blogid : 3738 postid : 282

फाल्गुनी पाठक : गरबा क्वीन

Posted On: 13 Mar, 2011 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अपनी धरती और अपनी संस्कृति से सबको प्यार होता है लेकिन विरले ही होते हैं जो अपनी संस्कृति को ही अपने प्रोफेशन में उतारते हैं. और जो ऐसा करने में सफल होते हैं वह ना सिर्फ बहुत ही किस्मत वाले होते हैं बल्कि उनमें अपनी संस्कृति को बचाकर रखने की ललक होती है. भारतीय संगीत में ऐसी कई फनकार है जो क्षेत्रीय और लोक संस्कृति के बल पर अपने गायन को आगे बढ़ा रही हैं. फाल्गुनी पाठक भी उनमें से ही हैं जिन्होंने अपने लोक गायन की गूंज को दुनिया भर में फैला कर आज इतनी प्रसिद्धी हासिल की जिसकी कोई सोच भी नहीं सकता.


फाल्गुनी पाठक का जन्म 12 मार्च 1964 को हुआ था.मुंबई में रहने के बावजूद राजस्थानी कला और संगीत से प्रेरित होकर उन्होंने अपने संगीत की थीम गरबा रखी और निकल पड़ी राह पर. उनके गीतों से साथ गरबा की धुन सोने पर सुहागे का काम करती है.


1988 में अपने प्रोफेशनल कैरियर की शुरुआत करने वाली फाल्गुनी पाठक का पहला ही एलबम बहुत हिट हो गया था. याद पिया की आई के नाम से आया यह एलबम दर्शकों को ना सिर्फ नाचने पर मजबूर करता था बल्कि गीत का संगीत रुह को छू जाता था.


फाल्गुनी पाठक को इस एलबम के बाद कई ऑफर मिले खासकर प्रेमगीत गाने के लिए. उन्होंने हर मौके को सही से भुनाया और गुजराती रस में डुबाकर कई गीतों को आम जनता के दिलों में बसा दिया.


आज भी फाल्गुनी पाठक का पहला प्यार गुजरात और गुजराती गरबा ही है. उनका हर गीत गरबे पर नाचने पर मजबूर करता है. नवरात्र आते ही उनके शो की डिमांड एकदम से बढ़ जाती है.



Tags:                               

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (6 votes, average: 3.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Hawk के द्वारा
June 11, 2016

Son of a gun, this is so helupfl!


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran