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व्रत-त्यौहार, सितारों के जन्म दिन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय महत्व के घोषित दिनों पर आधारित ब्लॉग

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महत्वपूर्ण दिवस


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एक वेश्या की वजह से स्वामी विवेकानंद को मिली नई दिशा

Posted On: 12 Jan, 2016  
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क्या है चिपको आंदोलन के पीछे की कहानी

Posted On: 5 Jun, 2015  
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संजय दत्त की दीवानी कैसे बनी ‘अंबानी’?

Posted On: 11 Feb, 2015  
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בהרבה פורומים מדברים על הטעיה של ט™—¡×”Ãמול×ÂÂור – וגם נחשפו תלושי שכריש שקבבלו תוספת 2000, אך יש שמרגישים מרומים , גם אין ממש מי שיענה להם.כמו כן יש טענה שאכן מורים קבלו תוספת אך היא מתקזזת בחלק מהמרכיבים כמו ותק למשל וגם הפנסיה

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ratatatatJune 8, 2011 at 8:56 amI’m a little tired of people (not you GS) bandying around a price for Cesc of £40 – 50m because &#18&0;that2#8227;s what he’s worth”. People are using the Henderson fee as a “Well if Henderson is worth £20m than Cesc is worth £40m”. It is absolute codswallop.You have to take into account that at the end of next season Cesc will be 6 months away from signing a pre-contract for Barca on a free. Why would Barca pay £50m when they could just wait and get him for nothing. I reckon he’ll go this summer for between £25m – £30m – certainly no more than that.

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ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम ओम साईं राम अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक राजाधिराज योगिराज परब्रहम श्री सच्चिदानंद सदगुरु साईं नाथ महाराज की जय...!!!!!!!

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साईं बाबा I LOVE YOU SO MUCH @ साईं बाबा माला शक्ति दया की मी माझा जीवनात यशस्वी होउ शेकेल साईं बाबा तुमचा आशीर्वाद माझा पाठीशी असू दया.माला फ़क्त तुमचा आशीर्वाद हवा आहे.तुमचा आशीर्वाद असेल तर जीवनात किती पण संकट आले तरी पार करेल.जय साईं राम.......ओम साईं राम I LOVE YOU साईं बाबा माला माझा आई चे स्वप्न पूर्ण करायचे आहे.माला शक्ति दया साईं बाबा.माझा पाठीशी तुमचा आशीर्वाद असू दया भगवंता.मी खुप मेहनत करेल आणि माझा आई चे स्वप्न पूर्ण करेल.आई चे स्वप्न पूर्ण झाले तर माझा जीवनाचे सार्थक होईल नाहीतर माझा जीवनात येऊन काहीच उपयोग होणार नाही.तुम्ही दया चे सागर आहात तुम्ही कृपालु आहात.ओम साईं राम जय साईं राम ओम साईं राम जय साईं राम ओम साईं राम जय साईं राम ओम साईं राम जय साईं राम ओम साईं राम जय साईं राम ओम साईं राम जय साईं राम

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साल 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष के रूप में घोषणा करके प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने एक तरह से भारत के पहले गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट को सम्मान दिया है. दुनिया को शून्य की समझ देने वाले आर्यभट्ट की ही देन है कि सैकड़ों सालों तक भारत ने दुनिया का गणित के क्षेत्र में नेतृत्व किया. आज खगोलविज्ञान में दुनिया ने जितनी भी उपलब्धियां हासिल की हैं उसमें आर्यभट्ट का योगदान सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्हीं की देन है कि आज खगोलविज्ञान नए-नए शोध कर रहा है. आर्यभट्ट का जीवन आर्यभट्ट के जन्मकाल को लेकर जानकारी उनके ग्रंथ आर्यभट्टीयम से मिलती है. इसी ग्रंथ में उन्होंने कहा है कि “कलियुग के 3600 वर्ष बीत चुके हैं और मेरी आयु 23 साल की है, जबकि मैं यह ग्रंथ लिख रहा हूं.” भारतीय ज्योतिष की परंपरा के अनुसार कलियुग का आरंभ ईसा पूर्व 3101 में हुआ था. इस हिसाब से 499 ईस्वी में आर्यभट्टीयम की रचना हुई. इस लिहाज से आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी में हुआ माना जाता है. लेकिन उनके जन्मस्थान के बारे में मतभेद है. कुछ विद्वानों का कहना है कि इनका जन्म नर्मदा और गोदावरी के बीच के किसी स्थान पर हुआ था, जिसे संस्कृत साहित्य में अश्मक देश के नाम से लिखा गया है। अश्मक की पहचान एक ओर जहाँ कौटिल्य के “अर्थशास्त्र” के विवेचक आधुनिक महाराष्ट्र के रूप मे करते हैं, वहीं प्राचीन बौद्ध स्रोतों के अनुसार अश्मक अथवा अस्सक दक्षिणापथ (Daccan) में स्थित था. कुछ अन्य स्रोतों से इस देश को सुदूर उत्तर में माना जाता है, क्योंकि अश्मक ने ग्रीक आक्रमणकारी सिकन्दर (Alexander, 4 BC) से युद्ध किया था. Read: जब गणित का तेज विद्यार्थी दुनिया का महान क्रिकेटर बना आर्यभट्ट की शिक्षा माना जाता है कि आर्यभट्ट की उच्च शिक्षा कुसुमपुर में हुई और कुछ समय के लिए वह वहां रहे भी थे. हिंदू तथा बौद्ध परंपरा के साथ-साथ भास्कर ने कुसुमपुर को पाटलीपुत्र बताया जो वर्तमान पटना के रूप में जाना जाता है. यहाँ पर अध्ययन का एक महान केन्द्र, नालन्दा विश्वविद्यालय स्थापित था और संभव है कि आर्यभट्ट इसके खगोल वेधशाला के कुलपति रहे हों. ऐसे प्रमाण हैं कि आर्यभट्ट-सिद्धान्त में उन्होंने ढेरों खगोलीय उपकरणों का वर्णन किया है. आर्यभट्ट के कार्य आर्यभट्ट गणित और खगोल विज्ञान पर अनेक ग्रंथों के लेखक हैं, जिनमें से कुछ खो गए हैं. उनकी प्रमुख कृति, आर्यभट्टीयम, गणित और खगोल विज्ञान का एक संग्रह है, जिसे भारतीय गणितीय साहित्य में बड़े पैमाने पर उद्धृत किया गया है, और जो आधुनिक समय में भी अस्तित्व में है. आर्यभट्टीयम के गणितीय भाग में अंकगणित, बीजगणित, सरल त्रिकोणमिति और गोलीय त्रिकोणमिति शामिल हैं. इसमें निरंतर भिन्न (कॅंटीन्यूड फ़्रेक्शन्स), द्विघात समीकरण(क्वड्रेटिक इक्वेशंस), घात श्रृंखला के योग(सम्स ऑफ पावर सीरीज़) और जीवाओं की एक तालिका(टेबल ऑफ साइंस) शामिल हैं. Read: एक औरत जिसने कंप्यूटर को भी फेल कर दिया आर्यभट की रचना आर्यभट के लिखे तीन ग्रंथों की जानकारी आज भी उपलब्ध है. दशगीतिका, आर्यभट्टीयम और तंत्र लेकिन जानकारों की मानें तो उन्होंने और एक ग्रंथ लिखा था- ‘आर्यभट्ट सिद्धांत‘. इस समय उसके केवल 34 श्लोक ही मौजूद हैं. उनके इस ग्रंथ का सातवें दशक में व्यापक उपयोग होता था. लेकिन इतना उपयोगी ग्रंथ लुप्त कैसे हो गया इस विषय में कोई निश्चित जानकारी नहीं मिलती. आर्यभट्ट ने गणित और खगोलशास्त्र में और भी बहुत से कार्य किए. अपने द्वारा किए गए कार्यों से इन्होंने कई बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को नए रास्ते दिए. भारत में इनके नाम पर कई संस्थान खोले गए हैं जिसमें कई तरह के शोध कार्य किए जाते हैं. Read more: वर्ष 2012 राष्ट्रीय मैथमेटिकल ईयर गणित में फिसड्डी क्यों हैं हमारे छात्र मराठी में विकीपीडिया Click here to cancel reply. Name (required) Mail (will not be published) (required) English Hindi Hinglish CAPTCHA Image Refresh Image CAPTCHA Code* Reset vivek sharma के द्वारा November 18, 2014 आर्य जी बहुत ही महान है surendra sahu के द्वारा September 6, 2014 He is god gift memory Ankita Chaudhary के द्वारा January 31, 2014 The are very Intelligent man and we are proud of him. Abhay yadav के द्वारा November 6, 2013 good….story. Rohan Sharma के द्वारा November 4, 2013 लास्ट लाइन बहुत अछि थी. tanya के द्वारा June 11, 2013 lovely Manjeet Khutela के द्वारा December 9, 2012 बहुत हि बुधिमान थे अन्य ब्लॉग इनमें लाखों दर्शकों ने देखा है अपनी मां का रूप चार साल! पंद्रह हिट फिल्में! सफलता की कीमत तुम क्या जानो राजेश बाबू! त्याग और वीरता की मिसाल 'श्री गुरु गोबिंद सिंह' Christmas Day history :कुछ इस तरह से दुनिया में आए भगवान ईसा मसीह बॉलीवुड के ‘लखन’ पास भी नहीं कर सके थे अभिनय की प्रवेश-परीक्षा, लेकिन अपने दमदार अभिनय से कमाया नाम केवल 5 रुपये मासिक आमदनी कमाने वाला यह व्यक्ति कैसे बना भारत का प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सरकारी नौकरी छोड़ इसने भारत के हर घर में दूध पहुँचाया और बन गया दुग्ध-क्रांति का जनक आज है भारतीय संविधान का ख़ास दिन.......जानिए क्यों आपके संविधान को विश्व का श्रेष्ठ संविधान कहा जाता है बलवान पहलवान से ये इंसान बना भगवान हनुमान खरबों की मालकिन नीता अंबानी अपने बच्चों को जेब खर्च के लिए देती थी पांच रुपए! ज्यादा चर्चित ज्यादा पठित अधि मूल्यित नववर्ष में मधुर कल्पनाओं को निष्काम भाव से साकार करें रघुबर की गति न्यारी सिर्फ कैलेण्डर का पन्ना बदल जाता है / वो साल भी नया था;ये साल भी नया है मोदी लहर की आहट से जब कांप उठा इंद्र का सिंहासन वात्सल्य (कविता) शुक्रिया जागरण परिवार साब!कुछ पैसे दे दो..... नववर्ष गुरुमय हो ..pk (परमात्मा कृपा) ग़ज़ल... 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साल 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष के रूप में घोषणा करके प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने एक तरह से भारत के पहले गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट को सम्मान दिया है. दुनिया को शून्य की समझ देने वाले आर्यभट्ट की ही देन है कि सैकड़ों सालों तक भारत ने दुनिया का गणित के क्षेत्र में नेतृत्व किया. आज खगोलविज्ञान में दुनिया ने जितनी भी उपलब्धियां हासिल की हैं उसमें आर्यभट्ट का योगदान सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है. उन्हीं की देन है कि आज खगोलविज्ञान नए-नए शोध कर रहा है. आर्यभट्ट का जीवन आर्यभट्ट के जन्मकाल को लेकर जानकारी उनके ग्रंथ आर्यभट्टीयम से मिलती है. इसी ग्रंथ में उन्होंने कहा है कि “कलियुग के 3600 वर्ष बीत चुके हैं और मेरी आयु 23 साल की है, जबकि मैं यह ग्रंथ लिख रहा हूं.” भारतीय ज्योतिष की परंपरा के अनुसार कलियुग का आरंभ ईसा पूर्व 3101 में हुआ था. इस हिसाब से 499 ईस्वी में आर्यभट्टीयम की रचना हुई. इस लिहाज से आर्यभट्ट का जन्म 476 ईस्वी में हुआ माना जाता है. लेकिन उनके जन्मस्थान के बारे में मतभेद है. कुछ विद्वानों का कहना है कि इनका जन्म नर्मदा और गोदावरी के बीच के किसी स्थान पर हुआ था, जिसे संस्कृत साहित्य में अश्मक देश के नाम से लिखा गया है। अश्मक की पहचान एक ओर जहाँ कौटिल्य के “अर्थशास्त्र” के विवेचक आधुनिक महाराष्ट्र के रूप मे करते हैं, वहीं प्राचीन बौद्ध स्रोतों के अनुसार अश्मक अथवा अस्सक दक्षिणापथ (Daccan) में स्थित था. कुछ अन्य स्रोतों से इस देश को सुदूर उत्तर में माना जाता है, क्योंकि अश्मक ने ग्रीक आक्रमणकारी सिकन्दर (Alexander, 4 BC) से युद्ध किया था. Read: जब गणित का तेज विद्यार्थी दुनिया का महान क्रिकेटर बना आर्यभट्ट की शिक्षा माना जाता है कि आर्यभट्ट की उच्च शिक्षा कुसुमपुर में हुई और कुछ समय के लिए वह वहां रहे भी थे. हिंदू तथा बौद्ध परंपरा के साथ-साथ भास्कर ने कुसुमपुर को पाटलीपुत्र बताया जो वर्तमान पटना के रूप में जाना जाता है. यहाँ पर अध्ययन का एक महान केन्द्र, नालन्दा विश्वविद्यालय स्थापित था और संभव है कि आर्यभट्ट इसके खगोल वेधशाला के कुलपति रहे हों. ऐसे प्रमाण हैं कि आर्यभट्ट-सिद्धान्त में उन्होंने ढेरों खगोलीय उपकरणों का वर्णन किया है. आर्यभट्ट के कार्य आर्यभट्ट गणित और खगोल विज्ञान पर अनेक ग्रंथों के लेखक हैं, जिनमें से कुछ खो गए हैं. उनकी प्रमुख कृति, आर्यभट्टीयम, गणित और खगोल विज्ञान का एक संग्रह है, जिसे भारतीय गणितीय साहित्य में बड़े पैमाने पर उद्धृत किया गया है, और जो आधुनिक समय में भी अस्तित्व में है. आर्यभट्टीयम के गणितीय भाग में अंकगणित, बीजगणित, सरल त्रिकोणमिति और गोलीय त्रिकोणमिति शामिल हैं. इसमें निरंतर भिन्न (कॅंटीन्यूड फ़्रेक्शन्स), द्विघात समीकरण(क्वड्रेटिक इक्वेशंस), घात श्रृंखला के योग(सम्स ऑफ पावर सीरीज़) और जीवाओं की एक तालिका(टेबल ऑफ साइंस) शामिल हैं. Read: एक औरत जिसने कंप्यूटर को भी फेल कर दिया आर्यभट की रचना आर्यभट के लिखे तीन ग्रंथों की जानकारी आज भी उपलब्ध है. दशगीतिका, आर्यभट्टीयम और तंत्र लेकिन जानकारों की मानें तो उन्होंने और एक ग्रंथ लिखा था- ‘आर्यभट्ट सिद्धांत‘. इस समय उसके केवल 34 श्लोक ही मौजूद हैं. उनके इस ग्रंथ का सातवें दशक में व्यापक उपयोग होता था. लेकिन इतना उपयोगी ग्रंथ लुप्त कैसे हो गया इस विषय में कोई निश्चित जानकारी नहीं मिलती. आर्यभट्ट ने गणित और खगोलशास्त्र में और भी बहुत से कार्य किए. अपने द्वारा किए गए कार्यों से इन्होंने कई बड़े-बड़े वैज्ञानिकों को नए रास्ते दिए. भारत में इनके नाम पर कई संस्थान खोले गए हैं जिसमें कई तरह के शोध कार्य किए जाते हैं. Read more: वर्ष 2012 राष्ट्रीय मैथमेटिकल ईयर गणित में फिसड्डी क्यों हैं हमारे छात्र मराठी में विकीपीडिया

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स्वामी विवेकानंद स्वामी विवेकानंद जी आधुनिक भारत के एक महान चिंतक, दार्शनिक, युवा संन्यासी, युवाओं के प्रेरणास्त्रोत और एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे । स्वामी विवेकानन्द का जन्म 12 जनवरी सन् 1863को कलकत्ता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। स्वामी विवेकानंद संत रामकृष्ण के शिष्य थे और स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में कलकत्ता में रामकृष्ण मिशन और 9 दिसंबर 1898 को कलकत्ता के निकट गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की। विश्वभर में जब भारत को निम्न दृष्टि से देखा जाता था, ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर, 1883 को शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म पर प्रभावी भाषण देकर दुनियाभर में भारतीय आध्यात्म का डंका बजाया। उन्हें (स्वामी विवेकानंद )प्रमुख रूप से उनके प्रेरणात्मक भाषण की शुरुआत “मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों” के साथ करने के लिये जाना जाता है। उनके (स्वामी विवेकानंद )संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था। विश्व धर्म सम्मेलन में उपस्थित 7000 प्रतिनिधियों ने तालियों के साथ उनका (स्वामी विवेकानंद )स्वागत किया। भारत में स्वामी विवेकानन्द के जन्म दिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। विश्व के अधिकांश देशों में कोई न कोई दिन युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार सन् 1985 ई. को अन्तरराष्ट्रीय युवा वर्ष घोषित किया गया। भारतीय केंद्र सरकार ने वर्ष 1984 में मनाने का फैसला किया था ।राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस (12 जनवरी) पर वर्ष 1985 से मनाया जाता है । भारत में स्वामी विवेकानन्द की जयन्ती, अर्थात 12 जनवरी को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद जी ने हमेशा युवाओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया और युवाओं को आगे आने के लिए आह्वान किया । स्वामी विवेकानंद ने अपनी ओजस्वी वाणी से हमेशा भारतीय युवाओं को उत्साहित किया है । स्वामी विवेकानंद के विचार सही मार्ग पर चलते रहने कीप्रेरणा देते हैं। युवाओं के प्रेरणास्त्रोत, समाज सुधारक स्वामी विवेकानंद ने युवाओं का आह्वान करते हुए कठोपनिषद का एक मंत्र कहा था:- “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत ।”-उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक अपने लक्ष्य तक ना पहुँच जाओ। भारतीय युवा और देशवासी स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनके विचारों से प्रेरणा लें। युद्धवीर सिंह लांबा “भारतीय” (Yudhvir Singh Lamba Bhartiya) प्रशासनिक अधिकारी, हरियाणा इंस्टिटयूट ऑफ टेक्नॉलॉजी, दिल्ली रोहतक रोड (एनएच -10) बहादुरगढ़, जिला. झज्जर, हरियाणा राज्य, भारत

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*भारतीय सुभाष सेना* *भारतीय सुभाष सेना* !!भारत जगाओ ,भारत बचाओ महाअभियान !! *वह हिन्द का पानी जिन्दा है ,वह हिन्दुस्तानी जिन्दा है !अंग्रेजों का जानी दुश्मन ,वह सुभाष सेनानी जिन्दा है !! * मत डरो संत से यह मुकुट नहीं मांगेगा ,धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागेगा ! तुम सोओगे तो भी यह ऋषि जागेगा ,छिड़ गया युद्ध तो बम के गोले दागेगा !! युग परिवर्तक महान संत सम्राट"सुभाष" की भारत की जनता से अपील.......... प्यारे देश वासियों , सादर जयहिन्द ! पिछले 68 वर्षों से भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के महानायक एवं ब्रिटिश साम्राज्यवाद के कट्टर दुश्मन क्रांतिवीर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन के बारे में रहस्य बना हुआ है तथा हमारा देश आज भी गुलाम बना हुआ है !आप सभी देशभक्त जनता निम्न बातों पर विचार करें :- (क ) १५ अगस्त १९४७ को हमारे देश को पूर्ण आजादी नहीं बल्कि अंग्रेजों की दत्तक -पुत्र भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने ९११ समझौतों के तहत ब्रिटेन से मात्र सत्ता का हस्तांतरण किया ,जिसके तहत देश को बाँटकर देश का कत्ल करके लगभग ४० लाख लोगों को मौत के घाट उतार दिया !अंग्रेजों की देन वहीं "गवर्नमेन्ट ऑफ़ इण्डिया "की सरकार आज भी शासन कर रही है ! ९११ समझौतों की कुछ अन्य शर्तें निम्न हैं :- १- नेताजी सुभाषचन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा जब कभी मिल जायेंगें ब्रिटिश गवर्नमेंट के हवाले किया जायेगा ! २ - नेताजी सुभाषचंद्र बोस के उपर आजीवन अंतर्राष्ट्रीय युद्ध अपराधी का मुकदमा चलाया जायेगा ,जो आज भी न्युरेनवर्ग न्यायालय ,अमेरिका में चल रहा है ! ३ - भारत आज लगभग १० अरब रूपये प्रतिवर्ष बतौर पेंशन तथा लगभग १०,००० टन गोमांस ब्रिटेन को भेजता है ! ४ - भारत ब्रिटिश गवर्नमेंट द्वारा दिए गये संविधान के द्वारा शासित होगा तथा भारत की जनता ब्रिटेन की प्रजा होगी ! (ख ) साथियों भारत के वर्तमान नेताओं ने अपने विदेशी खातों में कुन्तल के कुन्तल सोना ,चांदी ,हीरा व नगदी अपने नाम से जमा किया हुआ है ,जबकि देश का प्रत्येक नागरिक कई हजार रूपये विदेशी कर्ज से दबा हुआ है ! (ग ) साथियों आजीवन अविवाहित योगिराज नेताजी सुभाषचन्द्र बोस आज भी जीवित हैं व पूर्ण स्वस्थ हैं ! संत वेश में हैं तथा सम्पूर्ण विश्व की व्यवस्था परिवर्तन ,पूर्ण स्वतन्त्रता व भारतवर्ष को पूर्ण अखण्ड बनाने के कार्यों में लगे हुए हैं और बहुत शीघ्र ही भारतवर्ष में प्रकट होंगे !एक सुनियोजित योजना के तहत "नेताजी "को बचाने के लिए विमान दुर्घटना की कहानी गढ़ी गई थी,जिसको कांग्रेस ने सत्य साबित करने का असफल प्रयास किया ! आज भी "नेताजी " को न आने देने के लिए सरकार तरह -तरह के षणयन्त्र रच रही है ! वर्तमान प्रधानमन्त्री ,राष्ट्रपति सहित सभी प्रमुख नेताओं को उपरोक्त बात की जानकारी है ,लेकिन कुर्सी जाने के भय से कोई भी नेता , "नेताजी सुभाषचन्द्र बोस "का साथ नहीं दे रहा है ! अपनों ने ही लूटा ,गैरों में कहाँ दम था ! किस्ती तो वहीं डूबी ,पानी जहाँ कम था !! आवाहन आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सब भविष्य से खिलवाड़ न करके जाति ,धर्म व निजी स्वार्थों से उपर उठकर एक बार समस्त भारतवासी सत्यवादिता ,नैतिकता ,पौरुष तथा त्याग ,सेवा भाव के साथ खड़ा हों और असली मंत्र सत्यओम !वंदेमातरम् !! जयहिंद !!! के अनुसार आगे बढ़ें ! आज पुनः देश गुलामी के कगार पर खड़ा होकर आप सभी देशवासियों से बलिदान मांग रहा है ! पूर्ण स्वतन्त्रता का मूल्य सभी को चुकाना होगा !जब तक भारत को पूर्ण आजादी नहीं मिल जाती ,तब तक चैन से नहीं बैठेंगे ! इस पूर्ण आजादी के लिए तुम सभी मेरा साथ दो और मै तुम्हें अमन -चैन का अखण्ड भारत दूंगा ! इस भ्रष्ट व्यवस्था का अन्त और नई शासन व्यवस्था के सूत्रपात के लिए भारतीय सुभाष सेना का साथ दें ! देश के अंदर जहाँ कहीं भी कार्यक्रम की सूचना मिले आप उस कार्यक्रम में पहुंचकर जानकारी हासिल करें ! !! जयहिन्द -जय सुभाष, है हिन्द ,हैं सुभाष !! निवेदक :- भारतीय सुभाष सेना ,भारत ! सम्पर्क नं :-

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निःसंदेह यदि सरदार पटेल के हाथ में भारत के नेतृत्व की डोरहोती और पंडित नेहरु हावी न होते तो आज भारत निम्नलिखित समस्याओं से नहीं जूझता - १) पाक  और चीन से सीमा विवाद विशेषतया कश्मीर और अक्साई चीन तथा नेफा लद्दाख के छेत्र में २) तिब्बत का मामला जो एक स्वतंत्र राज्य था और नेहरु जी ने उसे चीन को भेंट दे दिया ( और चीन की सीमायें भारत से मिलने लगीं)क्योंकि नेहरूजी किसीभी कीमत पर चीन से दोस्ती चाहते थे ३) आर्टकिल ३७० कश्मीर में लगाना जिससे न तो भारत को फायदा हुआ और न ही कश्मीर को उसका विकास रुक गया ४) कश्मीर के पूर्ण विलय के बाद भी जनमत गड़ना  की घोषणा करना  आज भी पाकिस्तान उसी की माँग  कर रहा है और दोनों देशों की शांति में बाधक है ५) भारत में आरक्षण लागू कर लोग लोग में भेद पैदा करना आज भी भारतवर्ष की जनता इस अन्याय को ढो रही है और यह घटने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है  दुनिया के किसी भी देश में यह बीमारी नहीं है ६) मैरिज एक्ट  जिसमे महिलाओं को संपत्ति में अधिकार तथा विधवा विवाह और तलाक का हक़ दिया गया सिर्फ हिन्दुओं पर लागु किया जाना आज भी मुस्लिम महिलाएं इन अधिकारों के लिए तरस रही हैं जब की आवश्यकता पूरी जनता के लिए कामन सिविल कोड की थी अन्य किसी देश में इस प्रकार अलग अलग जनता के लिए अलग अलग कानून नहीं है और बहुत सारीबातें गिनाई जा सकती हैं जो पंडित नेहरु की जिद्द और शांति का मसीहा कहलाने की सनक में हुयीं और उनकी निरंकुशता को कोई चैलेंज न दे पाया आज भी भारत इन गलतियों का नुकसान भुगत रहा है

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सान के कार्य उसको कभी मरने नहीं देते. इतिहास के पन्नों में दर्ज कई महानायक जो आज भी याद किए जाते हैं वह अपने काम की वजह से ही किए जाते हैं. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय में भी ऐसे कई लोग थे जो आज भी हमारी यादों में बसे हुए हैं. आज हमारे स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहरलाल नेहरु (Jawaharlal Nehru) की पुण्यतिथि है. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और देश के अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी प. नेहरु की जिंदगी पश्चिमी सभ्यता से जरूर प्रभावित थी पर साथ ही वह अपने देश से भी जुड़े हुए थे. Read: कैसे मरी इंदिरा गांधी? Jawaharlal-Nehru14 नवंबर, 1889 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में जन्मे पं. नेहरु (P. Nehru) का बचपन काफी शानोशौकत से बीता. उनके पिता देश के उच्च वकीलों में से एक थे. पं. मोतीलाल नेहरु (Motilal Nehru) एक धनाढ्य वकील थे. उनकी मां का नाम स्वरुप रानी नेहरू था. वह मोतीलाल नेहरू के इकलौते पुत्र थे. इनके अलावा मोती लाल नेहरू (Motilal Nehru) की तीन पुत्रियां थीं. उनकी बहन विजयलक्ष्मी पंडित बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं. पं. नेहरू (P. Nehru) कश्मीरी ब्राह्मण परिवार के थे, जो अपनी प्रशासनिक क्षमताओं तथा विद्वत्ता के लिए विख्यात थे. पं. नेहरु की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई. 14 वर्ष की आयु में नेहरू ने घर पर ही कई अंग्रेज़ अध्यापिकाओं और शिक्षकों से शिक्षा प्राप्त की. 15 वर्ष की उम्र में 1905 में नेहरू एक अग्रणी अंग्रेजी विद्यालय इंग्लैण्ड के हैरो स्कूल में भेजे गए. Read: Nehru Ji Love Affair With Lady Edwina Nehru_family पंडित जवाहरलाल नेहरु (Jawaharlal Nehru) 1912 में भारत लौटे और वकालत शुरू की. मार्च 1916 में नेहरू का विवाह कमला कौल के साथ हुआ, जो दिल्ली में बसे कश्मीरी परिवार की थीं. उनकी अकेली संतान इंदिरा प्रियदर्शिनी (Indira Priyadarshani) का जन्म 1917 में हुआ. बाद में वह भारत की प्रधानमंत्री बनीं. जवाहरलाल नेहरु (Jawaharlal Nehru) का मन वकालत में ज्यादा नहीं लगता था और इसीलिए उन्होंने राजनीति को अपना क्षेत्र चुन लिया. गांधीजी ने उनकी क्षमताओं को समझा और उन्हें युवा कांग्रेस की कमान दे दी. नेहरु जी ने भी गांधीजी की राह पर चलते हुए नरमपंथी और सत्याग्रह जैसे हथियारों का प्रयोग करते हुए स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी. नेहरू आजादी के आंदोलन के दौरान बहुत बार जेल गए. 1920 से 1922 तक चले असहयोग आंदोलन के दौरान उन्हें दो बार गिरफ्तार किया गया. जब भारत आजाद हुआ तो उन्हें स्वतंत्र भारत का पहला प्रधानमंत्री बनाया गया. जवाहरलाल नेहरु अपने राजनैतिक कैरियर में भारत को कई उपलब्धियां दिलाईं. हालांकि कुछ मौको पर पंडित जवाहरलाल नेहरु (Jawaharlal Nehru) की दूरदर्शिता पर सवाल उठे हैं. लोग उन्हें ही कश्मीर, पाकिस्तान और चीन के मध्य तनाव की वजह मानते हैं.

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Teachings of Sri Guru Nanak Dev ji Tommorrow is the 545th Birth anniversary of the most simple, humble saint and a true reformer of humanity ,Sri Guru Nanak Devji.Though he was born about five and half centuries ago, his thinking, concepts and principles related to life and living were far ahead of its time and they have relevance in todays time and are contemporary even today. He believed in one God and strongly protested against blind faith and rituals. Basic Principles of the first Guru of Sikhs, Which he not only preached but lived his own life along these principles are 1.TRUISM :he says :"sabhe ooper sach hai,opper sach aachar" which means Truth is highest, but truthful living is higher still. 2.EQUALITY : Manas ki jaat sabhai ekai pahchanabo,which means We should treat all human being as one at equal level without bothering about the caste, creed and colour.he himself had two of his disciples and companions Bala and Mardana, one of them was ahindu and the other one was a muslim. UNIVERSAL BROTHERHOOD: He says :Ek pita ,Ekas ke hum Barik. which means we are children of one father ,so we all are brothers. WOMEN EMPOWERMENT : He said "so kiyun manda akhiye jit jamme rajan" which means why criticise and belittle women , who gives birth to Kings and all humanbeing. MEDITATION : Naam Japo. CORPORATE SOCIAL RESPONSIBITY : Kirat karo and Vand Chhako , where he says work diligently without harming anyone and give a part of 10% of your earning in charity. All the above mentioned Principles which corporates and the world over started shouting from 19th century onwards in loud voice like womens liberation ,womens rights and universall brothr=erhood for peace by certain philosophers and scholars, CSR by well established fianancial houses are the names given in todays world to those simple principles preached by Gur Nanak Dev ji . These principles are the need of the hour, in present scenario if we all follow these principles then there would be no war, no fight ,no animousity and no hatred amongst us and we all can lead the life of peace,love n sanctity and our beautifoul planet earth would become a paradise of love.

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नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के प्रथम दिन को शैलपुत्री नामक देवी की आराधना की जाती है. पुराणों में यह कथा प्रसिद्ध है कि हिमालय के तप से प्रसन्न होकर आद्या शक्ति उनके यहां पुत्री के रूप में अवतरित हुई और इनके पूजन के साथ नवरात्र का शुभारंभ होता है. Read: MATA SHAILPUTRI दूसरे दिन: ब्रह्मचारिणी भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए पार्वती की कठिन तपस्या से तीनों लोक उनके समक्ष नतमस्तक हो गए. देवी का यह रूप तपस्या के तेज से ज्योतिर्मय है. इनके दाहिने हाथ में मंत्र जपने की माला तथा बाएं में कमंडल है. तीसरे दिन: चंद्रघंटा यह देवी का उग्र रूप है. इनके घंटे की ध्वनि सुनकर विनाशकारी शक्तियां तत्काल पलायन कर जाती हैं. व्याघ्र पर विराजमान और अनेक अस्त्रों से सुसज्जित मां चंद्रघंटा भक्त की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहती हैं. चौथे दिन: कूष्मांडा नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के चौथे दिन भगवती के इस अति विशिष्ट स्वरूप की आराधना की जाती है. ऐसी मान्यता है कि इनकी हंसी से ही ब्रह्माण्ड उत्पन्न हुआ था. अष्टभुजी माता कूष्मांडा के हाथों में कमंडल, धनुष-बाण, कमल, अमृत-कलश, चक्र तथा गदा है. इनके आठवें हाथ में मनोवांछित फल देने वाली जपमाला है. पांचवे दिन: स्कंदमाता नवरात्र पर्व (Navratri Festival) की पंचमी तिथि को भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है. देवी के एक पुत्र कुमार कार्तिकेय (स्कंद) हैं, जिन्हें देवासुर-संग्राम में देवताओं का सेनापति बनाया गया था. इस रूप में देवी अपने पुत्र स्कंद को गोद में लिए बैठी होती हैं. स्कंदमाता अपने भक्तों को शौर्य प्रदान करती हैं. छठे दिन: कात्यायनी कात्यायन ऋषि की घोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवती उनके यहां पुत्री के रूप में प्रकट हुई और कात्यायनी कहलाई. कात्यायनी का अवतरण महिषासुर वध के लिए हुआ था. यह देवी अमोघ फलदायिनी हैं. भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने देवी कात्यायनी की आराधना की थी. जिन लडकियों की शादी न हो रही हो या उसमें बाधा आ रही हो, वे कात्यायनी माता की उपासना करें. सातवें दिन: कालरात्रि नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के सातवें दिन सप्तमी को कालरात्रि की आराधना का विधान है. यह भगवती का विकराल रूप है. गर्दभ (गदहे) पर आरूढ़ यह देवी अपने हाथों में लोहे का कांटा तथा खड्ग (कटार) भी लिए हुए हैं. इनके भयानक स्वरूप को देखकर विध्वंसक शक्तियां पलायन कर जाती हैं. आठवें दिन: महागौरी नवरात्र पर्व (Navratri Festival) की अष्टमी को महागौरी की आराधना का विधान है. यह भगवती का सौम्य रूप है. यह चतुर्भुजी माता वृषभ पर विराजमान हैं. इनके दो हाथों में त्रिशूल और डमरू है. अन्य दो हाथों द्वारा वर और अभय दान प्रदान कर रही हैं. भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए भवानी ने अति कठोर तपस्या की, तब उनका रंग काला पड गया था. तब शिव जी ने गंगाजल द्वारा इनका अभिषेक किया तो यह गौरवर्ण की हो गई. इसीलिए इन्हें गौरी कहा जाता है. नौवे दिन : सिद्धिदात्री नवरात्र पर्व (Navratri Festival) के अंतिम दिन नवमी को भगवती के सिद्धिदात्री स्वरूप का पूजन किया जाता है. इनकी अनुकंपा से ही समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं. अन्य देवी-देवता भी मनोवांछित सिद्धियों की प्राप्ति की कामना से इनकी आराधना करते हैं. मां सिद्धिदात्री चतुर्भुजी हैं. अपनी चारों भुजाओं में वे शंख, चक्र, गदा और पद्म (कमल) धारण किए हुए हैं. कुछ धर्मग्रंथों में इनका वाहन सिंह बताया गया है, परंतु माता अपने लोक प्रचलित रूप में कमल पर बैठी (पद्मासना) दिखाई देती हैं. सिद्धिदात्री की पूजा से नवरात्र में नवदुर्गा पूजा का अनुष्ठान पूर्ण हो जाता है.

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गांधीजी के अनुसार असल भारत ग्रामो मे रहता है भारत के ग्राम और ग्रामीण जनजीवन मुंशी प्रेमचंद के उपन्यासों और कहानियो मे रहता है मुंशी प्रेमचंद ने इन्सनियत के मर्म को अपनी अंतरात्मा में जिया है महसूस किया है उनकी कहानिया और उपन्यास आज भी प्रासंगिक है जमीदारी साहूकारी जातिवादी अत्याचारों को उन्होंने सजीव प्रस्तुत किया है प्रेमचंद कहानियो और उपन्यासों मे आज भी जीवंत है मै प्रेमचंद की कहानियो और उपन्यासों को बार बार पढता रहता हूँ विशेषकर गर्मी की दोपहर मै कही गावों मै या खेत पर बैठकर पढने मै बहुत अच्छा लगता है उनके लिए यही कहा जा सकता है की चलो घाट घाट पे आगे जरा क्या रक्खा है आलमगिरी मै जो मजा आये फकीरी मै वो मस्ती कँहा अमीरी मै कवि नीरज और प्रेमचंद हिंदी साहित्य के पर्याय है

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સૌરાષ્ટ્ર વૃક્ષછેદન ધારા ૧૯૫૧ની જોગવાઇ મુજબ ખાનગી માલીકીની જમીન પરના વૃક્ષો, પંચાયતની ગૌચર જમીન અને બીજી સામુહિક માલીકીની જમીનો તથા પંચાયતને આપેલ જમીનો પર વૃક્ષો કાપવા માટે કરેલ જોગવાઈ મુજબ નીચે પ્રમાણેના ૨૬ જાતના વૃક્ષો કાપવા માટે સક્ષમ અધિકારી ( ૧ અનામત વૃક્ષો: નાયબ વન સંરક્ષક, ૨ ઈતર કે બીનાનામત વૃક્ષો: જે તે જીલ્લાના કલેકટર)ની પરવાનગીની જરૂરત રહે છે. ૧ સાગ ૨ ચંદન ૩ સીસમ 9 ૪ મહુડો ૫ ખેર ૬ ટીમરૂં ૭ શીમળો ૮ સાદડ ૯ કરંજ ૧૦ કણજી ૧૧ સવન ૧૨ બીયો ૧૩ રોહન ૧૪ એબોની ૧૫ કડાયો ૧૬ કલમ ૧૭ હળદરવો ૧૮ હરડે ૧૯ ધાવડો ૨૦ આંબો ૨૧ તાડ ૨૨ ખજુરી ૨૩ જાંબુ ૨૪ દેશી બાવળ ૨૫ લીમડો ૨૬ ખીજડો (નોંધ: સાગ, સીસમ, ચંદન, મહુડો અને ખેર આ પાંચ જાતના વૃક્ષો જમીન મહેસુલધારા અન્વયે અનામત વૃક્ષ તરીકે જાહેર કરવામાં આવેલા છે.) રીપોર્ટ: કૃણાલ બારૈયા પ્રમુખ, વન પ્રકૃતિ ચેરીટેબલ ટ્રસ્ટ, સાવરકુંડલા.

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Science Association, Shardabai Pawar Mahila Mahavidyalaya, Shardanagar, Malegaon (Baramati) Dist. Pune – 413115. --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------“Dr. APIS” SCIENCE LEAFLET --------------------------------------------------------------------------------------------------------------------Objective: To Establish the Repository of Scientific Information For The Society. -------------------------------------------------------------------------------------------------------------------- Every year, on 14 June, countries around the world celebrate World Blood Donor Day (WBDD). The event, established in 2004, serves to raise awareness of the need for safe blood and blood products and to thank blood donors for their voluntary life-saving gifts of blood. World Blood Donor Day is one of eight official global public health campaigns marked by the World Health Organization (WHO), along with World Health Day, World Tuberculosis Day, World Immunization Week, World Malaria Day, World No Tobacco Day, World Hepatitis Day, and World AIDS Day.[1] Transfusion of blood and blood products helps save millions of lives every year. It can help patients suffering from life-threatening conditions live longer and with higher quality of life, and supports complex medical and surgical procedures. It also has an essential, life-saving role in maternal and perinatal care. Access to safe and sufficient blood and blood products can help reduce rates of death and disability due to severe bleeding during delivery and after childbirth.[2] In many countries, there is not an adequate supply of safe blood, and blood services face the challenge of making sufficient blood available, while also ensuring its quality and safety. An adequate supply can only be assured through regular donations by voluntary unpaid blood donors. WHO’s goal is for all countries to obtain all their blood supplies from voluntary unpaid donors by 2020. In 2014, 60 countries have their national blood supplies based on 99-100% voluntary unpaid blood donations, with 73 countries still largely dependent on family donors and paid donors.[3] Themes of World Blood Donor Day campaigns 2014: Safe blood for saving mothers The focus of the WBDD 2014 campaign, marked on 14 June 2014, is “Safe blood for saving mothers”. The goal of the campaign is to increase awareness about why timely access to safe blood and blood products is essential for all countries as part of a comprehensive approach to prevent maternal deaths. The global host for the WBDD 2014 event is Sri Lanka. Through its national blood transfusion service, Sri Lanka has been promoting voluntary unpaid donation to increase access to safe and sufficient blood and blood products. 2013: Give the gift of life The focus for the WBDD 2013 campaign – the 10th anniversary of World Blood Donor Day – was blood donation as a gift that saves lives. WHO encourages all countries to highlight stories from people whose lives have been saved through blood donation, as a way of motivating regular blood donors to continue giving blood and people in good health who have never given blood, particularly young people, to begin doing so. The host country for World Blood Donor Day 2013 was France. Through its national blood service, the Etablissement Français du Sang (EFS), France has been promoting voluntary non remunerated blood donation since the 1950s. References: 1. World Health Organization, WHO campaigns. 2. World Health Organization, Safe blood for saving mothers. 3. World Health Organization, Blood safety and availability. WHO Fact sheet N° 279, Updated June 2013. Accessed 8 April 2014. File: Dr.APIS.14.June@World.Blood.Donor.Day Compiled For : Science Association, Shardabai Pawar Mahila Mahavidyalaya, Shardanagar; Tal. Baramati; Dist. Pune – 413115 (India). With the Best Compliments From: Shardanagar (The Agro – academic Heritage of Grandsire Padmashri Dr. D. G. Alias Appasaheb Pawar).

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