Best Web Blogs    English News

facebook connectrss-feed

Special Days

व्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

1,045 Posts

1165 comments

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती विशेष

पोस्टेड ओन: 23 Jan, 2011 जनरल डब्बा में

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, आजाद हिन्द फौज के संस्थापक और जय हिन्द का नारा देने वाले सुभाष चन्द्र बोस जी की आज जयंती है. 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा के कटक नामक नगरी में सुभाष चन्द्र बोस का जन्म हुआ था. अपनी विशिष्टता तथा अपने व्यक्तित्व एवं उपलब्धियों की वजह से सुभाष चन्द्र बोस भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं.


netaji-subhash-chandra-boseस्वाधीनता संग्राम के अन्तिम पच्चीस वर्षों के दौरान उनकी भूमिका एक सामाजिक क्रांतिकारी की रही और वे एक अद्वितीय राजनीतिक योद्धा के रूप में उभर के सामने आए. सुभाष चन्द्र बोस का जन्म उस समय हुआ जब भारत में अहिंसा और असहयोग आन्दोलन अपनी प्रारम्भिक अवस्था में थे. इन आंदोलनों से प्रभावित होकर उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई. पेशे से बाल चिकित्सक डॉ बोस ने नेताजी की राजनीतिक और वैचारिक विरासत के संरक्षण के लिए नेताजी रिसर्च ब्यूरो की स्थापना की. नेताजी का योगदान और प्रभाव इतना बडा था कि कहा जाता हैं कि अगर आजादी के समय नेताजी भारत में उपस्थित रहते, तो शायद भारत एक संघ राष्ट्र बना रहता और भारत का विभाजन न होता.


शुरुआत में तो नेताजी की देशसेवा करने की बहुत मंशा थी पर अपने परिवार की वजह से उन्होंने विदेश जाना स्वीकार किया. पिता के आदेश का पालन करते हुए वे 15 सितम्बर 1919 को लंदन गए और वहां कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में अध्ययन करने लगे. वहां से उन्होंने आई.सी.एस. की परीक्षा उत्तीर्ण की और योग्यता सूची में चौथा स्थान प्राप्त किया. पर देश की सेवा करने का मन बना चुके नेताजी ने आई.सी.एस. से त्याग पत्र दे दिया.


Read: Mahatma Gandhi’s Life Story


भारत आकर वे देशबंधु चितरंजन दास के सम्पर्क में आए और उन्होंने उनको अपना गुरु मान लिया और कूद पड़े देश को आजाद कराने. चितरंजन दास के साथ उन्होंने कई अहम कार्य किए जिनकी चर्चा इतिहास का एक अहम हिस्सा बन चुकी है. स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सुभाष चन्द्र बोस की सराहना हर तरफ हुई. देखते ही देखते वह एक महत्वपूर्ण युवा नेता बन गए. पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ सुभाषबाबू ने कांग्रेस के अंतर्गत युवकों की इंडिपेंडेंस लीग शुरू की.


लेकिन बोस के गर्म और तीखे तेवरों को कांग्रेस का नरम व्यवहार ज्यादा पसंद नहीं आया. उन्होंने 29 अप्रैल 1939 को कलकत्ता में हुई कांग्रेस की बैठक में अपना त्याग पत्र दे दिया और 3 मई 1939 को सुभाषचन्द्र बोस ने कलकत्ता में फॉरवर्ड ब्लाक अर्थात अग्रगामी दल की स्थापना की. सितम्बर 1939 में द्वितीय विश्व युद्व प्रांरभ हुआ. ब्रिटिश सरकार ने सुभाष के युद्ध विरोधी आन्दोलन से भयभीत होकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. सन् 1940 में सुभाष को अंग्रेज सरकार ने उनके घर पर ही नजरबंद कर रखा था. नेताजी अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए सबको छकाते हुए घर से भाग निकले.


Read: अगर गांधी चाहते तो बच सकते थे


नेताजी ने एक मुसलमान मौलवी का वेष बनाकर पेशावर अफगानिस्तान होते हुए बर्लिग तक का सफर तय किया. बर्लिन में जर्मनी के तत्कालीन तानाशाह हिटलर से मुलाकात की और भारत को स्वतंत्र कराने के लिए जर्मनी व जापान से सहायता मांगी. जर्मनी में भारतीय स्वतंत्रता संगठन और आजाद हिंद रेडियो की स्थापना की. इसी दौरान सुभाषबाबू, नेताजी नाम से जाने जाने लगे. पर जर्मनी भारत से बहुत दूर था. इसलिए 3 जून 1943 को उन्होंने पनडुब्बी से जापान के लिए प्रस्थान किया. पूर्व एशिया और जापान पहुंच कर उन्होंने आजाद हिन्द फौज का विस्तार करना शुरु किया. पूर्व एशिया में नेताजी ने अनेक भाषण करके वहाँ स्थानीय भारतीय लोगों से आज़ाद हिन्द फौज में भरती होने का और आर्थिक मदद करने का आह्वान किया. उन्होंने अपने आह्वान में संदेश दिया “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूँगा.


द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान आज़ाद हिन्द फौज ने जापानी सेना के सहयोग से भारत पर आक्रमण किया. अपनी फौज को प्रेरित करने के लिए नेताजी ने दिल्ली चलो का नारा दिया. दोनों फौजों ने अंग्रेजों से अंडमान और निकोबार द्वीप जीत लिए पर अंत में अंग्रेजों का पलड़ा भारी पड़ा और आजाद हिन्द फौज को पीछे हटना पड़ा.


6 जुलाई, 1944 को आजाद हिंद रेडियो पर अपने भाषण के माध्यम से गाँधीजी से बात करते हुए, नेताजी ने जापान से सहायता लेने का अपना कारण और आज़ाद हिन्द फौज की स्थापना के उद्देश्य के बारे में बताया. इस भाषण के दौरान, नेताजी ने गांधीजी को राष्ट्रपिता बुलाकर अपनी जंग के लिए उनका आशिर्वाद मांगा. इस प्रकार, नेताजी ने गांधीजी को सर्वप्रथम राष्ट्रपिता बुलाया.


द्वितीय विश्वयुद्ध में जापान की हार के बाद नेताजी को नया रास्ता ढूँढना जरूरी था. उन्होने रूस से सहायता माँगने का निश्चय किया था. 18 अगस्त, 1945 को नेताजी हवाई जहाज से मंचूरिया की तरफ जा रहे थे. इस सफर के दौरान वे लापता हो गए. इस दिन के बाद वे कभी किसी को दिखाई नहीं दिए. 23 अगस्त, 1945 को जापान की दोमेई खबर संस्था ने दुनिया को खबर दी कि 18 अगस्त के दिन नेताजी का हवाई जहाज ताइवान की भूमि पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उस दुर्घटना में बुरी तरह से घायल होकर नेताजी ने अस्पताल में अंतिम साँस ले ली थी.


फिर नेताजी की अस्थियाँ जापान की राजधानी तोकियो में रेनकोजी नामक बौद्ध मंदिर में रखी गयीं. स्वतंत्रता के पश्चात, भारत सरकार ने इस घटना की जाँच करने के लिए, 1956 और 1977 में दो बार आयोग गठित किया. दोनों बार यह नतीजा निकला कि नेताजी उस विमान दुर्घटना में ही मारे गए थे. मगर समय-समय पर उनकी मौत को लेकर बहुत सी आंशकाएं जताई जाती रही हैं. भारत के सबसे बड़े स्वतंत्रता सेनानी और इतने बड़े नायक की मृत्यु के बारे में आज तक रहस्य बना हुआ है जो देश की सरकार के लिए एक शर्म की बात है.


नेताजी ने उग्रधारा और क्रांतिकारी स्वभाव में लड़ते हुए देश को आजाद कराने का सपना देखा था. अगर उन्हें भारतीय नेताओं का भी भरपूर सहयोग मिला होता तो देश की तस्वीर यकीकन आज कुछ अलग होती. नेताजी सुभाष चन्द बोस को हमारी तरफ से भावभीनी श्रद्धांजलि.


Also Read:

Full Life Story of Bhagat Singh in Hindi

भारत के महान क्रांतिकारियों की दास्तां

एक देशभक्त हिन्दी शायर





Tags: netaji subash chandra boss   Subash   Netaji   Boss   नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जयंती विशेष   Netaji Subhash Chandra Bose   सुभाष चन्द बोस   Netaji Subash Chandra Bose Profile in Hindi   नेताजी सुभाष चन्द बोस  

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (181 votes, average: 4.40 out of 5)
Loading ... Loading ...

19 प्रतिक्रिया

  • Share this pageFacebook0Google+0Twitter0LinkedIn1
  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

upendra kumar के द्वारा
February 8, 2014

mujhe subashchandra boss jaisa aadme ke soch bahut achhe lagte hai mai chahta hoo ke subashchandra boss jaisa aadme kya ab bharat me dosra nahi paida ho ksta hai kya????????

VINOD ARYA के द्वारा
January 22, 2014

मेरे गुरु नेताजी सुभाष चन्द्र बॉस जी को बारम्बार नमन् , बॉस जी की छवि ही हमें जीने का मकसद सिखाती है

HARISH के द्वारा
January 6, 2014

Aaj BAHART ko fir se ek NETA JI SUBHASH CHANDER BOSS ki jrurt h, maine bhut logo se pucha ki kya BHARAT azad h to khte h han bt jb unse pucha jata h ki azad ka mtlb kya hota h to kisi ke pass koi jwab nhi hota, dosto BHARAT aaj only docoment m azad h, kya ye azad h ki hmare hi sainiko ki hmare hi desh se seer ko utar liya jata h , kya ye azadi h ki ek grib ke upr atyachar hote rhe, Aaj bhi hmara desh in poltics or amir logo ka gulam h, hmme realty m poltics ke against bolne ka kuch bhi right nhi h kyonki inn logo ko bhi hmne hi select kiya hua h aao dosto milkar ek Azad BHARAT ka nirman kre. NETAJI SUBHASH CHANDER BOSS ka bhi yhi sapna tha harishbansalca1993@gmail.com

akshat [patratu] के द्वारा
January 6, 2013

WE ARE RESPONSIBLE FOR THE CONDITION OF INDIA

akshat [patratu] के द्वारा
January 6, 2013

atcha hua ki Netaji nahi rahe kuinki agar we rahete to sayad aaj sawam saram aur jilat ke ansu pi kar sadme se mar jate kunki aaj sabhi sawarthi aur lobhi ban gayan hai .ALL ARE SO selfish because we are buisy with ownself,we need unity so, thanks ,iam not any politician I am student of KvPATRATU

    happy के द्वारा
    January 6, 2013

    you are write we are with u

    AKSHAT के द्वारा
    January 6, 2013

    I am sorry if i was written wrong ,but its true

    rchana kataria के द्वारा
    January 11, 2014

    हमे तुम जैसो पर गवॆ है

    hullqwe के द्वारा
    June 12, 2014

    पर. मै ने तो कुच ौ

Rahul mandal के द्वारा
August 16, 2012

yeh hamara durbhagya tha ki netaji ki azadi se purv mrityu ho gayi . nahi toh bharat ke tukde nahi hote. subhash ek sacche desh bhakt the.. aaj desh pakhandiyon ko pujta hai. subhash ki jagah hamesha hamare dil main rahegi. ek sache hero ki tarah.. JAI HIND

ayush agarwal के द्वारा
July 15, 2012

आप लोगो के द्वारा ही हम लोग अपने महापुरुषों के जीवन के बारे में जानकारी पते है ,जिन्होंने हमरी आजादी के लिये अपना जीवन हँसते हँसते बलिदान कर दिया ,इन महापुरुसो को सत सत नमन

ayush agarwal के द्वारा
July 15, 2012

“तुम मुझे जायदाद दो, मैं तुम्हे मिट्टी दूँगा.”  18 अगस्त, 1945 को नेताजी हवाई जहाज के ऊपर बैठकर मंचूरियन की तरफ जा रहे थे

namami के द्वारा
June 25, 2012

wow!what a wonderful photo

vikas के द्वारा
April 25, 2012

नगकोे

Neeraj Nikhra के द्वारा
January 25, 2011

एकदम सही लिखा है आपने ! neerajnikhra.jagranjunction.com

शिवेंद्र मोहन सिंह के द्वारा
January 23, 2011

शायद हम भारत वासियों का दुर्भाग्य था, जो हमें नेता जी से वंचित होना पड़ा. शुक्रिया लेख के लिए और याद दिलाने के लिए भी.

    Bipin Chandra Upadhyay के द्वारा
    January 24, 2011

    नेताजी सुभाष चन्द बोस को हमारी तरफ से भावभीनी श्रद्धांजलि.

    pradeep shrivastava के द्वारा
    January 23, 2012

    आप लोगो के द्वारा ही हम लोग अपने महापुरुषों के जीवन के बारे में जानकारी पते है ,जिन्होंने हमरी आजादी के लिये अपना जीवन हँसते हँसते बलिदान कर दिया ,इन महापुरुसो को सत सत नमन

    priti के द्वारा
    October 4, 2012

    mein proud feel krti hu subhash chander bose ji ko lekr




अन्य ब्लॉग

  • ज्यादा चर्चित
  • ज्यादा पठित
  • अधि मूल्यित