चाचा नेहरु – दूरदर्शिता और गंभीरता के परिचायक

Posted On: 10 Mar, 2011 Others,Special Days में

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भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने कड़ी मेहनत के बाद भारत को आजाद करवाया. आजादी की कड़ी लड़ाई के बाद स्वतंत्र भारत को संभालना भी एक जंग से कम न था. आजादी के बाद विभाजन की आंधी से लड़ने के लिए काफी मशक्कत की जरुरत थी, और इस दौर में भी भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने हार न मानते हुए सरकार संभालने में अहम भूमिका निभाई. ऐसे ही नेताओं में सर्वश्रेष्ठ थे पंडित जवाहरलाल नेहरु. स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और एक अहम स्वतंत्रता सेनानी थे पंडित जवाहरलाल नेहरु (Jawaharlal Nehru).


Pandit Jawahar Lal Nehruपंडित जवाहर लाल  नेहरु (Jawaharlal Nehru) का जन्म 14 नवंबर 1889 को  उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था. जवाहर लाल नेहरु के पिता मोतीलाल नेहरु एक धनाढ़्य वकील थे.

उनकी मां का नाम स्वरुप रानी नेहरू था. वह मोतीलाल नेहरू के इकलौते पुत्र थे. इनके अलावा मोती लाल नेहरू की तीन पुत्रियां थीं. उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं.


Read: क्या है एडविना-नेहरू के प्रेम का सच !!


Nehru_familyजवाहरलाल नेहरु (Jawaharlal Nehru) का बचपन बेहद आराम से बीता. उच्च स्कूलों और कॉलेजों से शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी वह हमेशा जमीन से जुड़े रहें.  उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हैरो से, और कॉलेज की शिक्षा ट्रिनिटी कॉलेज, लंदन से पूरी की थी. इसके बाद उन्होंने अपनी लॉ की डिग्री कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पूरी की थी. नेहरु जी का परिवार उनकी पढ़ाई को बेहद गंभीरता से लेता था और उच्च शिक्षा पर जोर देता था.


जवाहरलाल नेहरू 1912 में भारत लौटे और वकालत शुरू की. मार्च 1916 में नेहरू का विवाह कमला कौल के साथ हुआ, जो दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार की थीं. उनकी अकेली संतान इंदिरा प्रियदर्शिनी का जन्म 1917 में हुआ. बाद में वह भारत की प्रधानमंत्री बनीं.


with_gandhijiवकालत में उनकी विशेष रूचि न थी और शीघ्र ही वे भारतीय राजनीति में भाग लेने लगे. 1912 ई. में उन्होंने बांकीपुर (बिहार) में होने वाले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया. गांधी ने भी युवा जवाहरलाल नेहरू में भारत का भविष्य देखा और उन्हें आगे बढने के लिए प्रेरित किया.


Read: बच्चों के चाचा नेहरू : बाल दिवस पर विशेष


जवाहर लाल नेहरु को 1929 में कांग्रेस के ऐतिहासिक लाहौर अधिवेशन का अध्यक्ष चुने गया था. उन्होंने इस अधिवेशन में भारत के राजनीतिक लक्ष्य के रूप में संपूर्ण स्वराज्य की घोषणा की.


जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) ने 1920-1922 में असहयोग आंदोलन में सक्रिय हिस्सा लिया और इस दौरान पहली बार गिरफ्तार किए गए. कुछ महीनों के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.


आजादी की लड़ाई के 24 वर्ष में जवाहरलाल नेहरु जी को आठ बार बंदी बनाया गया, जिनमें से अंतिम और सबसे लंबा बंदीकाल, लगभग तीन वर्ष का कारावास जून 1945 में समाप्त हुआ. नेहरू ने कुल मिलाकर नौ वर्ष से ज़्यादा समय जेलों में बिताया. अपने स्वभाव के अनुरूप ही उन्होंने अपनी जेल-यात्राओं को असामान्य राजनीतिक गतिविधि वाले जीवन के अंतरालों के रूप में वर्णित किया है.


नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए 1936, 1937 और 1946 में चुने गए थे. उन्हें 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गिरफ्तार भी किया गया और 1945 में छोड दिया गया. 1947 में भारत और पाकिस्तान की आजादी के समय उन्होंने अंग्रेजी सरकार के साथ हुई वार्ताओं में महत्वपूर्ण भागीदारी की.


1947 में आजादी के बाद उन्हें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री का पद दिया गया. अंग्रेजों ने करीब 500 देशी रियासतों को एक साथ स्वतंत्र किया था और उस वक्त सबसे बडी चुनौती थी उन्हें एक झंडे के नीचे लाना. उन्होंने भारत के पुनर्गठन के रास्ते में उभरी हर चुनौती का समझदारी पूर्वक सामना किया. जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. उन्होंने योजना आयोग का गठन किया, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहित किया और तीन लगातार पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया. उनकी नीतियों के कारण देश में कृषि और उद्योग का एक नया युग शुरु हुआ. नेहरू ने भारत की विदेश नीति के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई.


Read: सुलझे हुए व्यक्ति थे पं. नेहरु


हालांकि नेहरु जी का जीवन कई बार अपेक्षाओं और कई कारणों से विवादों में रहा. कई लोगों का कहना था कि नेहरू ने अन्य नेताओं की तुलना में भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में बहुत कम योगदान दिया था. फिर भी गांधीजी ने उन्हे भारत का प्रथम प्रधान मंत्री बना दिया। इसके साथ ही लेडी माउंटबेटन के साथ उनकी नजदीकियों को भी इतिहासकारों ने विवादित माना. इसी के साथ लोग कश्मीर की हालिया समस्या को लोग जवाहरलाल नेहरु की ही गलती मानते हैं और चीन द्वारा भारत पर आक्रमण पर उनके रवैये का भी लोगों ने खासा विरोध किया. चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने के बावजूद नेहरु जी ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिये चीन का समर्थन किया. कई लोग नेहरु जी पर यह भी आरोप लगाते है कि उन्होंने सुभाष चन्द्र बोस की मृत्यु के बाद उनका पता लगाने के लिए कोई खास कदम नहीं उठाया.


जवाहरलाल नेहरु जी बच्चों से बहुत प्रेम करते थे. इसीलिए जवाहरलाल नेहरु जी को बच्चे प्यार से चाचा नेहरु कह कर पुकारते थे और जवाहरलाल नेहरु जी के जन्मदिन को लोग बाल दिवस के रुप में मनाते हैं.


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जब जवाहरलाल नेहरू को उधार के पैसों पर अपना खर्च उठाना पड़ा

कमरे के लिए एक पंखा नहीं खरीद सके नेहरू




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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Daisy के द्वारा
June 9, 2016

Four score and seven minutes ago, I read a sweet arlitce. Lol thanks

    Twiggy के द्वारा
    June 11, 2016

    Hot damn, lonoikg pretty useful buddy.

bani bakshi के द्वारा
June 28, 2014

Hindi mai puryavarnam hota hai ke fullstop.

VIVEK के द्वारा
March 24, 2014

NEHRU DOGLA KISM KE INSAAN THA SALA…EK LADKI KE KARAN SALA HINDUSTAN & PAKISTAN KA VIBHAJAN KARVAYA…

upendra kumar के द्वारा
December 15, 2013

chacha nehru jee ka bahpna bhut ke aai aaram se beeta tha, phir bhi wo aajade ke ladai me hissa liya wo hamare desh ke yadgar neta hai

harshal patil के द्वारा
December 11, 2013

मराठी

    Finch के द्वारा
    June 10, 2016

    dit :Chocolat dit :Bah elle a cesser de se bttare de9s la mort de sa soeur mais, celle-ci e9tant revenue, on ne sait pas trop ce qu’il va en ressortir. Elle manque de puissance, preuve lors du combat contre Azuma. Il n’est donc pas impossible qu’elle retourne e0 l&neeuo;entraeensmqrt comme tout le monde pour justement, mieux prote9ger ses amis *-*

sameer gupta के द्वारा
November 14, 2013

mai nehru ka faan hu.mai bhi india ke liye kuch karna chata hai.lakin bharat ki halat din par din buri hoti ja rahi hai.happy birthday

    Darold के द्वारा
    June 11, 2016

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vaibhav के द्वारा
May 29, 2012

i ve not read it but from lookin its like correct i ve to do holidays homework

munish के द्वारा
March 10, 2011

आपने बिलकुल ठीक लिखा है, दूरदर्शिता तो दिखाई ही दे रही है कश्मीर के रूप में, और गंभीरता अडविना माउंटबैटन के रूप में.

    vinod के द्वारा
    January 16, 2012

    आप क्यों उस सिरफिरे को सर चदा रहे है.जागरण कर रहे है या अंधकार..धिक्कार है..| सत्ता के भूखे,देश के विभाजन और संसार को पाकिस्तान जैसा देश देने वाला,कश्मीर को भट्टी बनाने वाला,चरित्रहीन.चीन के सन्दर्भ में गद्दार,और भी न जाने क्या क्या गिनाऊ.और आप उसे चाचा कहते है,कांग्रेस में फूट (क्योकि वो लोह-पुरुष सरदार पटेल को प.म. बनाना चाहती थी )डालकर (ताकि अंग्रेज भारत से न जा पाए ) की धमकी देकर गाँधी जी को ब्लेकमेल किया और (फिर गांधीजी ने पटेल को कहा तू मंजा,और पटेल ने कहा में तो आपका सेवक हु ) फिर वो प.म. बना.ये तो देश का दुर्भाग्य है की अंग्रेजी नश्ल हिन्दू खून में जन्म के देश को खा गयी ..इसका गाँधी जी के लेखो में प्रमाण भी है.आप क्यों गलत लिख के देश को भर्मित कर रहे है..मैंने जहा से ये पड़ा..क्यों नहीं आप भी ऐसा लिखते |भगवन आपको सद्बुदी दे…ताकि देश को हकिक़त्बताये ,मिथ्या नहीं |मेरा पोस्ट डिलीट मत करना ..क्योकि में आपका काम कर रहा हु|-देश हित में -एक नागरिक जय हिंद !




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