करने का मौका मिला. वर्ष 1978 में प्रदर्शित फिल्म ‘घर’ रेखा के सिने कॅरियर के लिए अहम फिल्म साबित हुई. इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिए वह पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकित की गईं.


रेखा और अमिताभ की जोड़ी

प्रकाश मेहरा की “मुकद्दर का सिकंदर” में रेखा और अमिताभ की जोड़ी ने पहली बार शोहरत के आसमान को छुआ और फिर देखते ही देखते यह जोड़ी सिने-इतिहास में अपना नाम दर्ज करती चली गई. “सुहाग”, “मि. नटवरलाल” सहित कई फिल्मों की सफलता के साथ इस जोड़ी ने बुलंदी का वह शिखर छुआ, जिसे आज भी लोकप्रियता का इतिहास माना जाता है. इस जोड़ी का शिखर रहा यश चोपड़ा की फिल्म “सिलसिला”, जिसमें अमिताभ के साथ रेखा और जया बच्चन का त्रिकोण था. फिल्म में जया ने अमिताभ की पत्‍‌नी और रेखा ने प्रेमिका का रोल किया था. यही वजह है कि इस फिल्म को बच्चन की निजी जिंदगी से जोड़कर देखा गया और इस जोड़ी के आपसी रिश्तों को लेकर चर्चाओं का बाजार आज भी बुलंद रहता है. इस जोड़ी के दीवाने तो आज भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि यह जोड़ी एक बार फिर सफलता के इतिहास को दोहराए. इसमें कोई शक नहीं है कि जिस दिन अमिताभ-रेखा एक फिल्म में साथ काम करने के लिए राजी हो गए, वह फिल्म दर्शकों के हुजूम को थिएटरों में ले आएगी.


1981 में मुजफ्फर अली की फिल्म ‘उमराव जान’ में उनका हुस्न और अभिनय दोनों शबाब पर था, जिसका जादू अभी तक लोगों के सिर चढ़कर बोलता है. इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतना रेखा की अभिनय क्षमता का प्रमाण था. उमराव जान के बाद रेखा के कॅरियर में मंदी जरूर आई, लेकिन निजी तौर पर फिल्म-जगत में उनका जादू अब भी बरकरार है.


साल 1996 में रेखा अंग्रेजी फिल्म “कामसूत्र” में नजर आईं तो लोगों ने उन पर बहुत आपत्ति जताई पर फिल्म की सफलता ने सबके मुंह पर ताला जड़ दिया.


रेखा: फिल्मोग्राफी और अवार्ड

फिल्म ‘सावन भादो’ से हिन्दी फिल्मों में कदम रखने वाली रेखा ने अपने 42 साल के कॅरियर में अब तक घर, खूबसूरत, सिलसिला, विजेता, उत्सव, खून भरी मांग, जुबेदा, भूत और कृष जैसी तकरीबन 180 फिल्मों में अभिनय किया है. फिल्म ‘उमराव जान’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया.


रेखा को दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया जिसमें पहली बार फिल्म ‘खूबसूरत’ के लिए साल 1981 में और दूसरी बार फिल्म ‘खून भरी मांग’ के लिए यह पुरस्कार उन्हें दिया गया. अपने कॅरियर के ढलते दौर में भी उन्होंने फिल्म “खिलाड़ियों का खिलाडी” के लिए सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड जीता. 2010 में उन्हें “पद्म श्री” से नवाजा गया.


अमिताभ के साथ सफलता और प्रेम के रिश्तों ने रेखा की जिंदगी को नई दिशा दी और आज भी इस जोड़ी को बेजोड़ कहा जाता है. खूबसूरती की मिसाल कही जाने वाली रेखा की निजी जिंदगी की उठापटक भी हमेशा चर्चित रही. अमिताभ के अलावा कई सितारों के साथ उनके अफेयर के किस्से, 1990 में दिल्ली के बिजनेसमैन मुकेश अग्रवाल के साथ उनके विवाह की असफलता रेखा के रहस्यों का एक हिस्सा हैं. कहा तो यह भी जाता है कि उन्होंने विनोद मेहरा से शादी की थी पर इसे रेखा मात्र एक अफवाह मानती हैं. लोगों को चौंकाने में विश्वास रखने वाली रेखा कब क्या करें और कहें, कोई नहीं जानता.


हाल ही में परिणीता के गाने की सफलता से साबित हो गया कि चार दशक बाद भी रेखा का जादू बरकरार है. ऐसे में, जबकि रेखा की समकालीन अधिकतर अभिनेत्रियां या तो रिटायर हो चुकी हैं या फिर मां-दादी के रोल कर रही हैं, आज भी रेखा की क्षमता और रहस्य हमेशा दिलचस्पी का सबब बनी हुई है और शायद हमेशा बनी रहे.




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