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Special Days

व्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

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महत्वपूर्ण दिवस


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छ्ठ पर्व के लिए क्या हैं कड़े नियम

Posted On: 27 Oct, 2014  
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जनरल डब्बा में

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क्यों मनाते हैं छठ महापर्व

Posted On: 27 Oct, 2014  
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जनरल डब्बा में

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धनतेरस : चलो कर लें कुछ खरीददारी

Posted On: 21 Oct, 2014  
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जनरल डब्बा में

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जब गांधी को करना पड़ा अपने उसूलों से समझौता

Posted On: 2 Oct, 2014  
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जनरल डब्बा में

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नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के प्रथम दिन को शैलपुत्री नामक देवी की आराधना की जाती है. पुराणों में यह कथा प्रसिद्ध है कि हिमालय के तप से प्रसन्न होकर आद्या शक्ति उनके यहां पुत्री के रूप में अवतरित हुई और इनके पूजन के साथ नवरात्र का शुभारंभ होता है. Read: MATA SHAILPUTRI दूसरे दिन: ब्रह्मचारिणी भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए पार्वती की कठिन तपस्या से तीनों लोक उनके समक्ष नतमस्तक हो गए. देवी का यह रूप तपस्या के तेज से ज्योतिर्मय है. इनके दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला तथा बाएं में कमंडल है. तीसरे दिन: चंद्रघंटा यह देवी का उग्र रूप है. इनके घंटे की ध्वनि सुनकर विनाशकारी शक्तियां तत्काल पलायन कर जाती हैं. व्याघ्र पर विराजमान और अनेक अस्त्रों से सुसज्जित मां चंद्रघंटा भक्त की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहती हैं. चौथे दिन: कूष्मांडा नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के चौथे दिन भगवती के इस अति विशिष्ट स्वरूप की आराधना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इनकी हंसी से ही ब्रह्माण्ड उत्पन्न हुआ था. अष्टभुजी माता कूष्मांडा के हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत-कलश, चक्र तथा गदा है. इनके आठवें हाथ में मनोवांछित फल देने वाली जपमाला है. पांचवे दिन: स्कंदमाता नवरात्र पर्व (Navratri Festival) की पंचमी तिथि को भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है. देवी के एक पुत्र कुमार कार्तिकेय (स्कंद) हैं, जिन्हें देवासुर-संग्राम में देवताओं का सेनापति बनाया गया था. इस रूप में देवी अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए बैठी होती हैं. स्कंदमाता अपने भक्तों को शौर्य प्रदान करती हैं. छठे दिन: कात्यायनी कात्यायन ऋषि की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवती उनके यहां पुत्री के रूप में प्रकट हुई और कात्यायनी कहलाई. कात्यायनी का अवतरण महिषासुर वध के लिए हुआ था. यह देवी अमोघ फलदायिनी हैं. भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने देवी कात्यायनी की आराधना की थी. जिन लडकियों की शादी न हो रही हो या उसमें बाधा आ रही हो, वे कात्यायनी माता की उपासना करें. सातवें दिन: कालरात्रि नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के सातवें दिन सप्तमी को कालरात्रि की आराधना का विधान है. यह भगवती का विकराल रूप है. गर्दभ (गदहे) पर आरूढ़ यह देवी अपने हाथों में लोहे का कांटा तथा खड्ग (कटार) भी लिए हुए हैं. इनके भयानक स्वरूप को देखकर विध्वंसक शक्तियां पलायन कर जाती हैं. आठवें दिन: महागौरी नवरात्र पर्व (Navratri Festival) की अष्टमी को महागौरी की आराधना का विधान है. यह भगवती का सौम्य रूप है. यह चतुर्भुजी माता वृषभ पर विराजमान हैं. इनके दो हाथों में त्रिशूल और डमरू है. अन्य दो हाथों द्वारा वर और अभय दान प्रदान कर रही हैं. भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए भवानी ने अति कठोर तपस्या की, तब उनका रंग काला पड गया था. तब शिव जी ने गंगाजल द्वारा इनका अभिषेक किया तो यह गौरवर्ण की हो गई. इसीलिए इन्हें गौरी कहा जाता है. नौवे दिन : सिद्धिदात्री नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के अंतिम दिन नवमी को भगवती के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है. इनकी अनुकंपा से ही समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं. अन्य देवी-देवता भी मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति की कामना से इनकी आराधना करते हैं. मां सिद्धिदात्री चतुर्भुजी हैं. अपनी चारों भुजाओं में वे शंख, चक्र, गदा और पद्म (कमल) धारण किए हुए हैं. कुछ धर्मग्रंथों में इनका वाहन सिंह बताया गया है, परंतु माता अपने लोक प्रचलित रूप में कमल पर बैठी (पद्मासना) दिखाई देती हैं. सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है.

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गांधीजी के अनुसार असल भारत ग्रामो मे रहता है भारत के ग्राम और ग्रामीण जनजीवन मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों और कहानियो मे रहता है मुंशी प्रेमचंद ने इन्सनियत के मर्म को अपनी अंतरात्मा में जिया है महसूस किया है उनकी कहानिया और उपन्यास आज भी प्रासंगिक है जमीदारी साहूकारी जातिवादी अत्याचारों को उन्होंने सजीव प्रस्तुत किया है प्रेमचंद कहानियो और उपन्यासों मे आज भी जीवंत है मै प्रेमचंद की कहानियो और उपन्यासों को बार बार पढता रहता हूँ विशेषकर गर्मी की दोपहर मै कही गावों मै या खेत पर बैठकर पढने मै बहुत अच्छा लगता है उनके लिए यही कहा जा सकता है की चलो घाट घाट पे आगे जरा क्या रक्खा है आलमगिरी मै जो मजा आये फकीरी मै वो मस्ती कँहा अमीरी मै कवि नीरज और प्रेमचंद हिंदी साहित्य के पर्याय है

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સૌરાષ્ટ્ર વૃક્ષછેદન ધારા ૧૯૫૧ની જોગવાઇ મુજબ ખાનગી માલીકીની જમીન પરના વૃક્ષો, પંચાયતની ગૌચર જમીન અને બીજી સામુહિક માલીકીની જમીનો તથા પંચાયતને આપેલ જમીનો પર વૃક્ષો કાપવા માટે કરેલ જોગવાઈ મુજબ નીચે પ્રમાણેના ૨૬ જાતના વૃક્ષો કાપવા માટે સક્ષમ અધિકારી ( ૧ અનામત વૃક્ષો: નાયબ વન સંરક્ષક, ૨ ઈતર કે બીનાનામત વૃક્ષો: જે તે જીલ્લાના કલેકટર)ની પરવાનગીની જરૂરત રહે છે. ૧ સાગ ૨ ચંદન ૩ સીસમ 9 ૪ મહુડો ૫ ખેર ૬ ટીમરૂં ૭ શીમળો ૮ સાદડ ૯ કરંજ ૧૦ કણજી ૧૧ સવન ૧૨ બીયો ૧૩ રોહન ૧૪ એબોની ૧૫ કડાયો ૧૬ કલમ ૧૭ હળદરવો ૧૮ હરડે ૧૯ ધાવડો ૨૦ આંબો ૨૧ તાડ ૨૨ ખજુરી ૨૩ જાંબુ ૨૪ દેશી બાવળ ૨૫ લીમડો ૨૬ ખીજડો (નોંધ: સાગ, સીસમ, ચંદન, મહુડો અને ખેર આ પાંચ જાતના વૃક્ષો જમીન મહેસુલધારા અન્વયે અનામત વૃક્ષ તરીકે જાહેર કરવામાં આવેલા છે.) રીપોર્ટ: કૃણાલ બારૈયા પ્રમુખ, વન પ્રકૃતિ ચેરીટેબલ ટ્રસ્ટ, સાવરકુંડલા.

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Science Association, Shardabai Pawar Mahila Mahavidyalaya, Shardanagar, Malegaon (Baramati) Dist. Pune – 413115. --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------“Dr. APIS” SCIENCE LEAFLET --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------Objective: To Establish the Repository of Scientific Information For The Society. -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Every year, on 14 June, countries around the world celebrate World Blood Donor Day (WBDD). The event, established in 2004, serves to raise awareness of the need for safe blood and blood products and to thank blood donors for their voluntary life-saving gifts of blood. World Blood Donor Day is one of eight official global public health campaigns marked by the World Health Organization (WHO), along with World Health Day, World Tuberculosis Day, World Immunization Week, World Malaria Day, World No Tobacco Day, World Hepatitis Day, and World AIDS Day.[1] Transfusion of blood and blood products helps save millions of lives every year. It can help patients suffering from life-threatening conditions live longer and with higher quality of life, and supports complex medical and surgical procedures. It also has an essential, life-saving role in maternal and perinatal care. Access to safe and sufficient blood and blood products can help reduce rates of death and disability due to severe bleeding during delivery and after childbirth.[2] In many countries, there is not an adequate supply of safe blood, and blood services face the challenge of making sufficient blood available, while also ensuring its quality and safety. An adequate supply can only be assured through regular donations by voluntary unpaid blood donors. WHO’s goal is for all countries to obtain all their blood supplies from voluntary unpaid donors by 2020. In 2014, 60 countries have their national blood supplies based on 99-100% voluntary unpaid blood donations, with 73 countries still largely dependent on family donors and paid donors.[3] Themes of World Blood Donor Day campaigns 2014: Safe blood for saving mothers The focus of the WBDD 2014 campaign, marked on 14 June 2014, is “Safe blood for saving mothers”. The goal of the campaign is to increase awareness about why timely access to safe blood and blood products is essential for all countries as part of a comprehensive approach to prevent maternal deaths. The global host for the WBDD 2014 event is Sri Lanka. Through its national blood transfusion service, Sri Lanka has been promoting voluntary unpaid donation to increase access to safe and sufficient blood and blood products. 2013: Give the gift of life The focus for the WBDD 2013 campaign – the 10th anniversary of World Blood Donor Day – was blood donation as a gift that saves lives. WHO encourages all countries to highlight stories from people whose lives have been saved through blood donation, as a way of motivating regular blood donors to continue giving blood and people in good health who have never given blood, particularly young people, to begin doing so. The host country for World Blood Donor Day 2013 was France. Through its national blood service, the Etablissement Français du Sang (EFS), France has been promoting voluntary non remunerated blood donation since the 1950s. References: 1. World Health Organization, WHO campaigns. 2. World Health Organization, Safe blood for saving mothers. 3. World Health Organization, Blood safety and availability. WHO Fact sheet N° 279, Updated June 2013. Accessed 8 April 2014. File: Dr.APIS.14.June@World.Blood.Donor.Day Compiled For : Science Association, Shardabai Pawar Mahila Mahavidyalaya, Shardanagar; Tal. Baramati; Dist. Pune – 413115 (India). With the Best Compliments From: Shardanagar (The Agro – academic Heritage of Grandsire Padmashri Dr. D. G. Alias Appasaheb Pawar).

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जहाँ तक बात श्री नरेंद्र मोदी कि है तो मोदी एक अति संवेदनशील व्यक्तित्व के व्यक्ति है परन्तु इस अति संवेदनशीलता के कारण ही वह बहुत सी बेहूदी और बचकानी हरकतें भी करते है लेकिन जिस व्यक्ति ने अपनी ब्याहता पत्नी को जवानी में अलविदा कर दिया तो उस व्यक्ति को ५० करोड़ की गर्ल फ्रेंड और फ्री कि पत्नी ka bhed samajh में nahi aa sakta =? ऐसा व्यक्ति केवल उस कव्वे के सामान है जो किसी ऊंचाई पर बैठा हुआ हो और नीचे गंदगी में पड़े खाने पर नजर हो (मुहावरा है चालाक कव्वे के नजर हमेशा खखार पर ही टिकी रहती है ) मोदी को केवल भारत के प्रधान मंत्री कि कुर्सी नजर रहती है जिसके लिए वह दिन रात म्हणत करते रहते है अब सफलता कितनी मिलती है यह सब जनता पर निर्भर है ? तो ...........

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रानी लक्ष्मीबाई 19 नवंबर, 1835 में पैदा हुआ था . उसके पिता एक ब्राह्मण था . उसकी माँ एक बहादुर भगवान के डर से महिला थी . रानी चार साल की उम्र में उसकी माँ को खो दिया . वह एक बंदूक के साथ एक लक्ष्य पर घुड़सवारी , तलवार से लड़ , और शूटिंग सीखा . वह झांसी के महाराजा से शादी की थी , उसका नाम राजा Ghangadhar राव था . 1842 में वह झांसी की रानी कहा जाता था . शादी के बाद, रानी लक्ष्मी बाई बुलाया गया था . वह गणेश के मंदिर में शादी की थी . 1851 में, रानी एक बेटा था , वह मुश्किल से चार महीने का था जब वह दुर्भाग्य से मृत्यु हो गई . तो रानी एक बेटे को गोद लिया है, उसका नाम दामोदर राव था . ब्रिटिश दामोदर सिंहासन के लिए कानूनी वारिस था कि इस विचार से संतुष्ट नहीं थे . भारत के गवर्नर गंगाधर सिंहासन के लिए कोई वारिस छोड़ दिया था तब से झांसी से टूट जाएंगे . इस कारण से, एक युद्ध झांसी और ब्रिटिश के नागरिकों के बीच छिड़ गया. रानी वह देशभक्ति और आत्म सम्मान का प्रतीक था , झांसी देने के लिए तैयार नहीं था . मार्च 1858 में , ब्रिटिश हमले का फैसला

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धार्मिक कथाओ में दो रात्रियो एक शिवरात्रि और दूसरी नवरात्रि की चर्चा है |रात्रि शब्द अंधकार का पर्यायवाची है|यहाँ रात्रि का अर्थ सामान्य अर्थ वाली रात्रि से नहीं है |अज्ञान को भी अंधकार कहा जाता है ,अंधकार में सभी अनैतिक कार्य होते है,लूट हिंसा अपवित्रता भयऔर भटकन होती है |कलियुग को अज्ञान और अधर्म का युग कहते है|आज जो अधर्म के काम हो रहे है संत भी अधर्म में लिप्त है ऐसे समय में सामान्य आदमी जो भगवत प्राप्ति चाहता लेकिन सत्य ज्ञान न होने से भ्रमित रहता है भटकता है इसी समय को रात्रि कहा गया यही आसुरिय्त को नस्टक्र निराकार परमात्मा श्हिव एक वृद्ध मनुष्य तन का आधार लेते और उसे वो प्रजापिता ब्रह्मा नाम देते है |इसी ब्रह्मा के माध्यम से शिव धर्म स्थापना का कार्य करते है उनके इस कार्य जो मनुष्य आत्मा सहयोगी बनती है वो शिव शक्ति कहलाती है |परमात्मा ज्ञान के द्वारा मस्तिस्क में विराजमान आत्मा की अनुभूति कराते है |उनके इस ज्ञान अनुसार आचरण करने वाली आत्माओ का नाम देवी के नाम पर पड़ता है|चंद्रघंटा देवी के मस्तिस्क में विराजमान आत्मा शिव के सिखाये राजयोग से आत्म जाग्रति करती है |जो प्रारम्भ में घंटे के आकार में दिखाई देती है सेरके समान विस्म परिस्थतियों पर विजय प्राप्त करती है बुराई से लड़ने को सदा तैयार रहती है |त्याग तपस्या और पवित्रता के बल पर शिव से प्राप्त शक्तियों के द्वारा संसार से दुराचार मिटा आत्म ज्योति का प्रकाश फैला क्र ज्ञान का उजाला भरति है संसार को अछे कर्म करने की सीख अपने आचरण से देकर संसार को सुगंध से भर देती है.इस कार्य का यादगार ही देवी चन्द्र घंटा के रूप में पुजन होता है

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सभी देवी देवता के चित्र और उनके कथाओ का आध्यातिम्क रहस्य कुछ और है. दुर्गा का अर्थ दुर्गुणों पर विजय पाने वाली .सेर पर सवारी का मतलब विषमपरिस्थितयो पर विजय प्राप्त करना अस्ट भुजा इश्वर से प्राप्त आठ सक्तियो का प्रतीक है |कोई भी देवी देवता के चार या आठ हाथ नहीं होते ये प्रतीतात्मक है |ब्र्ह्मचारनी याने ब्रह्मा कुमारी (प्रजापिता ब्रह्मा कुमारी इस्वरिय विश्विद्ल्या की बहिन जी ) इनका ही बाद में गायन ब्र्हम्चारनी के रूप में होगा .संतोषी देवी जिसने अपनी ग्रहस्ती सदा संतोष के साथ चलाई गुड चना खाकर भी संतोस से रही| घर गृहस्त में रहकर भी जो कमल समान पवित्र रही वो कमलासनी लुक्स्मी है जिसने जीवन में सदा उमंग भरी वो उमा है \ग्रस्त के विरोध के बाद भी जिसने क्रोध नहीं किया सबको साथ लेकर सीतलता प्रदान की वो सीतला है.इस्वर के दिए ज्ञान को गाकर सबको सुनाया हर्षित किया वो गायत्री है.नव रात्रि अर्थार्थ परमात्मा शिव की वो नारी सेना जिसने इस्वर का ज्ञान उस समय सबको सुनाया जब धरती पर अज्ञान का घोर अंधकार था |इस्वर का सत्य परिचय किसको नहीं था इतनी भक्ति पूजा उपासना के बाद भी दुनिया में अधरम बढता जा रहा था भक्त इस्वर को ढूद्नते परेशान हो गये थे तब ब्रह्मा की मानुस पुत्री ब्रह्मकुमारियो ने प्रजापिता ब्रह्मा के मुख कमल से सुने हुए ज्ञान को समस्त संसार को स्वेट वस्त्र धारण करब्रह्म चर्या से रहकर दूसरो को भी इस्वर प्राप्ति करे थी

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हिंदी शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ रिलायंस जामनगर (गुजरात) में जानवरों जैसा सलूक....क्योंकि वे राष्ट्रभाषा - हिंदी के हैं ........ मुकेश अम्बानी की पत्नी नीता अम्बानी जिस के0 डी0 अम्बानी विद्या मंदिर स्कूल की चेयरमैन हैं .............. रिलायंस कम्पनी के के0 डी0 अ‍म्बानी विद्यालय में भी अन्याय चल रहा है, 11-11 साल काम कर चुके स्थाई टीचर्स को निकाला जाता है क्योंकि वे राष्ट्रभाषा हिंदी के हैं, पाकिस्तान से सटे इस सीमावर्ती क्षेत्र में राष्ट्रभाषा – हिंदी वा राष्ट्रीयता का विरोध तथा उसपर ये कहना कि सभी हमारी जेब में हैं रावण की याद ताजा कर देता है अंजाम भी वही होना चाहिए....सैकड़ों पत्र लिखने के बावजूद, राष्ट्रपति - प्रधानमंत्री कार्यालय से आदेश आने के बावजूद भी गुजरात सरकार चुप है ?........ !!!!! जय हिंद......... ! जयहिंदी......... !!! Contact for Detail- dr.ashokkumartiwari@gmail.com, 9428075674

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इस परिवार की कहानी ही अपने आप में बड़ी अजीबो गरीब है, नेहरू जी से लेकर और राजीव तक ! लेकिन सता पर न रहते हुए सता का रिमोट इस परिवार के हाथ में आज भी है, इस परिवार का दामाद सता के गलियारे में हरियाणा हिमाँचल प्रदेश में प्रोपर्टी बना रहा है, दोनों हाथों से जागीर बना रहा है, सब देख रहे हैं सता पर बैठे वे आँखें बंद किये हैं, विपक्ष ज़रा संसद की धूल उड़ा देते हैं, मुलायम माया ऊपर से इस परिवार पर छतरी ओढ़ लेते हैं ! लेकिन कांग्रेसी माननीय दामाद के दामन पर दाग न लग जाय, जांच नहीं होने देते हैं ! सुबरमनियम स्वामी जनता पार्टी के अध्यक्ष भी चुपचाप तमाशा देख रहे हैं ! रही प्रधान मंत्री मन मोहनसिंह जी की बात, उन्होंने इन दस सालों में कुछ किया ही नहीं क्या पता वे किस श्रेणी में आएँगे ? बाकी सब ठीक है भूल चूक लेणी देणी ! हरेन्द्र अमेरिका से

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प्रिय जागरण जंक्शन ब्लॉग , जंक्शन ब्लॉग्स की अपडेत के बाद एक पाठक और ब्लॉग लेखक के रूप में आ रही कठिनाइयों से ,लगातार मेल पत्रों में आपको रूबरू कराने के बावजूद आपकी तरफ़ से न कोई प्रतिक्रिया या संवाद का स्थापित न हो पाना दुखदायी लग रहा है । ब्लॉग प्रकाशित होने के बावजूद स्ट्रीम में न दिखाई देना , डैशबोर्ड में टिप्पणियों के दिखने के बावजूद पोस्ट पर उनका मौजूद न होना , पोस्टों की संख्या , टिप्पणियों की संख्या , टिप्पणी उत्तर बॉक्स , आदि जाने कितनी ही कठिनाइयां महसूस की जा रही हैं । सबसे दुखद तो ये है कि पोस्ट के प्रकाशन के दो दो तीन तीन दिनों बाद भी पोस्ट पोर्टल पर कहीं भी नहीं दिखाई देती है । कृपया ध्यान दें और शीघ्र इसका निराकरण करने की कृपा करें । विवश होकर पोस्ट से इतर आप तक बात पहुंचाने के लिए यहां टिप्पणी करनी पड रही है ।

के द्वारा: ajaykumarjha ajaykumarjha

बिना बाप के तो मैं भी पला हूं... मैने 10 साल की उमर से कमाना शुरू कर दिया था... 2 छोटे भाई और 1 बहिन.. मां और दादी.... इनके साथ मैं.. कुल 5 व्यक्तियों का जीवन मैने अपने दम पे पाला...खुद 10वीं की और छोटे-भाई बहन को पढ़ाया लिखाया...बाप घर छोड़ कर चला  गया.. गवर्नमैंट सर्विस में सीनियर पद पे थे.. दिमाग खराब हुआ.. घर छोड़ कर चले गये...गवर्नमैंट नें अभी तक कोई भी मुआवजा भी नहीं दिया.. न नौकरी दी.... फंड के पैसे भी खा गये....हाई कोर्ट में मुकदमा  चल रहा 21वां साल चल रहा है... जैसे तैसे कर के घर चलाया.. पढ़ाई भी की... खाना-पीना... कपड़े-लत्ते....दवाई-पानी... सब अरैंज किया..आज मेरी 40 साल की ऊमर है... पर मैने या हमारे किसी भी भाई-बहन ने अपना धर्म नहीं छोड़ा....आज तक जदो-जहद जारी है... फिर ये दिलीप साहेब ने इस्लाम किस मज़बूरी में अपनाया... लेखक को स्पष्ट करना चाहिए.... मेरे ख्याल में इस आर्टीकल के लेखक से जवाब-तलब किया जाना  चाहिए......

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आमतौर पर श्रीलंका के राजा, रावण, को दुराचारी, अत्याचारी, आदि कहा जाता रहा है l राम और लक्ष्मण ने, आज्ञा लिए बिना, सीता के साथ, रावण के राज्य की सीमा में प्रवेश कर, वहाँ की राजकुमारी सूपनखा को अनावश्यक रूप से अपमानित किया l अपनी सगी कुआंरी बहन का इतना अपमान कोई भी सक्षम राजा, सहन नहीं कर सकता l परन्तु रावण ने दोनों उद्दंडी राजकुमारों को सबक सिखाने के लिए, सीता का केवल हरण किया, और उन्हें सुरक्षित अशोक वाटिका में स्थान दिया – अंत तक ! उनका अपमान नहीं किया l राम और लक्ष्मण अनुभवहीन, घमंडी राजकुमार थे l जबकि रावण, एक गंभीर, अनुभवी, और बुद्धीमान ज्ञानी था l रावण ने जो भी कार्य किया, वो सब अपनी प्रशासनिक और व्यावहारिक कार्य कुशलता से किया l परन्तु राम जैसे तथाकथित ‘भगवान’ ने बाली का ‘वध’ किया तो ‘छल’ से l रावण को ‘मारा’ तो विभीषण की ‘चुगली’ से l ‘सोने’ के हिरन के पीछे ‘बुद्धू’ बन कर दौड़े चले गए ‘भगवान’ l लक्ष्मण को ‘जीवित’ करने से लेकर सारे ‘जटिल’ काम हनुमान से ‘करवाते’ रहें l यहाँ तक कि अपनी गर्भवती पत्नी को भी ‘थोथी’ लोक-ख्याती के खातिर, जंगल में असहाय छुड़वा दिया l ऐसे व्यक्ति की सर्वथा भर्त्सना होनी चाहिए – न कि पूजा !

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ईश्वरीय दायित्वों के निर्वाह के लिए क्रांति हेतु आत्मा से स्थायीरूपेण उत्साही व्यक्तियों का आह्वान मुझे स्पष्ट रूप से ज्ञात है कि हर देश/काल/वातावरण में नारी व धन में पीछे लगे अंध-स्वार्थियों का ही बाहुल्य रहता है तथापि सम्भवतः कुछ वीर तो शेष होंगे जो जीवन को शेजन-प्रजनन-शयन रूपी त्रिकोण तक सीमित न रखते हुए मातृभूमि के प्रति सबकुछ करने को आत्मा से तैयार हों। झाँसी की रानी जब राष्ट्र-रक्षा के लिए सबका आह्वान कर रही थीं, तब भी बहुत ही कम व्यक्ति आगे आये, शेष व्यक्ति अपनी-अपनी पत्नी के पल्लु में छपुे बैठे रहे। आचार्य चाणक्य ने महान कहलाने व विश्वविजेता माने जाने वाले सिकन्दर को शरत से पलायन करने पर विवश किया; उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य के माध्यम से महाराज धनानंद के नंदवंश का विनाश किया; यदि वे अखण्ड भारत की स्थापना नहीं करते तो क्या आप-हम अपने-अपने घरों में इतना स्वतंत्र, सम्पन्न जीवन जी रहे होते? अंग्रेज़ तो लूटने आते ही नहीं क्योंकि सिकंदर के निर्दय यहूदी सैनिक एवं धनानंद के निर्मम सैनिक ही इतना लूट चुके होते कि वर्तमान में आप जिसे भारत कहते हैं, वह खण्ड-खण्ड देश सांस्कृतिक/आर्थिक/सामाजिक रूपों में पाकिस्तान एवं अनेक अफ्ऱीकी देशों से भी कई गुना अधिक दुर्गत में होता। आचार्य ने भी अपने पुनीत सामाजिक उद्देश्यों के लिए जन-जन के आह्वान के प्रयत्न किये किन्तु तब भी वर्तमान जैसे अधिकांश पुरुष वास्तव में नपुंसक थे, सब भय/स्वार्थ/निष्क्रियता/निराशा रूपी अंधकार व पंक(कीचड़) में अपने तन-मन-धन व स्वयं की आत्मा तक को साभिप्रेत(जान-बूझकर) डुबाये हुए थे; मूरा, अहिर्या, चैतन्य, मृगनयनी जैसे कुछ ही व्यक्ति ऐसे थे, जिन्होंने आचार्य के निर्देश माने तथा जिनके उपकारों के कारण हम यहाँ तक पहुँचकर इतना अधिक सुखद जीवन बिता रहे हैं; क्या आपमें से कोई है जो पूर्वजों के उन उपकारों के प्रति सम्मान में ही सही, अपने ईश्वरीय/राष्ट्रीय/सामाजिक दायित्वों के निष्ठापूर्वक निर्वाह को उद्यत(तत्पर) हो? मैं यह पत्र ऐसे व्यक्तियों के आह्वान के लिए लिख रहा हूँ जो वास्तव में मातृभूभि, राष्ट्र के प्रति अपने सामाजिक एवं व्यक्तिगत उत्तरदायित्वों के निर्वाह के लिए भीतर से गम्भीर हों। शरत में अन्य साधनों(धरना-प्रदर्शन/सामान्य आवेदन करने) की तुलना में शीघ्र कार्यवाही एवं राष्ट्रीय कायापलट जनहितयाचिकाओं, संविधान-संशोधन एवं जनहितकारी स्टिंग ऑपरेशन्स के माध्यम से की जा सकती है; मैंने उपरोक्त विषयों में अनेक योजनाएँ तैयार की हैं किन्तु योजनाओं की संख्या बहुत अधिक एवं विषय व्यापक हैं, यदि और भी कुछ व्यक्ति सक्रिय एवं निःस्वार्थ रूप में आगे आयें तो शीघ्रातिशीघ्र क्रांतियाँ सुनिश्चित की जा सकती हैं। अस्थायी उत्साह युक्त भीड़ अथवा समूह नहीं अपितु उत्तेजक विचारों को साकार करने के लिए स्थायीरूपेण उत्साही व्यक्ति द्वारा ही क्रांतियाँ लायी जाती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर तत्काल कार्यवाही का अधिकार एवं दायित्व इन चार मुख्य शक्ति-केन्द्रों के पास हैः संसद(राज्य/लोक सभाएँ) एवं सर्वोच्च/उच्च न्यायालय(कहीं का भी), इनको जागृत करने के लिए जनहितयाचिका व स्टिंग ऑपरेशन्स सफल शस्त्र सिद्ध हो सकते हैं। बतायें कि आप उपरोक्त में से कौन-सा कार्य करने को तैयार हैं? वे ही व्यक्ति सम्पर्क करें जिनका उत्साह कभी न घटने वाला हो सुमित कुमार राय दूरभाष-91ः9425605432

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पर्यावरण प्रदूषण एवं हमारा दायित्व 5 जून 2013, लोकताक पावर स्टेशन, मणिपुर एक मशहूर हॉलीवुड फिल्म में कही गई हैं “बड़ी शक्ति के साथ आति हैं बड़ी जिम्मेदारी”। हम इंसान इस धरती पर सबसे बुध्यिमान प्राणी हैं। हम अपनी बुद्धि और ताकत से बाकी जीब जन्तु, पेर पौधे और सारी विश्व को प्रभाबित करते हें। इसी ताकत के अभिमान में कभी कभी हम भूल जाते हें पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी। अपनी लोभ के लिए हम खुदकी फैलाई हुई प्रदूषण से घटी क्षति को अनदेखा कर देते हें। प्रगति के नाम पर घटी इस अपराध के कारण आज हमारा वर्तमान फंसा हें बिनाश के दलदल में। फैली हें कितनी ही जानलेवा बीमारी, हुयी है प्राकृतिक सम्पदा में अभाव, प्राणीओं के अवलुप्ति, आबोहवा में अननुमेय बद्लाव। इस समय मौन रहना और चुपचाप सब कुछ सहना कायरता हैं। अब समय आगया है की हम समझे हमारा उत्तरदायित्व। इतिहास गवाह हें, जब जब मानव सभ्यता प्रदूषण के चपेट में आई हें, बिज्ञान ने हमें राह दिखाई हें। जब घोरों और बैलों पर बरने लगी अत्याचार, मोटर-गाड़ी से मिली राहत। जब हर घर में कोयलें की धुएँ से दम घुटने लगे, गैस और बिजली ने हमें राहत की साँस दी। बिज्ञान नें हमें सिखाया कम से कम प्रदूषण फैलाए पानी से कैसे बिजली मिल सकता हैं। भारत में जल विद्युत विकास के लिए एनएचपीसी लिमिटेड सबसे बड़ा संगठन हें। एनएचपीसी परिवार के सदस्व होने के नाते पर्यावरण को सवरने के लिए हम अमूल्य योगदान दे सकते हैं। समझदारी और जिम्मेदारी से यह काम करना हमारा दायित्व हे जो हम बखूबी निभा रहे हें। बाँध बनाते समय और सुरंग खोदते समय हम ध्यान देते हें की पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। एनएचपीसी लिमिटेड देश में पवन ऊर्जा एवं टाइडल परियोजनाएं बनाने की भी योजना बना रही है। जैसे जैसे हम नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाते जेएंगे, दुर्लभ ईंधन भण्डारों की बचत होगी और प्रदूषण रहित होने के कारण पर्यावरण सुरक्षित रहेगी। एनएचपीसी बृक्षारोपण करके कई इलाक़ा को हरिभरी की हें। वर्षाजल संग्रहण , ऊर्जा बचत जैसे पर्यावरण हितैषी कामों में अग्रणी रहा हें। इंटरनेट द्वारा बिलों का भुगतान करके और आन-लाईन काम करके हम कागज की बचत करते हें। इससे पेड कटने से बच रहे हैं। निजी जिंदेगी में हमें पानी और बिजली की बचत के प्रति सचेत रहना होगा। तभी हम अपने और अपने बच्चों के लिए वर्तमान के साथ साथ आनेवाले काल भी खुशहाल बना सकते हें।

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सही शीर्षक दिया आपने, मंदिर में स्त्री कन्हैया की पूजा करती है और घर पर गऊ जैसे पति पर अत्याचार | अभी तहां दुनिया को दरकिनार कर अपने देश की बात करें | आज भारत की नारी 'अबला' नहीं है 'दबंग' है | आज भी भारत में नारी को जितना सम्मान दिया जाता है उतना दुनिया में कहीं नहीं दिया जाता | नारी ने खुद अपने को बाजारू व उपभोग की वस्तु बनाया है इसके पीछे पुरुष कतई ज़िम्मेदार नहीं है | कंडोम से लगा कर पान मसाले तक के विज्ञापन में नारी देह-प्रदर्शन कर रही है जिससे युवाओं में कुंठा पनप रही है | देश में न जाने कितनी विवाहित नारियां हैं जो यौन-संतुष्टि के लिए तमाम नाबालिग युवकों को अपने प्रेंजाल में फंसा लेती हैं पर अफ़सोस उनको दंड देने के लिए क़ानून में कोई धारा नहीं है | निसंदेह बलात्कार की सज़ा मृत्युदंड हो पर उसके पहले दो पहलुओं पर विचार नितांत आवश्यक है- पहला क़ानून का दुरुपयोग रोकने की, दूसरा एक क़ानून और बनाने की जिसमें १०% से ज्यादा अंगप्रदर्शन पर नारी के लिए सख्त दंड का प्रावधान हो...

के द्वारा: nagesh nagesh

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जी हाँ शिवाजी एक सच्चे वीर थे.. उन्होंने सारी ज़िन्दगी कमजोर लोगो की रक्षा अत्याचारी मुगलों से किया. उन्हें अपनी वीरता पर गर्व था घमंड नहीं... उन्होंने अपने देश के लिए अपनी सारी जिंदगी छापामार लड़ाई में ख़त्म कर दिया... वो सभी का सम्मान करते थे.. हर किसी को अपने तरीके से स्वतन्त्र जीने की प्रेरणा देते थे. उन्हें गुलामी पसंद नहीं था.. सच वीर वाही है जो अपनी वीरता का उपयोग करे अपने देश और कमजोर लोगो की रक्षा और सहायता में... आपको शत-शत नमन.. कुछ सीखो ठाकरे बन्धुओ राज बालासाहब और उध्हाव तुमलोग मराठा हो ही नहीं सकते... अगर होते तो किसी कमजोर को ऐसे न सताते .. तुम देश के लिए मरते... अपने वोट बैंक के लिए नहीं... Shame on you !!!

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आज मतदाता जागरूकता दिवस है ....................कौन मतदाता है ?????????????????हिन्दू या मुस्लिम या अल्पसंख्यक ????????????????? मत देकर क्यों न मतदाता अपने ही धर्म जाति के लोग को जिताए क्योकि यह देश धर्म जाति का है और एक दिन वह आने वाला है जब इस देश में बिना कोई युद्ध और रक्त को बहाए आप अपने काम और अधिकार को पा सकते है क्योकि मतदान से आप अपने धर्म जाति के प्रतिनिधि को विधान सभा , संसद भेज सकते है और अब आप को समझाने की जरूरत नहीं कि अगर आप नहीं जगे तो मतदान के सहारे कोई भी सी देश पर कब्ज़ा कर लेगा ........क्या आपको अभी भी नहीं लगता कि मतदान करना चाहिए ...............मतदान कीजिये और अपने को सुरक्षित कीजिये ...अखिल भारतीय अधिकार संगठन

के द्वारा: allindianrightsorganization allindianrightsorganization

23 जनवरी को सच्चे महानायक नेताजी सुबाष चन्द्र बोष के जन्म दिन पर जिस तरह से सरकार के साथ-साथ मीडिया उनके महान योगदान याद नहीं कर रही है उससे इस देश की वर्तमान स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है जो मीडिया अमिताभ बच्चन के पेट दर्द को खबर बनाती हो, ऐश्वर्य की बच्ची का नामकरण करने के लिए पलकें बिछाए रहती हो, राहुल गाँधी के पार्टी उपाध्यक्ष बनाने पर दिन भर का कार्यक्रम चलाती है, खिलाडी, अभिनेता के एक एक क्रियाकलाप पर पैनी नजर गडाए मीडिया को नेताजी के जन्मदिन पर कोई कार्यक्रम करने की फुर्सत नहीं है जिनके योगदान के बिना गाँधी की लाठी और नेहरु की चापलूसी से यह देश कभी आज़ाद नहीं हो पाता उनको भुला देना इस देश की मीडिया के व्यवसायीकरण की पराकाष्ठ है जो देश अपने सच्चे नायकों को भुलाकर परदे के नायकों को महानायक बना बैठा हो उस देश का भगवान् ही मालिक है महानायक को उनके 116वे जन्मदिन पर पूरी श्रद्धा के साथ सत -सत नमन कमलेश कुमार मौर्या नॉएडा

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"संगीत निर्देशक आर.डी. बर्मन ने किशोर कुमार के कॅरियर को बनाने में बहुत मदद की थी. आर डी बर्मन के संगीत निर्देशन में किशोर कुमार ने ‘मुनीम जी’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘फंटूश’, ‘नौ दो ग्यारह’, ‘पेइंग गेस्ट’, गाइड’, ‘ज्वेल थीफ़’, ‘प्रेमपुजारी’, ‘तेरे मेरे सपने’ जैसी फिल्मों में अपनी जादुई आवाज से फिल्मी संगीत के दीवानों को अपना दीवाना बना लिया." ये तमाम फ़िल्में जिन्हें आप आर.डी.बर्मन की बता रहे हैं,दरअसल एस.डी.बर्मन इनके संगीतकार थे. और हाँ,किशोर कुमार के पिता का नाम "कुंजीलाल" नहीं बल्कि "कुंजलाल गांगुली" था.किशोर कुमार को खंडवा में दफ़नाया नहीं गया था बल्कि हिन्दू रीति के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया था.उनकी समाधि खंडवा में मौजूद है. "जिस समय किशोर कुमार ने मधुबाला को शादी के लिए प्रपोज किया था वह बीमार थीं और लंदन इलाज के लिए जा रही थीं". यह एक सम्पूर्ण ग़लत जानकारी है.मधुबाला ने ही शादी के लिए किशोर कुमार से आग्रह किया था और उस वक़्त उनका विदेश जाने का कोई कार्यक्रम नहीं था. देखिये लिंक- http://kishore-kumar.com/?p=453 इस लिंक पर वह आलेख प्रकाशित है जो किशोर कुमार के जीवितावस्था में ही लिखा और प्रकाशित किया गया था. कोई भी आलेख लिखने के पूर्व अच्छी तरह शोध कर लिखना उचित है.एक प्रतिष्ठित पत्रिका के ब्लॉग पर इस तरह की ग़लतियों की आशा नहीं थी.

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नमस्कार मैं एक राष्ट्र प्रेमी आपको बताना चाहता हु की वन्दे मातरम हे ५ कदवो का हैं yrics of Vande Mataram वन्दे मातरम् सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम् शस्यशामलां मातरम् । शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं सुखदां वरदां मातरम् ।। १ ।। वन्दे मातरम् । कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले, अबला केन मा एत बले । बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं रिपुदलवारिणीं मातरम् ।। २ ।। वन्दे मातरम् । तुमि विद्या, तुमि धर्म तुमि हृदि, तुमि मर्म त्वं हि प्राणा: शरीरे बाहुते तुमि मा शक्ति, हृदये तुमि मा भक्ति, तोमारई प्रतिमा गडि मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् ।। ३ ।। वन्दे मातरम् । त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी कमला कमलदलविहारिणी वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम् नमामि कमलां अमलां अतुलां सुजलां सुफलां मातरम् ।। ४ ।। वन्दे मातरम् । श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां धरणीं भरणीं मातरम् ।। ५ ।। वन्दे मातरम् ।। रेफ:- http://www.hindujagruti.org/activities/campaigns/national/vandemataram/

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जिस आजादी को पाने के लिए स्वतंत्रता सेनानीयों ने अपने खून से अपनी कुर्बानी की कहानी लिखी,आज उसी आजादी का महत्व हम भूल चुके हैं।दुनिया का सबसे अतुल्य देश भारत,जो आज जुझ रहा है अपने वजूद को बचाने के लिए।जब हम तराजू के एक तरफ भारत की उन्नति को रखते हैं और दूसरी तरफ बर्बादी को ,तो उन्नति का पलड़ा हवा में उछल कर कहीं लुप्त हो जाता है जबकी बर्बादी अपनी दमदार वजन के साथ भारत की धरती को छूती है।आज असम में लगातार बिना फाल्गुन के खून की होली खेली जा रही है,कभी गितीका तो कभी फिजा भारत की बेटियां असमय काल के गाल में जा रही है,घोटालों ने तो मानों अपना सौवां शतक ठोक कर जश्न मना रहें हैं,हर कोई भ्रष्टाचार को अपना हथियार बनाकर इस देश को ही हरा रहा है,औरतों की इज्जत की सुरक्षा ये सरकार नहीं कर पा रही है,उसपर से लड़कियों के जिंस न पहनने को लेकर बना तालेबानी कानून ।ऐसी तबाही में जहां बेगुनाहों की हत्या से बहते खून और अपनी लाचारी पर बहते लगभग एक सौ बीस करोड़ लोगों के आँसु,मिलकर एक हो गए हैं और इसमें भींग गया है हमारा तिरंगा झंडा,फिर कैसा स्वतंत्रता दिवस?आखिर कब तक सरकार सुनेगी इंसानियत के गला कटने की चीख और कब तक फहराएगी खून,आँसूओं में भींगा तिरंगा ।

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1. भारत की बेटियों की गर्भ में रक्षा करने की तुम्हारे अभियान की तारीफ से पहले मुझे बस इतना जानना है की अगर तुम को सच में बेटियों से इतना प्यार है और उनकी इतनी चिंता है तो अपने अब तक के जीवन में किसी बाप की बेटी यानि की अपनी पहली पत्नी को तुम ने तलाक दे कर बेसहारा क्यों बना दिया ???? 2. क्या लोग बेटियां सिर्फ इसलिए पैदा करें जिस से तुम जैसे मीठे जहर अपनी लव जिहादियों की सेना ले कर अपनी मलेक्ष कौम की भेड़ बकरी की तरह बढ़ रही आबादी में दिन दूना रात चौगुना बढ़ोत्तरी कर सकें.....????? 3. मिस्टर आमिर खान..फ़िल्मी जिंदगी से बहार निकल कर असली दुनिया में आओ और दुनिया को विश्वाश दिलाओ की कन्या भ्रूण हत्या पर रोक के अपने सराहनीय अभियान के बाद तुम एक अभियान चलाओगे जिस में २० वीं सदी में चाँद पर जा रही इस दुनिया में किसी भी लड़की को हजारो साले पुराने काले बुर्के में ढका नहीं रहना होगा ?? दूसरा काम तुम केरल हाई कोर्ट और केरल डी जी पी द्वारा स्वीकार लव जिहाद और लव जिहादियों के समूल विनाश में सब से आगे खड़े दिखोगे ??? 4. तुम हमें विश्वाश दिलाओ की तुम एक और महाअभियान चलाओगे जिस में तुम्हारे प्रयास से पैदा किसी भी लड़की का शौहर सिर्फ और सिर्फ उसका बन कर रहेगा, न तो वो ४ - ४ निकाह करेगा और ना ही जन्नत की 72 हूरों के सपने देखेगा और शादी की पवित्रता को जीवन भर स्वीकार करेगा..... तुम दुनिया को विश्वाश दिलाओ की हर उस अभियान में साथ दोगे जिस में पैदा हुयी लड़की को सिर्फ प्यार करने के जुर्म में बीच चौराहे पर कोड़े और पत्थर मारने वालो को देश और दुनिया से निकलने की सजा होगी......... तुम कसम खाओ की दुनिया की उस नापाक किताब को अपने हाथ से जलाओगे जिस में"युद्ध में जीती औरतों से तुरंत बलात्कार करने का फरमान है"".... आमिर खान तुम दुनिया को चीख चीख कर हजारों साल पहले पैदा हुए उस वहशी और दरिन्दे का सच बताओगे जिस ने ६० साल की बूढी उम्र में ९ सा की एक मासूम बच्ची का निकाह के नाम पर बलात्कार किया था .... और सब से पहले जा कर किसी बाप द्वारा पैदा की गयी उस बेटी से बीच चौराहे पर घुटने के बल बैठ कर सार्वजानिक माफ़ी मांग कर वापस अपने पास लाओगे जिस को तुम ने किसी और के चक्कर में पड़ कर तलाक दे कर जिंदगी भर के लिए बेसहारा कर दिया है.......... मिस्टर आमिर खान... जिस भी दिन तुम में इन सब सच्ची शर्तों को या तो झूठा साबित करने या सच्ची होने पर इनको पूरा करने का दम हो जायेगा उस दिन हम जैसे हजारों भगवा प्रेमी आप को अपने दिल, दिमाग, और आत्मा में वो जगह दे देंगे जो हम ने अपने पूज्य पूर्वजों को भी नहीं दिया होगा.और हम मांग करेगे की आमिर खान को बेटियों के देवता का दर्ज़ा दिया जाय......वरना तब तक सेकुलर नाम के मतिभ्रम लोगों से काम चलाते हुए काले बुर्के से अपना भी मुह काला कर लो.... क्यों की हम हिन्दू पहले से ही"यत्र नार्यत्र पूज्यते रमन्ते तत्र देवता"को रटते हुए नारी में देवी का दर्शन करते हैं, बिना तुम्हारी सलाह के.... और सब से जरुरी बात ----- ***** हम हिन्दू बेटियां पैदा करते हैं, उन्हें पालने के लिए***** ना की मलेक्षों की तरह ****बेटियां पालते हैं , उनसे पैदा करने के लिए****..... 'राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि' वन्दे मातरम्... जय हिंद... जय भारत... जय हिन्दू

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एक ऐसी आवाज़ जो अपना असर छोड जाती है। अबके हम बिछडे तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें, जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ढूंढ उजडे हुए लोगों में वफ़ा के मोती, ये खज़ाने तुझे मुमकिन है खराबों में मिलें तू खुदा है ना मेरा इश्क फ़रिश्तों जैसा, दोनो इन्सां हैं तो क्यो इतने हिजाबों में मिलें गम-ए-दुनिया भी गम-ए-यार में शामिल कर लो, नशा बढता है शराबें जो शराबों में मिलें आज हम दार पे खैंचे गए जिन बातों पर, क्या अजब कल वो ज़माने को निसाबों में मिलें अब न वो मैं हूं न तू है न वो माज़ी है "फ़राज़", जैसे दो शक्स तमन्ना के सराबों में मिलें गज़ल के शहनशाह महेंदीहसन को" जनाब अहमद फ़राज़ साहब" की एक गज़ल के साथ  हमारी भावपुर्ण श्रध्धांजली

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खाली!! मेरा नाम मेलिस्सा है मैं लंबा, अच्छी लग रही है, संपूर्ण शरीर आंकड़ा और सेक्सी हूँ. मैं अपने प्रोफ़ाइल देखा और आपसे संपर्क करने के लिए खुश था, मुझे आशा है कि आप सच्चे प्यार, ईमानदार और देखभाल व्यक्ति है कि मैं 4 देख रहा है हो जाएगा, और मैं कुछ खास करने के लिए आप मेरे बारे में बताना है, तो मुझे अपने ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क करें पर पता (annanmelissa@hotmail.com) इतना है कि मैं भी आप के लिए मेरी तस्वीर भेज सकते हैं सीधे. का संबंध है मेलिसा Hallo!!! My name is Melissa I am tall ,good looking, perfect body figure and sexy. I saw your profile and was delighted to contact you, I hope you will be the true loving, honest and caring person that I have been looking 4, And I have something special to tell you about me, So please contact me directly through my email address at (annanmelissa@hotmail.com) so that I can also send my picture directly to you. regards Melissa

के द्वारा: melissa melissa

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एक प्रश्न के लिए ब्रह्मा, स्वामी और गुरु कृपया यह बतायें आपदाओं से निपटने के मूल के संबंध में विश्व . कुरान उपेक्षा इस भूकंप, उसने विमानों अपनाने, जहाजों के जहाजों, भूमिगत खानों में विस्फोट, गाड़ियों, जल इमारतों की टक्कर, इमारतों की भूस्खलन के कारण के बिना, धार्मिक आतंकवाद, पागल ज्वालामुखी, आदि बाइबिल रहस्य का पता चलता है: भगवान की दुनिया में कुछ कर रही है; यह बहुत महत्वपूर्ण है. बाइबल कहती है कि भगवान के लिए बदलने जा रहा है सारी दुनिया (भारतीय सहित) बहुत बहुत जल्दी; (कोई निश्चित तारीख नहीं जानता). भगवान उनके पुत्र यीशु मसीह को लाना होगा फिर आप देखेंगे बादलों पर यीशु मसीह, भारतीय लोगों यीशु मसीह देखेंगे बादलों के ऊपर, आग के बीच, साम्राज्य और महामहिम के साथ, और स्वर्गदूतों के लाखों. जल्द ही बहुत है, शायद जब आप इस टिप्पणी पढ़ें. यीशु मसीह वापस आ जाएगी और यीशु सभी पुरुषों का न्याय करेगा, जीवित और मृत. बुद्ध भी फिर से वृद्धि होगी न्याय किया है. अविश्वासियों, अनन्त आग की झील में डाल दिया जाएगा. बाइबल कहती है कि आप इस शो देखने के लिए, बहुत जल्द ही आकाश में. शायद इस पल में. ईसा के के हुआ इससे उजाड़ना हजारों लाखों की संख्या में है । ईसाइयों के माध्यम से चले जायेंगे, वायु (हथियारों पर देवताओं की) भूमि की जाएगी और बाद में दाह-संस्कार. हिंदू-धर्म नहीं जानता है? हिंदू-धर्म केपास पहले से ही समाप्त हुआ; इस्लाम ने यह निष्कर्ष दियाहै । बौद्ध-संप्रदाय ने भी समाप्त हुआ । गुरु ने इसे उपेक्षा!! ईसा मसीह का ईश्वर के पुत्र ईसा मसीह ने अपने शरीर पर आपके पापों मानव-प्रेम के मारे गये ईश्वर पर सडक पार मानव-प्रेम की सजा का प्राप्त आप; अपणे । ईश्वर में उनके पुत्र को आप के लिए आदान-प्रदान मानव-प्रेम और ईश्वर में विश्वास दंगे-फसाद आपके पापों करेंगे, ईसा मसीह को आज क्षमा~माँगना करेंगे और आप बचाया जाए; मानव-प्रेम प्यार आप, ईश्वर प्यार आप. जारी रहेगा आपदाओं जब तक ईसा मसीह की वापसी. यह अवश्य सुनिश्चित करना चाहिए वीडियो आप पर नली: http://youtu.be/Hnuo0pWVx28 Bible School, Mexico. Evangelical Church of Mexico बाइबिल स्कूल, मैक्सिको । ईसाई धर्मपुस्तक सम्बन्धी चर्च मैक्सिको के

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परशुराम की हत्या । :- जैनी कह रहे हें की परशुराम की हत्या जैनियों के आठवें चक्रवर्ती शुभोम( सुभौम ) ने कर दी थी । हिंदू धर्म के समस्त विद्वान जानते हें कि मोर्यकाल के समय राज आश्रय मिलने के बाद जैन मतावलंबियों ने हिंदू धर्म के विरुद्ध किस प्रकार का घातक विष वमन किया । सम्वयन्ग सूत्र, बृहत कथा कोष, महापुराण, त्रिषष्टि शलाका पुरुष, विकेक सार, जैनियों का पद्मम-पूरण आदि अनेक जैन ग्रंथ इतने घातक रूप से हिंदू धर्म एवम हिंदू देवी देवताओं के विरुद्ध विष-वमन से भरे पड़े कि किसी भी हिंदू की धार्मिक भावना भड़क उठे वा ४० लाख से से भी कम जनसंख्या वाले जैन मतावलंबियों का १०० करोड़ से भी अधिक जनसंख्या वाले हिंदूओं के मध्य शांतिपूर्ण अस्तिव ख़तरे में पड़ जाय। यह तो सौभग्य की बात थी कि अल्पसंख्या होने के कारण अथवा कायरता वश जैन अपने अंदर का हिंदूओं के विरुद्ध वैमनश्य स्पष्ट नहीं करते थे। पर दुर्भग्यवश अभी अभी जैन विद्वान, लेखक वा जैनमुनी अनेकों वेब साइटों और जैन फोरमों एवं जैन ब्लॉग्स पर हज़ार वर्ष पुराने गड़े मुर्दे ज़ोर शोर से उखाड़ रहे हें । अभी अभी एस लेखक ने एक जैन फोरम पर भगवान विष्णु के छटे अवतार भगवान परशुराम के विरुद्ध यह विकृत कथा पढ़ी जो जैनियों के त्रिषष्टि शलाका पुरुष से उद्ध्र्त हे । परशुराम की हत्या । मूर्ख अंधविश्वासी और कल्पना जाल में फँसे हिंदू जिस परशुराम को चिरंजीवी मानते हे असल मे उसकी हत्या जैनियों के आठवें चक्रवर्ती शुभोम ने कर दी थी । रेणुका, जमदग्नि ऋषि की पत्नी उम्र में जमदग्नि से बहूत छोटी थी वा जमदग्नि उसे संतुष्ट नहीं रख पाता था इस कारण रेणुका का सहस्त्रार्जुन से संबंध हो गया । जमदग्नि को जब रेणुका के व्यभिचार पता चला तो उसने अपने पुत्र परशुराम से रेणुका का वध करा दिया । रेणूका की हत्या का बदला लेने के लिए सहस्त्रार्जुन ने बूढ़े जमदग्नि की हत्या कर दी । ईसपर परशुराम ने अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए सहस्त्रार्जुन पर हमला कर सहस्त्रार्जुन को मार डाला वा सहस्त्रार्जुन का राज्य हथिया लिया । पर सहस्त्रार्जुन की गर्भवती पत्नी तारा किसी प्रकार से वहाँ से भागने में सफल हो गई । वन में जैनियों के महामुनी शाँडिल्य ने तारा को संरक्षण दिया । जब तारा ने पुत्र को जन्म दिया तो महामुनी शाँडिल्यमुनी ने उसका नाम शुभोम रखा । युवा होने पर शाँडिल्यमुनी ने शुभोम को समस्त युद्ध कोशलों मे निपुण किया जो आगे चलकर जैन धर्म का आठवाँ चक्रवर्ती बना । बाद में जब शाँडिल्यमुनी ने चक्रवर्ती शुभोम को उसके पिता सहस्त्रार्जुन की हत्या की बात बताई तो अपने पिता की हत्या बदला लेने के लिए परम चक्रवर्ती शुभोम ने पापात्मा परशुराम का वध करके अपना रज्य पुनर्-अर्जित कर लिया । बाद में महाबली चक्रवर्ती शुभोम ने शाँडिल्यमुनी की प्रेरणा से ब्राह्मणों का नरसंहार प्रारंभ किया वा सारी पृथ्वी को ब्राह्मण विहीन कर डाला वा जैन धर्म के प्रचार-प्रसार वा संरक्षण में लग गया । इस कथा के अनेकों वर्सन जैन वेब साइटों, जैन फोरमो, एवं जैन ब्लॉग्स पर पड़े हें । हिंदू धर्म के विद्वानों को हिंदू देवी देवताओं के विरुद्ध जैनियों इस घातक विष वमन को रोकने का यथोचित प्रयास करना चाहिए । जैनी भी अगर इतिहास के गड़े मुर्दे इतिहास में गड़े रहने दें तो उचित होगा । देखें : http://groups.yahoo.com/group/jainhistory/message/692 #

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agar सिर्फ इंटरटेंमेंट ही सब कुछ है तो ब्लू फिल्म भी दिखा दे, और उसे बिंदास, बेबाक, मनोरंजन, पेस विद टाइम इत्यादी विशेषण लगाकर जस्टिफाई भी कर दे. इस देश में तब भी किसी की औकात नहीं के कुछ कर पाए. अमेरिकी आर्थिक शोध व डिस्कवरी ने स्पष्ट किया है की लास वेगास की ब्लू फिल्मो का वार्षिक कारोबार होलीवुड के कुल कारोबार से ज्यादा है. कुछ देशी अधयानो ने बताया है की भारतीय व दक्षिण एशियाई युवा इंटरनेट में सबसे ज्यादा सेक्स से सम्बंधित सर्च करते है. और सनी लिओन भट्ट की हिरोइन बन ही गयी है जिश्की ब्लू फिल्मो से पूरा इंटरनेट भरा पडा है. बस तो क्या है , उपरोक्त बिंदु काफी है की पूजा भट्ट कृत ब्लू फिल बनाने की लिए ... खूब चलेगी क्योंकी वो सिर्फ इंटरटेंमेंट, इंटरटेंमेंट और सिर्फ इंटरटेंमेंट होगा. पर शर्त है की पूजा स्वयं या उनके वाहयात पिताजी उस ब्लू पिक्चर में पात्र ना हो.

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***:घोटाले:** घोटाले पर घोटाले जिस देश के नेता करन लगे I क्या जीना यहाँ पशुओ का अब नेता चारा खान लगे I बोफोर्श दलाली कर कवत्रोची,राजीव गाँधी चले गये टेलीफोन में ए.राजा बारह सौ करोड़ डकार गये नरसिम्हाराव ढाई अरब का खाकर यूरिया पचा गये अब क्या बचा देश के अन्दर इस का सौदा करन लगे II1II घोटाले पर घोटाले जब देश के नेता करन लगे................. शीला कौल जब बनी गवर्नर, जमीन बेच कर चाट गई पैसठ करोड़ का कर घोटाला अपनों को बाँट प्लाट गई कलमंडी कोमनवेल्थ में सब का तोड़ रिकॉर्ड गये बहत्तर अरब का घोटाला कर जेल सभी को भेज गये क्या विश्वास करे इन पर ये मोटे चाडे करन लगे II2II घोटाले पर घोटाले जब देश के नेता करन लगे................. पशुओ का राशन खा-खा कर लालू ने सेहत बना लई पांच अरब का घोटाला कर मुख्यमंत्री रावड़ी बना लई जयललिता ने घोटाले कर अपनी धाक जमा लई इधर-उधर से कर अपनी दस अरब की कीमत बना लई भारत के पाखंडी नेता अब स्वीच खातो को भरन लगे II3II घोटाले पर घोटाले जब देश के नेता करन लगे................. छ: महीनो में चन्द्रशेकर भी मोटा पैसा काट गये चालीस कुन्तल सोने को खा कर हिंगोली पचा गये सतीश शर्मा पांच अरब का पी कर पैट्रोल भाग गये चावल,चीनी,गुड, घी खा कर रेल के पत्थर पचा गये मंत्री, एम.पी.,एम.एल.ए. अब सब घोटाला करन लगे II4II घोटाले पर घोटाले जब देश के नेता करन लगे................. छ:सौ अरब का विदेशी कर्जा देश को दे कर भाग गये कुछ बैठे है भारत में कुछ यम के लोक सिधार गये देश की जनता को पाखंडी दे महगाई मर गये रोज नई सरकार बने इन्हें वोट दे-देकर हर गये वी.पी. सिंह कहे भारत में अब गधे नास्ता करन लगे II5II घोटाले पर घोटाले जब देश के नेता करन लगे I क्या जीना यहाँ पशुओ का अब नेता चारा खान लगे I वी.पी. सिंह 14.4.2011

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आप क्यों उस सिरफिरे को सर चदा रहे है.जागरण कर रहे है या अंधकार..धिक्कार है..| सत्ता के भूखे,देश के विभाजन और संसार को पाकिस्तान जैसा देश देने वाला,कश्मीर को भट्टी बनाने वाला,चरित्रहीन.चीन के सन्दर्भ में गद्दार,और भी न जाने क्या क्या गिनाऊ.और आप उसे चाचा कहते है,कांग्रेस में फूट (क्योकि वो लोह-पुरुष सरदार पटेल को प.म. बनाना चाहती थी )डालकर (ताकि अंग्रेज भारत से न जा पाए ) की धमकी देकर गाँधी जी को ब्लेकमेल किया और (फिर गांधीजी ने पटेल को कहा तू मंजा,और पटेल ने कहा में तो आपका सेवक हु ) फिर वो प.म. बना.ये तो देश का दुर्भाग्य है की अंग्रेजी नश्ल हिन्दू खून में जन्म के देश को खा गयी ..इसका गाँधी जी के लेखो में प्रमाण भी है.आप क्यों गलत लिख के देश को भर्मित कर रहे है..मैंने जहा से ये पड़ा..क्यों नहीं आप भी ऐसा लिखते |भगवन आपको सद्बुदी दे...ताकि देश को हकिक़त्बताये ,मिथ्या नहीं |मेरा पोस्ट डिलीट मत करना ..क्योकि में आपका काम कर रहा हु|-देश हित में -एक नागरिक जय हिंद !

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