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व्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

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क्रांति का दूसरा नाम शहीद भगत सिंह

पोस्टेड ओन: 28 Sep, 2011 जनरल डब्बा में

भारत जब भी अपने आजाद होने पर गर्व महसूस करता है तो उसका सर उन महापुरुषों के लिए हमेशा झुकता है जिन्होंने देश प्रेम की राह में अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया. देश के स्वतंत्रता संग्राम में हजारों ऐसे नौजवान भी थे जिन्होंने ताकत के बल पर आजादी दिलाने की ठानी और क्रांतिकारी कहलाए. भारत में जब भी क्रांतिकारियों का नाम लिया जाता है तो सबसे पहला नाम शहीद भगत सिंह का आता है.


शहीद भगत सिंह ने ही देश के नौजवानों में ऊर्जा का ऐसा गुबार भरा कि विदेशी हुकूमत को इनसे डर लगने लगा. हाथ जोड़कर निवेदन करने की जगह लोहे से लोहा लेने की आग के साथ आजादी की लड़ाई में कूदने वाले भगत सिंह की दिलेरी की कहानियां आज भी हमारे अंदर देशभक्ति की आग जलाती हैं. माना जाता है अगर उस समय देश के बड़े नेताओं ने भी भगतसिंह और उनके क्रांतिकारी साथियों का सहयोग किया होता तो देश वक्त से पहले आजाद हो जाता और तब शायद हम और अधिक गर्व महसूस करते. लेकिन देश के एक नौजवान क्रांतिकारी को अंग्रेजों ने फांसी की सजा दे दी. लेकिन मरने के बाद भी भगत सिंह मरे नहीं. आज के नेताओं में जहां हम हमेशा छल और कपट की भावना देखते हैं जो मुंबई हमलों के बाद भी अपना स्वाभिमान और गुस्से को ताक पर रख कर बैठे हैं, उनके लिए भगत सिंह एक आदर्श शख्सियत हैं जिनसे उन्हें सीख लेनी चाहिए.



Shaheed Bhagat Singh भगतसिंह का जीवन

भारत की आजादी के इतिहास में अमर शहीद भगत सिंह का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है. भगतसिंह का जन्म 28 सितम्बर, 1907 को पंजाब के जिला लायलपुर (Lyallpur district) में बंगा गांव (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था. भगतसिंह के पिता का नाम सरदार किशन सिंह और माता का नाम सरदारनी विद्यावती कौर (Sardarni Vidyavati Kaur) था. उनके पिता और उनके दो चाचा अजीत सिंह तथा स्वर्ण सिंह भी अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की लड़ाई का एक हिस्सा थे. जिस समय भगत सिंह का जन्म हुआ उस समय ही उनके पिता एवं चाचा को जेल से रिहा किया गया था. भगतसिंह की दादी ने बच्चे का नाम भागां वाला (अच्छे भाग्य वाला) रखा. बाद में उन्हें भगतसिंह कहा जाने लगा. एक देशभक्त परिवार में जन्म लेने की वजह से ही भगतसिंह को देशभक्ति का पाठ विरासत के तौर पर मिला.


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Bhagat Singh Real Photoभगतसिंह का बचपन

भगतसिंह जब चार-पांच वर्ष के हुए तो उन्हें गांव के प्राइमरी स्कूल में दाखिला दिलाया गया. भगतसिंह अपने दोस्तों के बीच बहुत लोकप्रिय थे. उन्हें स्कूल की चारदीवारी में बैठना अच्छा नहीं लगता था बल्कि उनका मन तो हमेशा खुले मैदानों में ही लगता था.


भगतसिंह की शिक्षा

प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के पश्चात भगतसिंह को 1916-17 में लाहौर के डीएवी स्कूल में दाखिला दिलाया गया. वहां उनका संपर्क लाला लाजपतराय और अम्बा प्रसाद जैसे देशभक्तों से हुआ. 1919 में “रॉलेट एक्ट”( Rowlatt Act) के विरोध में संपूर्ण भारत में प्रदर्शन हो रहे थे और इसी वर्ष 13 अप्रैल को जलियांवाला बाग काण्ड हुआ .


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गांधीजी का असहयोग आंदोलन

1920 के महात्मा गांधी के “असहयोग आंदोलन” से प्रभावित होकर 1921 में भगतसिंह ने स्कूल छोड़ दिया. असहयोग आंदोलन से प्रभावित छात्रों के लिए लाला लाजपतराय ने लाहौर में नेशनल कॉलेज की स्थापना की थी. इसी कॉलेज में भगतसिंह ने भी प्रवेश लिया. पंजाब नेशनल कॉलेज में उनकी देशभक्ति की भावना फलने-फूलने लगी. इसी कॉलेज में ही उनका यशपाल, भगवती चरण, सुखदेव, तीर्थराम, झण्डासिंह आदि क्रांतिकारियों से संपर्क हुआ. कॉलेज में एक नेशनल नाटक क्लब भी था. इसी क्लब के माध्यम से भगतसिंह ने देशभक्तिपूर्ण नाटकों में अभिनय भी किया.


1923 में जब बड़े भाई की मृत्यु के बाद उन पर शादी करने का दबाव डाला गया तो वह घर से भाग गए. इसी दौरान उन्होंने दिल्ली में ‘अर्जुन’ के सम्पादकीय विभाग में ‘अर्जुन सिंह’ के नाम से कुछ समय काम किया और अपने को ‘नौजवान भारत सभा’ से भी सम्बद्ध रखा.


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चन्द्रशेखर आजाद से संपर्क

वर्ष 1924 में उन्होंने कानपुर में दैनिक पत्र प्रताप के संचालक गणेश शंकर विद्यार्थी से भेंट की. इस भेंट के माध्यम से वे बटुकेश्वर दत्त और चन्द्रशेखर आजाद के संपर्क में आए. चन्द्रशेखर आजाद के प्रभाव से भगतसिंह पूर्णत: क्रांतिकारी बन गए. चन्द्रशेखर आजाद भगतसिंह को सबसे काबिल और अपना प्रिय मानते थे. दोनों ने मिलकर कई मौकों पर अंग्रेजों की नाक में दम किया.


भगतसिंह ने लाहौर में 1926 में नौजवान भारत सभा का गठन किया. यह सभा धर्मनिरपेक्ष संस्था थी तथा इसके प्रत्येक सदस्य को सौगन्ध लेनी पड़ती थी कि वह देश के हितों को अपनी जाति तथा अपने धर्म के हितों से बढक़र मानेगा. लेकिन मई 1930 में इसे गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया.


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bhagat singhसाण्डर्स की हत्या

वर्ष 1919 से लागू शासन सुधार अधिनियमों की जांच के लिए फरवरी 1928 में “साइमन कमीशन” मुम्बई पहुंचा. देशभर में साइमन कमीशन का विरोध हुआ. 30 अक्टूबर, 1928 को कमीशन लाहौर पहुंचा. लाला लाजपतराय के नेतृत्व में एक जुलूस कमीशन के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहा था, जिसमें भीड़ बढ़ती जा रही थी. इतनी अधिक भीड़ और उनका विरोध देख सहायक अधीक्षक साण्डर्स ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया. इस लाठी चार्ज में लाला लाजपतराय बुरी तरह घायल हो गए जिसकी वजह से 17 नवम्बर, 1928 को लालाजी का देहान्त हो गया .


चूंकि लाला लाजपतराय भगतसिंह के आदर्श पुरुषों में से एक थे इसलिए उन्होंने उनकी मृत्यु का बदला लेने की ठान ली. लाला लाजपतराय की हत्या का बदला लेने के लिए ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ ने भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, आज़ाद और जयगोपाल को यह कार्य दिया. क्रांतिकारियों ने साण्डर्स को मारकर लालाजी की मौत का बदला लिया. साण्डर्स की हत्या ने भगतसिंह को पूरे देश में एक क्रांतिकारी की पहचान दिला दी.


लेकिन इससे अंग्रेजी सरकार बुरी तरह बौखला गई. हालात ऐसे हो गए कि सिख होने के बाद भी भगतसिंह को  केश और दाढ़ी काटनी पड़ी. लेकिन मजा तो तब आया जब उन्होंने अलग वेश बनाकर अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकी.

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असेंबली में बम धमाका

उन्हीं दिनों अंग्रेज़ सरकार दिल्ली की असेंबली में पब्लिक ‘सेफ्टी बिल’ और ‘ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल’ लाने की तैयारी में थी. ये बहुत ही दमनकारी क़ानून थे और सरकार इन्हें पास करने का फैसला कर चुकी थी. शासकों का इस बिल को क़ानून बनाने के पीछे उद्देश्य था कि जनता में क्रांति का जो बीज पनप रहा है उसे अंकुरित होने से पहले ही समाप्त कर दिया जाए.


लेकिन चंद्रशेखर आजाद और उनके साथियों को यह हरगिज मंजूर नहीं था. सो उन्होने निर्णय लिया कि वह इसके विरोध में संसद में एक धमाका करेंगे जिससे बहरी हो चुकी अंग्रेज सरकार को उनकी आवाज सुनाई दे. इस काम के लिए भगतसिंह के साथ बटुकेश्वर दत्त को कार्य सौंपा गया. 8 अप्रैल, 1929 के दिन जैसे ही बिल संबंधी घोषणा की गई तभी भगत सिंह ने बम फेंका. भगतसिंह ने नारा लगाया इन्कलाब जिन्दाबाद… साम्राज्यवाद का नाश हो, इसी के साथ अनेक पर्चे भी फेंके, जिनमें अंग्रेजी साम्राजयवाद के प्रति आम जनता का रोष प्रकट किया गया था. इसके पश्चात क्रांतिकारियों को गिरफ्तार करने का दौर चला. भगत सिंह और बटुकेश्र्वर दत्त को आजीवन कारावास मिला.


भगत सिंह और उनके साथियों पर ‘लाहौर षडयंत्र’ का मुकदमा भी जेल में रहते ही चला. भागे हुए क्रांतिकारियों में प्रमुख राजगुरु पूना से गिरफ़्तार करके लाए गए. अंत में अदालत ने वही फैसला दिया, जिसकी पहले से ही उम्मीद थी.


अगर गांधी जी चाहते तो बच जाते भगत सिंह


अदालत ने भगतसिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 129, 302 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 4 तथा 6 एफ तथा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 120 के अंतर्गत अपराधी सिद्ध किया तथा 7 अक्टूबर, 1930 को 68 पृष्ठीय निर्णय दिया, जिसमें भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु को मृत्युदंड की सज़ा मिली.


23 मार्च, 1931 की रात

23 मार्च, 1931 की मध्यरात्रि को अंग्रेजी हुकूमत ने भारत के तीन सपूतों भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर लटका दिया था. अदालती आदेश के मुताबिक भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 24 मार्च 1931 को फांसी लगाई जानी थी, सुबह करीब 8 बजे. लेकिन 23 मार्च 1931 को ही इन तीनों को देर शाम करीब सात बजे फांसी लगा दी गई और शव रिश्तेदारों को न देकर रातों रात ले जाकर व्यास नदी के किनारे जला दिए गए. अंग्रेजों ने भगतसिंह और अन्य क्रांतिकारियों की बढ़ती लोकप्रियता और 24 मार्च को होने वाले संभावित विद्रोह की वजह से 23 मार्च को ही भगतसिंह और अन्य को फांसी दे दी.


अंग्रेजों ने भगतसिंह को तो खत्म कर दिया पर वह भगत सिंह के विचारों को खत्म नहीं कर पाए जिसने देश की आजादी की नींव रख दी. आज भी देश में भगतसिंह क्रांति की पहचान हैं.

Also read:

भारत के महान क्रांतिकारियों की दास्तां

देश के अन्य क्रांतिकारियों के बारे में भी अवश्य पढ़ें:


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45 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Vikrant chaudhary के द्वारा
September 6, 2014

Aap mera adarsh ho.. Mera dil dimag m apka vichar h or m bhi aap hi ki trh kuch asa kar jaoga ki dunia yaad krage ya vada h aapsa i miss u bhagat singh ji,

KAMAL TYAGI के द्वारा
July 22, 2014

BECHARO NE DESH KI JANTA K LIYE APNI JAAN DE DI PAR JO LOG (GANDHI BUDHDHAA OR NEHRU JAISE) LADKIYO K SATH MAJE LE RAHE THE WO AAJ BHI NOTO PE CHHAP KAR ATEI HAI

Rohit kumar के द्वारा
July 13, 2014

bhagat singh is very good man my request h ki note par bhi inki photo honi chaiye

chanchal tomar के द्वारा
June 23, 2014

Main fain bhaghat singh da i salute you sir bhaghat singh g main bhaghat singh ka bhut aadar karta ho agar mujhe bhi moka mile to m bhi apni jindgi is desh k liye jaan bhi de dunga i slute mr.bhaghat singh G lagta h aapko phir aana padega inqulab …… zindabad……….

sandhu के द्वारा
June 9, 2014

i am proud to be sikh love u sardar bhagat singh sandhu

Kinu के द्वारा
June 2, 2014

Bhagat Singh you are like a one man army

satyanand kushawaha के द्वारा
June 1, 2014

Bhagat singh ko mera sat sat pranam.Bhagat singh ka jivani hamare desh karono desh premiyo ke dilo ko jhu jata hai .agar enake jaisa mujhu bhi karane mauka mila to mai apane ap ko bhahut hi bhagyasali samajhunga.

Akshay Singh के द्वारा
May 29, 2014

inqlab zindabad jai hind jai Bharat we miss u sir bhagat Singh g

sahil के द्वारा
May 1, 2014

बकवास है जिसने कक

    gaurav yadav के द्वारा
    June 3, 2014

    vandhe ma trem aaj ak baghat ke jaruat h kyoke aaj bhaut bharastchar ho gaya h

Lalit Soni के द्वारा
March 25, 2014

मेरे अज्जिज भगत सिंह हमें फिर से तुम्हारी जरुरत है अब इन भरष्ट चारियो को सबक सीखना है

Lalit Soni के द्वारा
March 25, 2014

जिस अंग्रेजी कॉम ने हमारे देश के वीर भगत सिंह को समय से पहले ही फांशी दे दी और उनका शव उनके परिवार को नहीं दिया आज हम उन्ही अंग्रेजो का अपने देश में आने पर स्वागत करते है उनके साथ घूमते है क्या ये सही है

    RAJ के द्वारा
    June 30, 2014

    TIME BDL GYA H FRND AAJ TUM BI UNKE DESH MEIN JATE HO KYA YE SHI H

shubham jadal के द्वारा
February 21, 2014

ab mujhe lagata hai ki, is bharat desh ko bhrshtachar se dur karne ke liye fir bhagatsingh janm lena padhata hai. bhagatsingh ka ek vaky hamare dil me lage ” mera dharm aour mera dev sirf bharat mata hai. mai is bharat ka ek rakshak hai. mera jivan sirf he bharat desh ke liye.” – “inklab jindabad”

manish maharishi के द्वारा
January 3, 2014

I miss u sir mera bhi khun kholta h main bhi bhagt singh jasa banana chahta hu unko mera salam

Kaushal pratap Singh के द्वारा
December 20, 2013

main aapko sat sat naman karta hu. aaj hamare desh ko fir se bhagat dingh ki jarurat hai khud fasi par chadne ke liye nahi balki desh ke dushmano ko fansi par latkane ke liye. jai hind jai bharat

sourabh के द्वारा
December 14, 2013

you are a real commando

vrinder singh के द्वारा
November 20, 2013

aap hmm sab ke dil me jinda rahoge hmm sab ko ap par proud hai ap ne ek indian ban kar hamare des ko aajad karwaya aaj kal sab apne liye jeete hai koi hindu hai koi sikh hai toh koi musalmaan par ap ne sirf bhart ko aajad karwaya kaas ap jaise soch har kisi ke dil me ho aur hamara bharat ek sath mil kar phir se is jatibaad nd kuch crupted logon se phir se ajad ho jaye

aman के द्वारा
September 24, 2013

bhagat singh is a MAn That Looks Like as God

anil के द्वारा
September 23, 2013

shame on u……

    anil के द्वारा
    September 23, 2013

    he is a real king of this world and also shame on us…. what we are doing now…..sach me bahot dukh hota hoga….is sher ko…jannat mein…

labh singh jangra के द्वारा
September 14, 2013

dear bhagat singh i want to become like you.

labh singh jangra के द्वारा
September 14, 2013

bhagat singh you are live in my heart.

Ravindra Yadav के द्वारा
August 15, 2013

Shaheed Bhagat Singh Ji.. Aapne jo desh ke liye balidan diya h wo hmm kabhi nhi bhula payenge aur hamm aapko hmesha Apni yaddo me jinda rkhenge..m abhi 22 saal ka hu lekin m aapke bare me apne bete aur unke beto ke bhi aapki gouravmyi aur atihassik balidani ki gatha sunana chahunga aapke bare me sbb btana chahunga aap mere Aadrash ho….. Aur m jbb tak jinda hu aapko Amar rkhunga…… aap desh ke kohinoor the ,,ho..aur rhoge….Inqlab jindabad samrajyavad ka naash ho…jai hind jai bharat.

anurag tomar के द्वारा
August 12, 2013

व्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

savindra kumar के द्वारा
July 24, 2013

If in my whole life i ever get a chance to go in past then the first man i want to meet with will be BHAGHAT SINGH JI. INQLAB ZINDABAD……….

bhanu के द्वारा
July 23, 2013

desh ko garv h. bhagat singh ji pr, ese beta sayad hi ab kabhi peda ho. jo itne time bhuke rah kr angrejo ki mr kha kr zinda rahe. jay hind

rahul के द्वारा
June 27, 2013

thanx for supporting me wth ur favoulable wrds in mah rjct thnxxx a lot .!

jaydip gadhavi के द्वारा
June 26, 2013

Jindgi me apna hi mat socho…. kuch desh ko bhi arpit karo..

jaydip gadhavi के द्वारा
June 26, 2013

Bharat mata ki jay……

ammu khan के द्वारा
May 21, 2013

thxs guys u help me so much

kushal vidya के द्वारा
May 10, 2013

VERY MUCH ???????????????

kushal vidya के द्वारा
May 10, 2013

it is very funney

SUKHDEO HARJIRAM DOOKIA के द्वारा
May 4, 2013

उन्होंनें शादी से मना करने वाले परिवार को भेजे खत में लिखा था कि उनका जन्म भारत माता को आजादी दिलाने के लिये हुआ है। वह जब तक गुलामी की जंजीर से मुक्त नहीं होते वह किसी और जंजीर में नहीं बंध सकते।

Rachit के द्वारा
January 12, 2013

it’s very nice thank uuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu very much!!!!!!!!!!!

Himangshu Saikia के द्वारा
December 29, 2012

a good article, and gave me a lot info. for my autumn break assignment

rajkumar pande के द्वारा
September 28, 2012

conform the birth date of Saheede-a-aajam BHAGAT SINGH

Manoj के द्वारा
August 23, 2012

मैं शहीद भगत सिंह की अमर कहानी पड़कर एकदम क्रोधित हु चूका हु और मेरा भी ऐसा मन कर रहा है की मैं भी कुछ ऐसा करू जो की भगत सिंह ने किया था भारत माता की जय

mansi sondhi के द्वारा
November 7, 2011

मुझे ये अपने हिंदी के काम के लिए चईय था और मुझे ये बहुत आचा लगा . आशा करती हूँ कि मुझे इसमें एक्स्सल्लेंट मिले . धन्यवाद् बहुत जादा .

vikaskumar के द्वारा
September 29, 2011

आज के युवाओं को भगत सिंह से प्रेणना लेकर अपने जीवन का कुछ समय देश के नाम करना चहिए.

    Amit Sharma के द्वारा
    September 30, 2011

    जीवन का कुछ समय देश के नाम नहि हम को जीना ही देश के लिय चहिए.

    LAXMAN SINGH के द्वारा
    December 3, 2013

    AAJ MERE DISH KO MERI JARURAT BHI PADI TO TAYAR HU AGAR AK BAR DISH MERI JAN MAGIGA TO M TAYAR HU AK BAR NAHEE HAJARO BAR JAY HANDUSTAN……

    archama sharma के द्वारा
    January 10, 2014

    बहुत अचा 

    jitendra के द्वारा
    January 16, 2014

    हमे अपने देश कि सेवा करनी चाहिए और मातृ भूमि को सलाम है कि यहाँ पर येशे वीर जवान है BHARAT MATA KI JAY

    jitendra के द्वारा
    January 16, 2014

    हमे अपने देश कि सेवा करनी चाहिए और मातृ भूमि को सलाम है कि यहाँ पर येशे वीर जवान है BHARAT MATA KI जय HO




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